अजब गजब : रीवा के इस गांव में हेलीकॉप्टर नहीं तो वोट नहीं, आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बन पाई सड़क

रीवा जिले के गंगेव जनपद की सेहदा ग्राम पंचायत अंतर्गत नेवरिया गांव में आजादी के 75 साल बाद भी सड़क नहीं बन पाई है। फिर भी जिला मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार बारिश के मौसम में हो रहे पंचायत चुनाव का पोलिंग बूथ नियुक्त कर दिया है। ऐसे में गांव के मतदाताओं ने निर्वाचन आयोग से शिकायत कर हेलीकॉप्टर की मांग की है। कहा है कि अभी समय रहते मतदान केन्द्र बदल दिया जाए। क्योंकि हल्की सी बारिश में ही गांव का संपर्क टूट जाता है। जिसके बाद मतदान दल पोलिंग बूथ तक नहीं पहुंच पाएगा। नतीजन आम मतदाता वोट करने से वंचित हो जाएंगे।

आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया गया कि ग्राम पंचायत सेदहा में 1328 मतदाता है। जिसमें पुरुष वोटर 711 और महिला वोटर 617 है। इस पंचायत में सेदहा गांव, नेवरिया गांव, नेवरिया लोहरा गांव, भमरिया गांव और बडिऔर गांव शामिल है। आरोप है कि नेवरिया गांव बरसात के समय 3 से 4 महीने तक मुख्य मार्ग से कटा रहता है। जरूरी कार्य आने पर लोग खेत की मेड़ व बहरा (नरवा) उतर कर जाते है।

पिछले चुनाव में पंचायत प्रत्याशियों ने किया खेल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मतदान केन्द्र क्रमांक 97 तीन दशकों तक सेदहा गांव में ही रहता था। लेकिन 1990 के दशक के चुनाव में पंचायत प्रत्याशियों ने खेल कर नेवरिया गांव ले गए। जबकि उस गांव में सड़क तक नहीं थी। सिर्फ उनका इतना स्वार्थ था कि हम गांव के है, हमारे गांव में मतदान केन्द्र रहेगा तो धमक वर्करार रहेगी। ऐसे में सेदहा और भमरिया गांव के लोगों ने मतदान केन्द्र बढ़ाने की मांग की है।

हेलीकॉप्टर नहीं तो वोट नहीं!

सेदहा गांव अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि गांव में जाने का रास्ता नहीं है। बारिश के समय सिर्फ हेलीकॉप्टर अथवा हवाई जहाज ही जा सकता है। हमारी निर्वाचन आयोग से मांग है कि यदि आप चाहते है तो सभी लोग मतदान करें तो हेलीकॉप्टर तैयार रखें। अथवा सेदहा गांव में पोलिंग बूथ बढ़ाया जाए। राजेन्द्र सिंह ​​परिहार ने कहा कि गांव में सड़क नहीं होने की शिकायत कई बार ​की, पर निराकरण नहीं किया गया। कई जनप्रतिनिधि भी आकर आश्वसन दिए। लेकिन आज तक सड़क नहीं बन पाई।

एसडीएम पर लापरवाही का आरोप

राजमणि सिंह पूर्व सरपंच हिनाती वर्तमान में सेदहा पंचायत का निवासी हूं। हमने गांव में सड़क नहीं होने की शिकायत जिला पंचायत सीईओ स्वप्निल वानखेड़े से की। तब उन्होंने मनगवां के एसडीएम एके सिंह को जांच कर 3 दिन के अंदर प्रतिवेदन देने के लिए कहा। लेकिन एसडीएम नेवरिया गांव जाकर पंचनामा हस्ताक्षर करवाकर प्रतिवेदन दे दिया। कहा कि नेवरिया के लोग चाहते हैं कि पोलिंग स्टेशन न बदला जाए।

प्रशासन की लगती, भुगते आम जनता

नंदलाल ने कहा कि नाला के कारण नेवरिया पोलिंग बूथ पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में सेदहा मतदान केन्द्र बनाकर समस्या का हल निकाला जा सकता है। क्योंकि सेदहा और भमरिया गांव एक जगह वोट कर लेंगे। वहीं दूसरी तरफ लोहरा और नेवरिया गांव के लोग वर्तमान पोलिंग बूथ का उपयोग कर सकते है। कहा कि मनगवां एसडीएम एके सिंह गलती का परिणाम आम जनता भुगत रहीं है। सैकड़ों ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश निर्वाचन आयोग व जिला निर्वाचन अधिकारी से पोलिंग स्टेशन बदलने की मांग की है।

तीन दशक बाद भी नहीं दिखी जिम्मेदारों को समस्या

प्रेमलाल ने आरोप लगाया कि हमारे मतदान केन्द्र की समस्या तीन दशक पुरानी है। यहां आधा दर्जन सरपंच बन चुके। जबकि रोजगार सहायक से लेकर सचिव और पटवारी का रोजाना आना जाना है। वहीं कई बार चुनाव में तहसीलदार व एसडीएम और कलेक्टर तक आ चुके है। चुनावी मौसम में वोट मांगने सांसद और विधायक भी आए, पर गांव की समस्या जस की तस है। भाषणों में सभी जिम्मेदार ज्ञान देते है, पर गौर कोई नहीं करता है।

हल्की बारिश में ही खुली व्यवस्थाओं की पोल

बता दें कि बीते दिन 15 जून को हल्की सी बारिश में ही मतदान केन्द्र के रास्ते की व्यवस्थाओं की पोल खुल चुकी है। आरोप है कि खुले खेत में जब जगह-जगह जल भराव है तो भरी बरसात की स्थितियां समझी जा सकती है। हालांकि चुनाव प्रेक्षक आरआर गंगारेकर ने सभी सेक्टर ऑफिसरों को अपने-अपने क्षेत्रों का नियमित रूप से भ्रमण करने के आदेश है। पर मैदानी अमला कहां भ्रमण कर रहा है, भगवान ही जाने।

There is no road in Nevariya village of Rewa district even after 75 years of independence

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