महाराजा के बाद अब अधिकारियों का क्लब! रीवा में फ्री बिजली का खेल : आम लोगों से वसूला जा रहा बिल, अफसरों का क्लब चला रहा मुफ्त की बिजली

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा का विद्युत विभाग एक बार फिर बड़े घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। कुछ ही दिन पहले जहां महाराजा पुष्पराज सिंह की दुकानों के कई महीनों के जीरो बिल वायरल हुए थे, वहीं अब एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह मामला सिविल लाइन स्थित वेंकट क्लब का है, जो सरकारी अधिकारियों का एक प्रमुख ठिकाना है। इस क्लब में थ्री फेज कनेक्शन होने के बावजूद इसका जुलाई महीने का बिल जीरो जारी किया गया है। यह घटना बिजली विभाग में चल रही बड़ी धांधली और भ्रष्टाचार को उजागर करती है।
इस पूरे मामले में विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सवालों के घेरे में हैं। आम जनता पर स्मार्ट मीटर लगाने और समय पर बिल जमा करने का दबाव बनाया जाता है, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों को इसका फायदा पहुंचाया जा रहा है। इस तरह का भेदभावपूर्ण रवैया आम उपभोक्ताओं में आक्रोश पैदा कर रहा है।
क्या है वेंकट क्लब का मामला? आखिर बिल जीरो क्यों आ रहा है?
वेंकट क्लब सरकारी अधिकारियों के लिए एक मनोरंजक और खेलकूद का स्थल है। यहां दिन से रात तक अधिकारियों का जमघट लगा रहता है, और तमाम तरह की बिजली से चलने वाली सुविधाओं का उपयोग होता है। इसके बावजूद, इसका बिजली बिल जीरो आना हैरान कर देने वाला है। वेंकट क्लब का आईवीआरएस नंबर N1401000743 है और यह बीएसएसएस परिहार वेंकट क्लब के नाम से रजिस्टर्ड है।
जुलाई महीने के बिल में पुराना एरियर तो दिख रहा है, लेकिन नया बिल जीरो का है। इसमें एनर्जी चार्ज, फिक्स चार्ज, मीटरिंग चार्ज, और पैनल चार्ज जैसे सभी शुल्क शून्य दिखाए गए हैं। हद तो यह है कि इस कनेक्शन के लिए कोई सिक्योरिटी राशि भी जमा नहीं कराई गई है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
कौन हैं इस भ्रष्टाचार के पीछे? क्या चल रहा है विभाग में?
इस तरह के फर्जी बिलिंग के मामलों में जेई शिखा तिवारी और संविदा लाइन स्टाफ घनश्याम सिंह का नाम बार-बार सामने आ रहा है। इन दोनों पर आरोप है कि वे मिलकर शहर संभाग में बड़े उपभोक्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं। इससे विद्युत विभाग को लाखों रुपए का राजस्व नुकसान हो रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने भी इस मामले को उठाते हुए विभाग के अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बताया जा रहा है कि शहर संभाग में नरेन्द्र मिश्रा की पदस्थापना के बाद से ही इस तरह की मनमानी और भ्रष्टाचार बढ़ गया है। जहां एक तरफ आम उपभोक्ताओं का एक महीने का बिल भी ओवर होने पर बिजली काट दी जाती है, वहीं दूसरी तरफ लाखों रुपए बकाया रखने वाले बड़े उपभोक्ताओं पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यह दिखाता है कि विभाग में सब कुछ "गोलमाल" चल रहा है और अधिकारी मजे कर रहे हैं।
पुराने मामले और अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत
यह पहली बार नहीं है जब जेई शिखा तिवारी का नाम इस तरह के मामलों में सामने आया है। एई भूपेश विक्रम सिंह के शहर संभाग में रहते भी उन पर बड़ी बिजली चोरी का मामला पकड़ा गया था, लेकिन उस समय भी मामले को रफा-दफा कर दिया गया था। शिखा तिवारी को शिल्पी प्लाजा, कोठी कंपाउंड और आसपास के इलाकों से विशेष लगाव है, और वह इस क्षेत्र से कभी हटती नहीं हैं। अधिकारियों को भी पता है कि उन्हें पैसे से अधिक प्रेम है, फिर भी वे कार्रवाई करने से कतराते हैं।
इस तरह के घोटाले से आम जनता में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। वे जानना चाहते हैं कि क्या बिजली के नियम-कानून सिर्फ उनके लिए ही हैं? अधिकारी अपने क्लब और प्रभावशाली लोगों के बिल माफ करवा रहे हैं, जबकि आम जनता को स्मार्ट मीटर लगाकर और भी ज्यादा परेशान किया जा रहा है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर तत्काल ध्यान देने और सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।