सावधान रीवा! चाचा कह पैर छुए, फिर लगा दिया ₹11,000 का चूना : रीवा में 'संस्कारी ठगों' का नया कारनामा
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) अपराध की दुनिया में रोज नए पैंतरे आजमाए जा रहे हैं और अब ये अपराधी रिश्तों की मर्यादा को भी अपने घिनौने मंसूबों का ढाल बना रहे हैं। रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र से ठगी का एक ऐसा ही हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जहां कुछ शातिर बदमाशों ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को 'चाचा' कहकर संबोधित किया, पैर छुए, आशीर्वाद लिया और फिर लिफ्ट देने के बहाने उनकी जेब से गल्ले की बिक्री के ₹11,000 उड़ा लिए।
यह घटना 13 जनवरी की दोपहर को हुई, जिसने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पुलिस प्रशासन को भी सकते में डाल दिया है। रीवा में ठगी कैसे हुई? यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है, खासकर जब अपराध इतने व्यक्तिगत और भावुक तरीके से किया जा रहा हो।
शिवराजपुर निवासी बंसीधर द्विवेदी बने शातिर ठगों का निशाना
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम शिवराजपुर निवासी बंसीधर द्विवेदी मंगलवार को बैकुंठपुर कस्बे में अपना गल्ला बेचने के लिए आए थे। उन्होंने अपनी फसल एक स्थानीय व्यापारी को ₹81,000 में बेची थी, जिसमें से ₹11,000 उन्हें नकद प्राप्त हुए। ये ₹11,000 लेकर वे पैदल ही बाजार की ओर लौट रहे थे, शायद उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी राह में एक शातिर बोलेरो सवार गिरोह घात लगाए बैठा है। यह घटना दर्शाती है कि रीवा में बुजुर्गों को ठगी से कैसे बचाएं यह अब एक गंभीर चुनौती बन गई है।
सम्मान का नाटक, ठगी का जाल: "चाचा, आप पैदल क्यों जा रहे हैं?"
पीड़ित बंसीधर द्विवेदी ने घटना का विस्तृत ब्यौरा देते हुए बताया कि वे सड़क पर पैदल चल रहे थे, तभी पीछे से एक सफेद रंग की बोलेरो गाड़ी आकर उनके बगल में रुकी। गाड़ी से कुछ युवक उतरे। उन्होंने बड़ी विनम्रता से झुककर बंसीधर के पैर छुए और उन्हें 'चाचा' कहकर संबोधित किया। ठगों ने ऐसे अभिनय किया जैसे वे बंसीधर के पुराने परिचित हों और उन्हें काफी समय से जानते हों। इस तरह, ठगों ने बंसीधर द्विवेदी का भरोसा कैसे जीता? यह उनके शातिरपन का सबसे बड़ा प्रमाण है।
बदमाशों ने बंसीधर से कहा, "चाचा, आप पैदल क्यों जा रहे हैं? आइए गाड़ी में बैठिए, हम आपको आगे छोड़ देते हैं।" बुजुर्ग अपनी सादगी और ग्रामीण परिवेश के चलते इन चिकनी-चुपड़ी बातों में आ गए। उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा कि जिस सम्मान का वे अनुभव कर रहे हैं, वह दरअसल एक बड़े धोखे का पर्दा है।
महज 200 मीटर का सफर और ₹11,000 गायब: "सिलेंडर लेने जाना है" का बहाना
बंसीधर द्विवेदी ने बताया कि वे उन ठगों की गाड़ी में बैठ गए। गाड़ी महज 200 मीटर दूर संस्कार मैरिज गार्डन के पास पहुंची ही थी कि बदमाशों ने अचानक 'सिलेंडर लेने जाना है' का बहाना बनाया। उन्होंने बंसीधर को गाड़ी से उतार दिया और कहा कि वे थोड़ी देर में लौटकर उन्हें आगे छोड़ देंगे। बुजुर्ग उनकी बातों पर भरोसा करके गाड़ी से उतर गए, जबकि ठग अपनी बोलेरो लेकर तेजी से आगे निकल गए।
बदमाशों के जाते ही जब पीड़ित बंसीधर ने अपनी जेब में हाथ डाला, तो उनके होश उड़ गए। उनकी जेब में रखे गल्ले की बिक्री के ₹11,000 गायब थे। उनकी आंखों के सामने पलक झपकते ही हुई इस ठगी ने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। बैकुंठपुर में ठगी कैसे हुई? इसका जवाब अब साफ था – सम्मान का दिखावा और चालाकी से पैसा गायब।
पुलिस प्रशासन की भूमिका: क्या करें अगर ठगी हो जाए?
इस घटना के तुरंत बाद पीड़ित बंसीधर द्विवेदी ने बैकुंठपुर थाने पहुंचकर मामले की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। बैकुंठपुर में कौन ठगी कर रहा है? पुलिस के सामने अब यह चुनौती है कि वह इस बोलेरो गैंग का पता लगाए और उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करे।
अगर आप या आपके कोई परिचित ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो क्या करें?
- तत्काल पुलिस को सूचित करें: जितनी जल्दी हो सके, नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर FIR दर्ज कराएं।
- पूरा विवरण दें: ठगी कैसे हुई, ठगों का हुलिया, गाड़ी का नंबर (यदि संभव हो), समय और स्थान का पूरा विवरण दें।
- साक्ष्य संभाल कर रखें: यदि कोई डिजिटल लेनदेन हुआ है या कोई मैसेज या कॉल रिकॉर्ड है, तो उसे सुरक्षित रखें।
- बैंक/वित्तीय संस्थान को सूचित करें: यदि आपके बैंक खाते से कोई लेनदेन हुआ है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और कार्ड ब्लॉक कराएं।
ठगी से कैसे बचें? बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां
इस तरह की घटनाएं समाज में बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। ठगी से कैसे बचें? यह हर नागरिक, विशेषकर बुजुर्गों के लिए जानना बहुत जरूरी है:
- अपरिचितों पर भरोसा न करें: कोई कितना भी अपनापन दिखाए, अपरिचित लोगों पर तुरंत भरोसा न करें।
- लिफ्ट देने वाले अजनबियों से सावधान: गाड़ी में लिफ्ट देने वाले अजनबियों से बचें, खासकर यदि वे आपको 'चाचा' या 'मामा' कहकर संबोधित करें। यह गाड़ी में लिफ्ट देने वाले ठगों से सावधान रहने का सबसे अच्छा तरीका है।
- अपनी नकदी सुरक्षित रखें: बड़ी रकम लेकर अकेले यात्रा करने से बचें। यदि नकद ले जाना आवश्यक हो, तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और किसी को उसकी जानकारी न दें।
- सतर्क रहें: बाजार या भीड़भाड़ वाली जगहों पर अपनी जेब और सामान पर विशेष ध्यान दें।
- परिवार को सूचित करें: यदि कोई अजनबी आपसे बात करने की कोशिश करे या अजीब लगे, तो तुरंत अपने परिवार के सदस्यों को बताएं।
- पुलिस हेल्पलाइन नंबर याद रखें: किसी भी आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 या अपने स्थानीय थाने का नंबर हमेशा अपने पास रखें।
रीवा में बढ़ती आपराधिक घटनाएं: पुलिस की चुनौती
हाल के दिनों में रीवा जिले में आपराधिक घटनाओं, विशेषकर ठगी और लूटपाट में वृद्धि देखने को मिली है। रीवा में क्राइम न्यूज़ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। पुलिस के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वह ऐसे शातिर गिरोहों पर लगाम लगाए जो भोले-भाले लोगों, खासकर बुजुर्गों को अपना निशाना बना रहे हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि सामुदायिक पुलिसिंग और जागरूकता अभियान कितने आवश्यक हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करे ताकि अपराधियों में भय का माहौल बने और आम जनता में सुरक्षा की भावना मजबूत हो। पुलिस ने ठगी के मामले में क्या कार्रवाई की है? इसका जवाब जल्द ही आना चाहिए।
FAQ
Q1: यह ठगी की घटना किस जगह हुई है? A1: यह घटना रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई है।
Q2: ठगी का शिकार कौन हुआ और कितनी रकम लूटी गई? A2: ग्राम शिवराजपुर निवासी बंसीधर द्विवेदी ठगी का शिकार हुए, जिनकी जेब से ₹11,000 नकद लूटे गए।
Q3: ठगों ने बुजुर्ग को कैसे लूटा? A3: ठगों ने बोलेरो गाड़ी में लिफ्ट देने के बहाने, बुजुर्ग के पैर छूकर और उन्हें 'चाचा' कहकर अपना विश्वास जीता और फिर गाड़ी से उतारते समय उनकी जेब से पैसे चुरा लिए।
Q4: पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है? A4: पीड़ित की शिकायत पर बैकुंठपुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस जांच कर रही है।
Q5: ठगी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए? A5: अपरिचितों पर तुरंत भरोसा न करें, अजनबियों से लिफ्ट लेने से बचें, बड़ी नकद राशि को सुरक्षित रखें और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।