विंध्य को फिर चाहिए अपना हाई कोर्ट! रीवा के अधिवक्ताओं ने उठाई हुंकार, उप-मुख्यमंत्री को सौंपा 6 सूत्रीय मांग पत्र

 
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जिला एवं सत्र न्यायालय रीवा के अधिवक्ताओं ने अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर उप-मुख्यमंत्री को घेरा, बुनियादी सुविधाओं और हाई कोर्ट बेंच पर दिया जोर।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिला एवं सत्र न्यायालय के अधिवक्ताओं ने मध्य प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री के रीवा आगमन पर एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है। अधिवक्ताओं ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों और न्यायालय परिसर में व्याप्त बुनियादी समस्याओं को लेकर उप-मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया। यह ज्ञापन 'समस्त अधिवक्तागण रीवा' की ओर से दिया गया है, जिसमें विंध्य की अस्मिता और वकीलों के कार्यस्थल की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

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विंध्य की पुरानी मांग: रीवा में हाई कोर्ट की बेंच का मुद्दा
अधिवक्ताओं ने अपने ज्ञापन के पहले बिंदु में ही विंध्य प्रदेश की पुरानी यादें ताजा कीं। उन्होंने याद दिलाया कि रीवा कभी विंध्य प्रदेश की राजधानी थी और यहाँ हाई कोर्ट हुआ करता था। लंबे समय से चल रहे आंदोलन का हवाला देते हुए मांग की गई है कि रीवा विधानसभा के जनप्रतिनिधि होने के नाते उप-मुख्यमंत्री केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष रीवा में हाई कोर्ट की बेंच खोलने का प्रस्ताव मजबूती से भेजें।

अदालती परिसर में सुविधाओं का अभाव: धूप और बारिश की मार
नए न्यायालय भवन (परिसर) में आने के बाद अधिवक्ताओं, टाइपिस्टों और फोटोकॉपी स्टाफ को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि तेज धूप और बारिश के दौरान बैठने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि सर्विस बिल्डिंग में वकीलों और टाइपिस्टों के बैठने के स्थान को पूर्ण रूप से सुरक्षित कराया जाए और परिसर में व्यवस्थित टीन शेड के साथ वाहन स्टैंड की स्थापना की जाए।

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हनुमान जी की प्रतिमा का रहस्य और पुनर्स्थापना की मांग
ज्ञापन का एक सबसे संवेदनशील मुद्दा 14 अक्टूबर 2025 को न्यायालय परिसर में मिली प्रभु हनुमान जी की प्रतिमा का है। वकीलों के अनुसार, विधिवत पूजा के बाद अगले ही दिन वह प्रतिमा वहां से गायब हो गई थी। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि वह प्रतिमा फिलहाल लक्ष्मण बाग परिसर में सुरक्षित रखी है। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि उस प्रतिमा को ससम्मान वापस लाकर न्यायालय परिसर के पास ही कहीं स्थापित कराया जाए।

साफ-सफाई और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर नाराजगी
वकीलों ने शिकायत की है कि करोड़ों की लागत से बने इस परिसर में साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत दयनीय है। अधिवक्ता भवन और परिसर में गंदगी का अंबार रहता है, जिसके लिए नियमित सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग की गई है। इसके अलावा, सर्विस बिल्डिंग, कोर्ट बिल्डिंग और बार बिल्डिंग के बीच की दूरी कम करने के लिए इन्हें पिलर (ब्रिज) के माध्यम से जोड़ने का सुझाव दिया गया है ताकि कार्य करने में सुगमता हो।

क्या पूरा होगा वकीलों का संकल्प?
दिनांक 6 अप्रैल 2026 को सौंपे गए इस ज्ञापन पर हिमांशु द्विवेदी (Advocate High Court) और रवीन्द्र सोहगौरा सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर हैं। अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि क्या रीवा को हाई कोर्ट बेंच का अपना खोया हुआ गौरव वापस मिलेगा और क्या न्यायालय परिसर की अव्यवस्थाएं दूर होंगी।

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