रीवा राजघराने ने हाईकोर्ट में बांधवगढ़ किले को लेकर दायर की याचिका : जानिए पूरा मामला

 
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मध्य प्रदेश (MP) के उमरिया (UMARIYA) ज़िले में है बांधवगढ़ नैशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) जो भारत का एक टाइगर रिज़र्व (TIGER RESERVE) है और जहां देश में बाघों की अच्छी संख्या है। लेकिन सिर्फ़ इसी वजह से हम नैशनल पार्क (national (park) की बात नहीं कर रहे हैं। पहाड़ों के बीच पार्क में एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है बांधवगड़ क़िला (Bandhavgarh fort) जो क़रीब 2000 साल (200 year old) पुराना है।

बांधवगढ़ का ये जंगल कभी रीवा रियासत (rewa riyasat) के बघेल राजाओं का शिकारगह हुआ करता था। बघेल राजाओं ने 13वीं से लेकर 17वीं शताब्दी तक यहां शासन किया था। हालंकि ये क़िला कई राजवंशों के शासन का गवाह रहा है लेकिन बघेल राजवंश (Baghel Dynasty) ने यहां सबसे ज़्यादा शासन किया था। दिलचस्प बात ये है कि क़िला किसने बनाया इसे लेकर कोई ख़ास जानकारी नहीं है लेकिन एक मिथक के अनुसार भगवान राम ने ये क़िला अपने भाई लक्ष्मण को दिया था। इसीलिये शायद इसका नाम बांधवगढ़ पड़ा जिसका मतलब होता है भाई का क़िला।

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बांधवगढ़ नैशनल पार्क का एक दृश्य

जानिए पूरा मामला

रीवा राजघराने ने हाईकोर्ट में बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) में बनी बांधवगढ़ किले को अधिग्रहित कर मुआवजा राशि देने के मामले में जवाब तलब किया है। पूर्व महाराजा मार्तंड सिंह (Former Maharaja Martand Singh) के पुत्र पुष्पराज सिंह (Son Pushpraj Singh) ने अपने अधिवक्ता अभिजीत अवस्थी (Advocate Abhijit Awasthi) की ओर से आवेदन दिया है कि स्वाधीनता के पूर्व 1954 में रीवा स्टेट (rewa state) विलय भारत में हुआ।

पुरातत्विद और पुरालेखवेत्ता (archaeologist and archivist) डॉ. एन.पी. चक्रवर्ती (Dr. NP Chakraborty) यहां सन 1938 में आए थे। खोज के दौरान उन्हें कुछ गुफाएं मिली थीं जिनमें से ज़्यादातर कृत्रिम थीं। इन पर ब्रह्मी लिपि में लिखे शिला-लेख भी मिले थे। ज़्यादातर ऐतिहासिक दस्तावेज़ में इस स्थान को बंधोगढ़ (Bandhogarh) कहा गया है। इन शिला-लेखों के अध्ययन से ही क़िले में रहने वालों के बारे पता चला। बांधवगढ़ की गुफाओं में मिले शिला-लेखों से न सिर्फ़ क़िले के इतिहास की जानकारी मिलती है बल्कि ईसवी काल की प्रारंभिक सदियों में मध्य भारत के इतिहास (history of india) के बारे में पता चलता है।

शिला-लेखों के अनुसार दूसरी और तीसरी शताब्दी के दौरान इस क़िले में मघा राजवंश (Magha Dynasty)  रहा करता था। राजाओं के नाम मघा से ख़त्म होते थे और शायद इसीलिये इस राजवंश का नाम मघा राजवंश पड़ा। बांधवगढ़ और कौशांबी जैसे कुछ अन्य स्थानों में इस राजवंश के सिक्के, सील और शिला लेख मिले थे। कौशांबी उत्तर प्रदेश में है और ये मघा राजवंश का गढ़ हुआ करता था। इस क़िले से राजवंश के नौ से ज़्यादा राजाओं ने शासन किया था। स्वतंत्रता के पश्चात रीवा राजघराने का भारत में विलय हो गया। राजघराने की कई संपत्तियां भी सहमति के पश्चात शासकीय घोषित हुई। लेकिन वर्तमान समय में एक मामला सामने आया है। जिसमें हाईकोर्ट (high court) ने केंद्र तथा राज्य सरकार को नोट जवाब तलब किया है।

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बांधवगढ़ में मिले शिलालेख में से एक | पुरातात्विक विभाग, एपिग्रफिआ इंडिका

इस राजवंश के सबसे पहले शासक वशिष्ठि पुत्र भीमसेन और उनका पुत्र कौतसीपुत्र पोठासिरी थे। इनके बाद अन्य शासकों में कौशिकी पुत्र भद्रदेव, भद्रमघा, गौतिमीपुत्र शिवमघा, सतमघा और विजयमघा के नाम आते हैं। मघा की सत्ता 300 ई.पू. के क़रीब समाप्त हो गई थी।

ट्रीटी आफ स्टेट (treaty of state) के तहत रीवा राजघराने की पूरी संपत्ति का वीडियो (video) बनाया गया। इस शेड्यूल में बांधवगढ़ (Bandhavgarh) का किला भी शामिल था। राजघराने के सदस्य 565 एकड़ में पहले इस किले में आते जाते थे। लेकिन बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) स्थापित हो जाने के बाद आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया।

ऐसे में याचिकाकर्ता पुष्पराज सिंह (Petitioner Pushpraj Singh) के अधिवक्ता का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 363 के तहत राजघराने की संपत्तियों को विशेष दर्जा प्राप्त है। सरकार संपत्ति के उत्तराधिकारी को उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकती।

साथ ही अधिवक्ता का कहना है कि वर्तमान समय में उक्त संपत्ति का उपयोग राज्य सरकार और वन विभाग (State Government and Forest Department) कर रही है। ऐसे में इस संपत्ति का अधिग्रहण कर उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। लेकिन इस ओर न तो वन विभाग का ध्यान जा रहा है और न ही सरकार का।

इन्हें जारी हुआ नोटिस

हाईकोर्ट एकल पीठ न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी (High Court Single Bench Justice Sanjay Dwivedi) ने तर्क सुनने के बाद नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) के सचिव, केंद्र सरकार के कैबिनेट सेक्रेटरी, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन विभाग के संयुक्त सचिव, (Joint Secretary, Central Environment and Forest Department) सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान वन संरक्षक शहडोल, बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर, कलेक्टर उमरिया को नोटिस जारी किया गया है।

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