MP में बाढ़ से बर्बादी : एक हजार लोग बेघर, छोटे-बड़े दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में..

 
तबाही का मंजर:

MP में बारिश का रौद्र रूप, बाढ़ से हर तरफ तबाही का मंजर

मध्यप्रदेश में लगातार दो दिन हुई भारी बारिश के दौर को चार दिन बीत चुके हैं। अब पानी उतरने के बाद बाढ़ के जख्म नजर आ रहे हैं। चंबल नदी किनारे करीब 1000 लोग बेघर हो गए।  कई इलाके पानी में डूब गए हैं. हर तरफ तबाही और बर्बादी का मंजर नजर आ रहा है. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और राजस्थान (Rajasthan) में भारी बारिश (Heavy Rain) और बाढ़ (Flood) ने तबाही मचाई हुई है.

चंबल के भानपुर गांव के 1000 लोग बेघर

मुरैना जिले में धौलपुर हाईवे के पास भानपुर गांव। गुरुवार सुबह 11 बजे। जब हम यहां पहुंचे तो चारों ओर बर्बादी का मंजर था। ये गांव चंबल नदी के किनारे है। इस गांव के करीब 1000 लोग बेघर हो चुके हैं। कुछ लोग अब भी फंसे हुए हैं। प्रशासन ने इन लोगों के खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं की है। कई ग्रामीणों के मवेशी भी अब तक पानी में फंसे हुए हैं। कितने बह चुके हैं, इसका आकलन अभी नहीं हो पा रहा। लोग प्रशासन से राहत की आस लगाए बैठे हैं।

तबाही का मंजर:

बेतवा में तबाही

विदिशा जिले में दो दिनों तक बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई। कई बस्तियां जल मग्न रहीं। घरों में 5 से 6 फीट तक पानी भर गया। गुरुवार को हम रायपुरा बस्ती पहुंचे। यहां बाढ़ का पानी उतर चुका है। हालांकि कुछ घरों में अब भी पानी है और कुछ में कीचड़। लोगों का कहना है कि बाढ़ ने उनकी जिंदगी भर की कमाई पर पानी फेर दिया। अब उनके पास कुछ नहीं बचा। मोहर बाई कुशवाह के घर में अभी भी पानी भरा हुआ है। उनको पता ही नहीं क्या-क्या बह गया और क्या बचा है।

राजस्थान के बारां और करौली में भी बाढ़ से हालात बिगड़ने लगे हैं. डैम का पानी रिहायशी इलाकों में पहुंचा तो लोग सैलाब में घिर गए. पानी का प्रवाह सब कुछ अपने साथ बहा ले जाने पर आमादा है. लोग जान जोखिम में डालकर सैलाब के बीच से आने जाने को मजबूर हैं. पानी का तेज बहाव जैसे ही सड़क पर पहुंचा तो बाइक सवार पानी के तेज बहाव में लड़खड़ाने लगा. गनीमत रही कि वहां मौजूद लोगों ने उसे संभाल लिया.

मध्य प्रदेश और राजस्थान में बाढ़

कई जिले बुरी तरह से प्रभावित
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बाढ़ (Flood) भंयकर रूप ले चुकी है. एक दो नहीं कई जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. यहां बाढ़ का मंजर ऐसा है जैसे कि बादल फटने के बाद तबाही आई हो. आसमानी आफत कहर बनकर टूटी है. शहर के शहर डूब गए हैं. शिवपुरी, रतलाम, रायसेन, मुरैना, उज्जैन, राजगढ़ और मालवा जैसे जिलों में सैलाब आया हुआ है. गुना जिला इस सैलाब में घिर गया है और खुद सीएम  शिवराज सिंह (Shivraj Singh Chouhan) ने इस इलाके का हवाई दौरा किया है.

तबाही का मंजर:

रायपुरा बस्ती की जनमी बाई कुशवाह ने बताया कि जब बाढ़ आई तो उन्हें सामान निकालने का मौका नहीं मिला। चार दिनों तक उसका घर पानी में पूरा डूबा रहा। जिसके कारण घर गिरने की कगार पर है। जो थोड़ा बहुत सामान बचा है, उसे निकालने की कोशिश कर रही है। सीमा बाई की आंखों में आंसू थे। रूंधे गले से बोलीं- सबकुछ बर्बाद हो गया। अब देखना यह होगा इन परिवारों को बाढ़ ने जो जख्म दिए हैं उन पर प्रशासन कितनी जल्दी मरहम लगाता है। जिससे उनको राहत मिल सके।

विदिशा जिले के गांव रामलीला, बक्सरिया, रायपुरा, जानकी कुंज, राजपूत कालोनी, नदीपुरा , प्रधानमंत्री आवास, रंगई, बेसनगर, करारिया सहित जिले 100 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

पार्वती नदी शांत, छोटी पुलियाओं पर अब भी पानी

गुना में बारिश थमने के चार दिन बाद अब बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। जिले के 10 गांव पार्वती के रौद्र रूप से प्रभावित हुए हैं। 3 हजार लोगों पर बाढ़ का असर हुआ है। दो गांव ऐसे हैं, जहां के रास्ते अभी भी बंद हैं। ग्रामीण भगवान को यह धन्यवाद देते नजर आ रहे हैं कि उनकी जान बचा ली। जिंदा रहेंगे तो रोजी-रोटी की व्यवस्था किसी तरह कर ही लेंगें। ग्रामीण अपनी बची-खुची गृहस्थी को समेटने में लगे हुए हैं।

गुरुवार को हमारी टीम जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी दूरी स्थित सरवन बमुरिया गांव पहुंची। यह पार्वती नदी के एकदम किनारे पर बसा हुआ है। कुछ घर तो पार्वती के किनारे से महज 100 मीटर ही दूर हैं। टीम जब यहां पहुंची तो खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। मक्के के पौधे काले पड़ चुके हैं। छोटी पुलियाओं के ऊपर से अभी तक पानी जा रहा है।

गांव में सबसे पहले मुलाकात मान बाई से हुई। वह अपने कच्चे घर को सुधारने में लगी हुई थी। अपना दुखड़ा सुनाते हुए घर और बाढ़ से हुआ नुकसान दिखाने लगी। हालात यह थे कि उसके घर का सामान 100 मीटर दूर बहकर पार्वती किनारे लगी तार फेंसिंग में फंसा हुआ था। कपड़े, गद्दे-रजाई, छत पर लगा तिरपाल, सोफा तक बहकर इस फेंसिंग में फंस गया है। अगर फेंसिंग नहीं होती तो पूरा सामान बह जाता।

दो कमरों के कच्चे मकान में रहने वाली मान बाई कहती है कि इतना पानी जीवन ने कभी नहीं देखा। अचानक पानी आया तो कुछ सूझा ही नहीं। किसी तरह अपनी जान बचाकर भागे। पति-बच्चों ने पेड़ पर रात गुजारी। रात भर वह पेड़ पर बैठे रहे, तब जाकर जान बच पाई। कच्चा घर पूरी तरह गिर गया है। घर में रखी गेंहू की टंकी पानी भरने से फट गई। खाने तक के लिए कुछ नहीं बचा। तीन दिन से कुछ नहीं खाया। भूखे पेट अब बस अपनी गृहस्थी को संभालने में लगी हुई है।

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