B.Ed-D.El.Ed एडमिशन Scam : 50 हजार नकद दो... रसीद का सपना भी मत देखना! रीवा न्यूज़ मीडिया के महा-एक्सपोज़ से उड़े शिक्षा महकमे के तोते!

 
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दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया के स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा: तय फीस 35 हजार, निजी कॉलेज मांग रहे 1.5 लाख रुपये।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया (Rewanewsmedia.com) की स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम ने बड़ा पर्दाफाश किया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (D.El.Ed.) पाठ्यक्रम के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 35,000 रुपये फीस तय की गई है। इसके बावजूद प्रदेश भर के निजी कॉलेज अभ्यर्थियों से 1.5 लाख रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे हैं।

रीवा न्यूज़ मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि यह गोरखधंधा राजधानी भोपाल से लेकर सतना, खंडवा और विंध्य क्षेत्र के कई जिलों में धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। सरकारी पोर्टल पर दर्ज निर्धारित शुल्क पर किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है और विरोध करने पर अभ्यर्थियों को दाखिला देने से सीधे मना किया जा रहा है।

सरकार द्वारा निर्धारित फीस का पूरा गणित
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सत्र गाइडलाइंस के अनुसार, राज्य के विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों के आधार पर फीस तय की गई है। किसी भी निजी संस्थान को इस सीमा से अधिक राशि वसूलने का कानूनी अधिकार नहीं है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े नगर निगम क्षेत्रों के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 35,000 रुपये फीस निर्धारित है। वहीं, अन्य नगर निगम मुख्यालय वाले जिलों में यह सीमा 32,000 रुपये प्रति वर्ष रखी गई है, जबकि ग्रामीण व छोटे कस्बों के लिए 30,000 रुपये सालाना की फीस तय है। इसके बावजूद ग्राउंड जीरो पर इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

रीवा न्यूज़ मीडिया स्टिंग ऑपरेशन: भोपाल से सतना तक खुली धांधली की पोल
दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया की टीम द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन और रियलिटी चेक के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जब हमारी टीम ने अभिभावक बनकर अलग-अलग शहरों के कॉलेजों से संपर्क किया, तो एडमिशन के नाम पर खुली बोली देखने को मिली।

भोपाल के कॉलेज: राजधानी के निजी कॉलेजों में 1.5 लाख रुपये से कम में एडमिशन देने से साफ इनकार कर दिया गया। जब सरकारी नियमों का हवाला दिया गया, तो सीटें फुल होने का बहाना बना दिया गया।
खंडवा के कॉलेज: खंडवा के रवींद्रनाथ कॉलेज में बातचीत के दौरान 2 साल की फीस 1.20 लाख रुपये बताई गई और स्पष्ट किया गया कि परीक्षा शुल्क इसके अलावा अलग से देना होगा।
सतना के कॉलेज: सतना के शारदा देवी कॉलेज में फोन करने पर सीधे 60,000 रुपये प्रति वर्ष की मांग की गई। जब सरकारी गाइडलाइंस की बात कही गई, तो कॉलेज प्रबंधन का दोटूक जवाब था—"कम में पढ़ना है तो सरकारी कॉलेज जाइए।"

50 हजार नकद की मांग: ब्लैक मनी और बिना रसीद का खेल
रीवा न्यूज़ मीडिया के स्टिंग ऑपरेशन में भोपाल के नीलबड़ स्थित जोहरी कॉलेज की संचालक नीलिमा जोहरी के साथ हुई बातचीत का सनसनीखेज सच सामने आया है। पोर्टल पर भले ही वार्षिक फीस 35 हजार रुपये दर्ज हो, लेकिन संचालक द्वारा कुल 1.5 लाख रुपये की डिमांड की गई।

स्टिंग के दौरान साफ कहा गया कि एडमिशन पक्का करने के लिए 50 हजार रुपये नकद (Cash) लेकर तुरंत आना होगा। जब नकद राशि मांगने का कारण पूछा गया, तो तर्क दिया गया कि कॉलेज का ऑडिट हुआ है, इसलिए राशि कैश में ही ली जाएगी। पड़ताल में यह भी पाया गया कि यह संस्थान एक जर्जर भवन में संचालित हो रहा है, जहां क्लासरूम और प्रशासनिक दफ्तर एक ही कमरे में ठूंस दिए गए हैं।

प्रैक्टिकल और मेंटेनेंस के नाम पर छात्रों का आर्थिक शोषण
सरकारी कार्रवाई और जांच एजेंसियों से बचने के लिए निजी कॉलेजों ने अवैध वसूली का चालाक रास्ता निकाल लिया है। वे छात्रों को दी जाने वाली आधिकारिक रसीद में केवल सरकारी फीस की रकम ही दर्ज करते हैं, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा अन्य मनगढ़ंत मदों के नाम पर नकद वसूलते हैं।

विकास शुल्क (Development Charge), यूनिवर्सिटी मेंटेनेंस, प्रैक्टिकल फीस, स्पेशल गाइडेंस और अनऑफिशियल डोनेशन जैसे बहाने बनाकर पैसे ऐंठे जाते हैं। जो छात्र अतिरिक्त पैसे देने में असमर्थता जताते हैं, उन्हें प्रैक्टिकल में फेल करने और इंटरनल असेसमेंट (Internal Marks) के नंबर काटने की सीधी धमकी दी जाती है।

राज्य शिक्षा केंद्र की चेतावनी: दोषी कॉलेजों पर होगी कड़ी कार्रवाई
दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया द्वारा इस बड़े घोटाले का खुलासा किए जाने के बाद राज्य शिक्षा केंद्र और शिक्षा विभाग सख्त रुख अपना रहा है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर शिकंजा कसा जाएगा।
लोक शिक्षण और राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि निजी कॉलेजों द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने के जो मामले सामने आए हैं, उन पर विशेष टीमों का गठन कर जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कॉलेजों की मान्यता रद्द करने के साथ-साथ उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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