आर्मीनिया देश से रीवा के बेटे आशुतोष के शव को इंडिया लाने की कवायद शुरू, गांव में मातम सरकार से मदद की आस

 
रीवा के आशुतोष

शिक्षक पिता ने पाई-पाई जुटाकर 50 लाख भेजी फीस

आर्मेनिया देश की राजधानी येरेवन शहर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए रीवा जिले के छात्र की संदिग्ध परिस्थितयों में मौत हो गई। 28 अगस्त को मिली निधन की सूचना से घर में मातम पसरा हुआ है। होनहार छात्र को खोने वाले माता पिता के रो-रोकर बुरा हाल है। गम के कारण तीन दिन से घर में चूल्हा नहीं जला है। रिश्तेदारों का आना-जाना जारी है। पूरा गांव आशुतोष द्विवेदी की मौत से दुखी है।

वहीं घर के जिम्मेदारों ने रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा और त्योंथर विधायक से संपर्क कर दुखड़ा सुनाया है। दावा है कि विधायक श्यामलाल द्विवेदी मृतक के मामा है। जिन्होंने सीएम शिवराज सिंह चौहान से पार्थिव शरीर को इंडिया लाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से फ्लाइट का खर्चा उठाने का भरोसा दिलाया है। ऐसे में गांव वाले एक-एक मिनट काटकर आशुतोष के पार्थिव शरीर की प्रतीक्षा में लगे है।


भारतीय दूतावास ने शुरू की कार्रवाई
दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय कार्यालय से मिले इनपुट के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। दिल्ली में रहने वाले मृतक छात्र के चचेरे भाई अरविंद द्विवेदी से बुधवार को आर्मेनिया स्थित भारतीय दूतावास ने संपर्क किया है। अरविंद द्विवेदी ने दैनिक भास्कर को बताया कि इंडियन एंबेसी ने पार्थिव शरीर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी कागजी प्रक्रिया चालू है। हर प्रकार के दस्तावेज ऑनलाइन दिए जा रहे है। आर्मेनिया से डायरेक्ट इंडिया के लिए प्लाइट नहीं है। ऐसे में नए तरह का रोड़ा आ गया है। इंडियन एंबेसी ने भरोसा दिलाया है कि बाया दुबई अथवा गल्फ कंट्री से पार्थिव शरीर हर हाल में भेजा जाएगा।

ऐसा है परिवार
त्योंथर जनपद के गढ़ी सोहर्वा गांव निवासी कैलाश नारायण द्विवेदी पेशे से शिक्षक है। उनके तीन बच्चा और एक बच्ची है। बेटी की शादी हो चुकी है। जबकि बड़ा बेटा सुदंरलाल द्विवेदी गांव में रहकर खेती किसानी करता है। वहीं दूसरे नंबर का 27 वर्षीय आशुतोष द्विवेदी एमबीबीएस फोर्थ ईयर की पढ़ाई आर्मेनिया से कर रहा था। इसी तरह सबसे छोटा भाई विकास द्विवेदी है। जो मैनपुरी की एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर है।

पिता ने पाई-पाई छोड़कर भेजे लाखों रुपए
गांव में चर्चा है कि टीचर पिता कैलाश नारायण द्विवेदी ने पाई-पाई जुटाकर करीब 50 लाख रुपए आशुतोष द्विवेदी की फीस भेजी है। कई बार रुपए घटने पर अपने बड़े भाई और भतीजों से सहयोग लिया है। जबकि बड़ा बेटा पूरी खेती का पैसा भी आशुतोष की पढ़ाई में समर्पित कर चुका था। रो-रोकर घर के सदस्यों ने कहा है कि हमारी असली पूंजी तो बेटा था। वह हम सबको छोड़कर चला गया है। अब उम्मीद है कि उसकी मिटटी जरूर वतन तक आए। जिससे हम लोग अंतिम दर्शन कर ले।

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