रीवा में भी आत्मनिर्भर भारत की मिसाल : नौकरी नहीं मिली तो थाम ली E-Rickshaw की स्टेयरिंग

 

रीवा में भी आत्मनिर्भर भारत की मिसाल : नौकरी नहीं मिली तो थाम ली E-Rickshaw की स्टेयरिंग

रीवा. भारत की बेटी यदि ठान ले तो सबकुछ कर सकती है। समय-समय पर बेटियों ने इसे साबित भी किया है। अब ऐसी ही एक मामला रीवा में सामने आया है जहां पिता की कमाई से परिवार पालाना मुश्किल हुआ तो बेटी ने पिता का हाथ बंटाने के लिए नौकरी करने का सोचा लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी कहीं नौकरी नहीं मिली। नौकरी न मिलने पर बेटी ने हिम्मत नहीं हारी और ई-रिक्शा (E-Rickshaw ) की स्टेयरिंग थाम ली। अब रोज इतना कमा लेती हैं कि उनका घर-परिवार आराम से चल रहा है।

नौकरी नहीं मिली तो थाम ली  E-Rickshaw की स्टेयरिंग (If I did not get the job, I took the steering of the E-Rickshaw)

देश के करोड़ों युवा बेरोजगार है, ऐसे में अगर आपको कोई लड़की ऑटो रिक्शा चलाते हुए दिख जाए तो समझिए वह आत्मनिर्भर भारत (self reliant india) की मिसाल है। रीवा शहर की रहने वाली 19 वर्षीय रेशमा भी नौकरी नहीं मिलने पर खुद पर भरोसा किया और ई-रिक्शा चला रही हैं।

नौकरी की तलाश में भटकी (wandered in search of job)

रेशमा (Reshma) बतातीं है कि 12वीं पास करने के बाद पिता की आमदनी इतनी नहीं थी कि आगे की पढ़ाई कर सकूं। शहर में नौकरी की तलाश में काफी भटकी लेकिन कही काम नहीं मिला। तब ऑटो रिक्शा चलाने की ठानी और किसी तरह इंतजाम करके ई-रिक्शा (E-Rickshaw) लिया। अब किश्त देने के बाद प्रतिदिन इतनी कमाई हो जाती है कि परिवार चलाने में पापा का सहयोग कर पा रही हूं।

पिता करते हैं पुरोहिताई (father performs priesthood)

रेशमा (Reshma) ने बताया कि उनके घर में सिर्फ पिता कमाते हैं। वे पुरोहिताई का काम करते हैं, लेकिन उससे इतनी आमदनी नहीं हो पाती की घर ठीक से चल सके। पिता की कमाई से घर बमुश्किल से चलता है। उनकी परेशानी को कम करने के लिए आगे पढ़ाई न करके रेशमा ने काम करना ठीक समझा। रेशमा युवाओं से कहतीं हैं कि चोरी करने और भीख मांगने कहीं बेहतर है कि खुद मेहनत करें और अपनी रोजी-रोटी के प्रबंध के लिए ऑटो रिक्शा ही क्यों न चलाना पड़े।

Example of self-reliant India in Rewa too: If I did not get a job, I took the steering of E-Rickshaw

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