APS University Rewa: "302 की 14 पेशी..." रीवा के प्रोफेसर ने छात्रों को दी ऐसी धमकी कि हिल गया पूरा विश्वविद्यालय, वीडियो वायरल!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित प्रतिष्ठित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APS University) एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विश्वविद्यालय परिसर के एक हॉल में छात्र और प्रोफेसर के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेज़ी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में एक वरिष्ठ प्राध्यापक छात्र को आपत्तिजनक और आक्रामक लहजे में धमकाते हुए नज़र आ रहे हैं। इस घटना के सामने आने के बाद परिसर में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया है और विभिन्न छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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विवाद की मुख्य वजह: देरी से आने पर छात्रों और प्रोफेसर के बीच तीखी बहस
मिल रही जानकारी के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के एक ऑडिटोरियम/सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान घटित हुआ। बताया जा रहा है कि छात्र अखिलेश शुक्ला और राहुल पांडेय कार्यक्रम में कुछ मिनट की देरी से पहुंचे थे। उनके देर से प्रवेश करने पर वहां मौजूद प्रोफेसर डॉ. आनंद सिंह आक्रोशित हो गए।

प्रोफेसर ने छात्रों पर अनुशासनहीनता और परिसर में राजनीति करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, छात्रों का कहना है कि उस समय कई अन्य शिक्षक भी विलंब से हॉल में दाखिल हुए थे, लेकिन केवल कुछ छात्रों को निशाना बनाकर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। जब छात्रों ने इसका शांतिपूर्वक विरोध दर्ज कराने का प्रयास किया, तो बहस बढ़ गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में प्रोफेसर यह कहते सुने जा रहे हैं कि वे किसी से नहीं डरते और छात्रों को गंभीर परिणाम भुगतने व परीक्षा में असफल करने तक की चेतावनी दे रहे हैं।

एनएसयूआई (NSUI) और एबीवीपी का विरोध: विश्वविद्यालय प्रशासन पर उठे सवाल
इस वीडियो के सार्वजनिक होते ही छात्र राजनीति से जुड़े संगठनों में तीव्र आक्रोश फैल गया है। राष्ट्रीय भारतीय छात्र संगठन (NSUI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) दोनों ने ही इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है। एनएसयूआई (NSUI) के रीवा जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 

उन्होंने कहा कि वीडियो में प्रोफेसर द्वारा दिए गए बयान अत्यंत चिंताजनक हैं। एनएसयूआई का आरोप है कि परिसर में अध्यापकों का व्यवहार छात्रों के प्रति निरंतर तानाशाहीपूर्ण होता जा रहा है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी प्रोफेसर पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो पूरे संभाग स्तर पर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। वहीं, एबीवीपी ने भी परिसर में भयमुक्त और सुचारू शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए मामले की त्वरित निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विश्वविद्यालय कुलपति और प्रोफेसर का पक्ष: क्या होगी आगामी कार्रवाई?
मामले के तूल पकड़ने के बाद जब संबंधित प्रोफेसर डॉ. आनंद सिंह से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फिलहाल इस विषय पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उच्च अधिकारियों की ओर से उन्हें सार्वजनिक रूप से बयानबाजी न करने के निर्देश दिए गए हैं।

दूसरी ओर, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) प्रोफेसर राजेंद्र कुमार कुररिया ने मामले को संज्ञान में लिया है। कुलपति ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, अभद्रता या भय का माहौल स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस पूरे विवाद की विस्तृत जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति (Enquiry Committee) के गठन की बात कही है। यह समिति वीडियो साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल पर पड़ता असर
किसी भी शैक्षणिक संस्थान में शिक्षक और विद्यार्थियों का संबंध मार्गदर्शन और सम्मान पर आधारित होता है। रीवा के इस प्रमुख विश्वविद्यालय में हुई इस प्रकार की घटना ने उच्च शिक्षा संस्थानों के भीतर अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सामान्य विद्यार्थियों और अभिभावकों का मानना है कि इस प्रकार के विवादों से विश्वविद्यालय की साख प्रभावित होती है और अध्ययनरत छात्रों के मन में असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गठित जांच कमेटी कितनी जल्दी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या ठोस निर्णय लेता है।

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