Aarti Of Bihar River In Rewa : पंचमठा धाम में आज से रोज होगी भव्य आरती; नदी के किनारे जलाए गए 21 हजार दिये

 
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रीवा के पंचमठा मंदिर में आज से महाआरती की शुरुआत हुई है। बता दें कि आज अयोध्या में भगवान रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा की गई है और आज से ही रीवा में बीहर नदी की महाआरती की भी शुरुआत की गई है। अयोध्या में भगवान श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की जीवंत तस्वीर भी पंचमठा धाम में दिखाई गई। साथ ही इस पूरे परिसर में दीपोत्सव का नजारा भव्य दिखाई दिया। पंचमठा धाम में स्थित बीहर नदी की शोभा आज देखते ही बनी। शाम ढलते ही बीहर नदी रंग बिरंगी लाइटों से जगमग और रोशन नजर आई। जहां नदी के किनारे 21 हजार दिये भी जलाए गए।

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उपमुख्यमंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि आज का दिन बेहद ख़ास है क्योंकि आज एक यज्ञ पूरा हुआ है। बीहर नदी ने हमारे रीवा जिले की तस्वीर और तकदीर को बदल दिया है। क्योंकि इसके पानी से 400 मेगावाट की बिजली पैदा हो रही है और 3 लाख एकड़ की कृषि भूमि पर पानी भी पहुंचाया जा रहा है। जिसे भविष्य में जल्द ही 6 लाख एकड़ में पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश का कोई भी हिस्सा समृद्धि के मामले में हमारा मुकाबला नहीं कर पाएगा। हमारी समृद्धि में बीहर नदी का योगदान बहुत बड़ा है इसलिए भव्य आरती की परम्परा रामदरबार की ओर से शुरू की गई है।

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मान्यता के मुताबिक तकरीबन 1200 वर्ष पहले सनातन धर्म की स्थापना के लिए आदि शंकराचार्य देशाटन पर निकले थे। चार मठों की स्थापना के बाद वे सन 818 में रीवा आए थे। उस दौरान वे पंचमठा मंदिर वाले स्थान पर ही रुके थे और यह स्थान उन्हें बेहद प्रिय लगा था। जिसके बाद उन्होंने बीहर नदी के तट पर मंदिर की स्थापना की थी।

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आचार्य शिवम शुक्ला ने बताया कि रीवा में शास्त्रार्थ कर आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की स्थापना की घोषणा करते हुए कहा था कि रीवा में पांचवें मठ की स्थापना होगी। तभी से ये मंदिर भक्ति और आस्था का केंद्र है। तब से ही मंदिर का नाम पंचमठा मंदिर हो गया है। इस मंदिर के भव्य सुंदर और आकर्षक बनने के बाद अब इसका पुराना खोया हुआ वैभव लौटा आया है। पंचमठा मंदिर के महत्व को देखते हुए सरकार ने भी यहां के मंदिर, नदी के तट को और विकसित करने का प्रयास किया है। जहां अब इसकी सुंदरता देखते ही बनती है।

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