हारे का सहारा: जानिए क्यों खाटू श्याम बाबा के दरबार में लगते हैं लाखों भक्तों के मेले, जानिए उनके जीवन से जुड़े 5 अनसुने रहस्य

 
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राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्याम जी मंदिर, महाभारत के बर्बरीक को समर्पित, जहाँ लाखों भक्त होते हैं एकत्रित | Khatu Shyam Ji Temple in Sikar, Rajasthan, Dedicated to Barbarika of Mahabharata, Where Millions of Devotees Gather

खाटू श्याम जी मंदिर, राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित, हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह मंदिर महाभारत के एक वीर योद्धा बर्बरीक को समर्पित है। बर्बरीक को भगवान कृष्ण ने कलियुग में अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था, जिसके बाद वे 'खाटू श्याम जी' के नाम से प्रसिद्ध हुए। यह मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है, जो उन्हें 'श्याम बाबा' और 'हारे का सहारा' जैसे नामों से पुकारते हैं।

मंदिर का इतिहास और पौराणिक मान्यताएं
मान्यता के अनुसार, बर्बरीक ने महाभारत के युद्ध में भाग लेने से पहले अपनी माता और भगवान कृष्ण के कहने पर स्वेच्छा से अपना शीश दान कर दिया था। ऐसा माना जाता है कि उनका शीश राजस्थान के खाटू गांव में प्रकट हुआ। इस स्थान पर एक गाय प्रतिदिन अपने आप दूध गिराती थी, जिसके बाद खुदाई की गई और वहाँ बर्बरीक का शीश मिला। यह शीश एक ब्राह्मण को सौंप दिया गया।

स्थानीय कथाओं के अनुसार, बाद में खाटू के तत्कालीन शासक राजा रूप सिंह चौहान को एक स्वप्न आया, जिसमें उन्हें उस शीश की स्थापना कर मंदिर बनाने का निर्देश मिला। इस स्वप्न के बाद, वर्ष 1027 ईस्वी में राजा रूप सिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कँवर ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। बाद में, वर्ष 1720 में ठाकुर के दीवान अभय सिंह ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।

धार्मिक महत्व और मेले
खाटू श्याम जी को विशेष रूप से राजस्थान और हरियाणा के भक्तों द्वारा महत्वपूर्ण देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें 'कलियुग का अवतार' भी कहा जाता है। बड़ी संख्या में भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और आशीर्वाद पाने के लिए यहाँ आते हैं।

मंदिर में हर साल फाल्गुन महीने की एकादशी को एक विशाल मेला लगता है, जिसे 'लक्खी मेला' के नाम से जाना जाता है। इसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। इसके अलावा, जन्माष्टमी, ग्यारस और दिवाली जैसे प्रमुख हिंदू त्योहार भी मंदिर में बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। खाटू श्याम बाबा का प्राकट्य दिवस, जिसे उनका जन्मोत्सव भी कहते हैं, देवउठनी एकादशी को मनाया जाता है।

सूरजगढ़ का श्याम ध्वज और इसकी महिमा
खाटू श्याम मंदिर के शिखर पर फहराया जाने वाला 'निशान' या ध्वज का विशेष धार्मिक महत्व है। यह ध्वज हर साल राजस्थान के झुंझुनू जिले के सूरजगढ़ कस्बे से लाया जाता है। इस सफेद कपड़े पर नीले घोड़े की आकृति बनी होती है, और इसे सूरजगढ़ के एक प्राचीन मंदिर में तैयार किया जाता है। फाल्गुन महीने के लक्खी मेले के दौरान, इस ध्वज को खाटूधाम लाया जाता है और मंदिर के शिखर पर स्थापित किया जाता है। यह परंपरा भक्तों की गहरी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।

मंदिर तक कैसे पहुँचें?
खाटू श्याम जी मंदिर जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भक्तों के लिए यहाँ तक पहुँचना बहुत आसान है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रींगस है, जो खाटू से लगभग 17 किलोमीटर दूर है। रींगस से खाटू तक पहुँचने के लिए बस, टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहन आसानी से उपलब्ध हैं।

मंदिर का प्रबंधन
खाटू श्याम जी मंदिर का प्रबंधन और व्यवस्थापन 'श्री श्याम मंदिर कमेटी (रजि.)' द्वारा किया जाता है। यह एक पंजीकृत संस्था है जो मंदिर की दैनिक गतिविधियों, मेलों के आयोजन और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का ध्यान रखती है। कमेटी का संचालन चुनाव के माध्यम से होता है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
खाटू श्याम जी का मूल नाम क्या था?
खाटू श्याम जी का मूल नाम बर्बरीक था, जो महाभारत के भीम के पोते थे।

खाटू श्याम जी को क्यों पूजा जाता है?
उन्हें भगवान कृष्ण द्वारा 'श्याम' नाम से पूजे जाने का वरदान मिला था। उन्हें हारे हुए लोगों का सहारा माना जाता है।

खाटू श्याम मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है।

खाटू श्याम जी का मेला कब लगता है?
मंदिर में प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की एकादशी को एक बड़ा मेला आयोजित होता है

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