सावधान रीवा वासियों! रीवा में स्वाद के नाम पर 'धीमा जहर': राधा स्वामी, बिहारी होटल, बावर्ची समेत कई नामी होटलों में गंदगी का अंबार; सो रहा खाद्य विभाग

 
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ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा शहर इस समय एक बेहद गंभीर और साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है। रीवा वासियों की सुबह और शाम जिसके बिना अधूरी है—यानी यहाँ का प्रसिद्ध 'समोसा और चाट'—वही स्वाद अब रीवा के नागरिकों के लिए धीमा जहर (Slow Poison) बन चुका है। शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों में संचालित होने वाले नामी फूड जॉइंट्स शुद्धता, स्वच्छता और मानवीय नैतिकता को पूरी तरह से डस्टबिन में फेंक चुके हैं। जिसे लोग बड़े चाव से तीखा-चटपटा स्वाद समझकर खा रहे हैं, वह असल में टाइफाइड, पीलिया (Jaundice), गैस्ट्रोएंटेराइटिस और लिवर को सड़ाने वाली संक्रामक बीमारियों का सबसे बड़ा हब बन चुका है। शहर के आम उपभोक्ताओं के हक पर डाका डालने वाले व्यापारिक सिंडिकेट का दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया ने बड़ा पर्दाफाश किया है। रीवा शहर की चौपाटियों और खान-पान के प्रमुख अड्डों पर नियमों को पूरी तरह से ठेंगे पर रखकर कारोबार चमकाया जा रहा है।

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हमारी टीम की ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ हुआ है कि शहर के बड़े फूड आउटलेट्स, जिनमें 'बावर्ची' (Bawarchi Fast Food) और 'प्रांकी रोल' (Pranky Roll Center) समेत उनके आस-पास संचालित होने वाले कई दुकानदार शामिल हैं, खुलेआम रसोई गैस (घरेलू सिलेंडरों) का कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं। व्यापारिक मुनाफा कमाने के लिए इन काउंटरों पर सरेआम उस गैस को फूंका जा रहा है, जो सरकार आम गरीब परिवारों को सब्सिडी पर मुहैया

दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया का Reality Check: सिरमौर चौराहे की MP-17 चौपाटी में मिला कड़वा सच

हमारी खोजी टीम ने जमीनी हकीकत जानने के लिए रीवा शहर के अलग-अलग कोनों में चल रही चौपाटियों का सघन जायजा लिया। इस पड़ताल में जो सबसे हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई, वह सिरमौर चौराहे के ठीक पीछे स्थित शहर की सबसे बड़ी और हाइफ़ाई चौपाटी 'MP-17' की है। शाम होते ही सजने वाले इस आलीशान खान-पान केंद्र की लगभग सभी दुकानों में नियमों का सरेआम कबाड़ा किया जा रहा था। मौके पर पड़ताल के दौरान एक भी ऐसा काउंटर या दुकान नहीं मिली, जहां नियमानुसार नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग हो रहा हो। यहाँ व्यापार करने वाले रसूखदारों ने कानून को पूरी तरह अपनी जेब में रख लिया है।

रसूखदार 'बावर्ची' और 'प्रांकी रोल' पर धधक रहे गरीबों के उज्ज्वला सिलेंडर, तस्वीरें गवाह

दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया की खोजी टीम ने जब कैमरों के साथ 'बावर्ची' आउटलेट और 'प्रांकी रोल' सेंटर के काउंटरों को खंगाला, तो सच सामने आ गया:

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  • तस्वीरों में साफ कैद अवैध खेल: 'बावर्ची' और 'प्रांकी रोल' के ठिकानों पर लाल रंग के घरेलू गैस सिलेंडर और केंद्र सरकार की 'उज्ज्वला योजना' के तहत बांटे गए गरीबों के सिलेंडर चलते हुए कैमरों में साफ-साफ कैद हुए हैं।
  • आस-पास के दुकानदारों की भी मनमानी: इन्हें देखकर आस-पास के छोटे-बड़े चाट, मोमोज और फास्ट फूड के स्टॉल वालों ने भी धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडर लगा रखे हैं। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि रीवा में गैस डिस्ट्रीब्यूटरों और इन रसूखदार दुकानदारों के बीच अवैध गैस सप्लाई का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

सवालों के घेरे में प्रशासनिक अमला: जनता कतारों में, तो फिर माफिया को कौन दे रहा है संरक्षण? इस सनसनीखेज खुलासे के बाद रीवा का प्रशासनिक तंत्र, खाद्य विभाग और गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर कटघरे में खड़ी हो गई है। आज शहर का आम मध्यमवर्गीय उपभोक्ता समय पर गैस रिफिल न मिलने के कारण हफ़्तों परेशान रहता है, बुकिंग कराने के बाद भी उसे लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि जब आम जनता के हिस्से की इतनी भारी मात्रा में घरेलू गैस कमर्शियल जगहों पर फूंक दी जाती है, तो इसकी निगरानी करने वाला दस्ता आखिर कहाँ सो रहा है? यदि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अमला समय-समय पर निष्पक्ष और नियमित निरीक्षण करे, तो इस अवैध खेल पर आसानी से प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

क्या कहता है कानून? व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पूरी तरह प्रतिबंधित है घरेलू रसोई गैस 

नियमों और वैधानिक प्रावधानों के अनुसार होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड सेंटर, चाय की दुकान या किसी भी प्रकार के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू (14.2 किलोग्राम वाले लाल) सिलेंडरों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित और गैर-कानूनी है। कमर्शियल गतिविधियों के लिए सरकार ने अलग श्रेणी के नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडर निर्धारित किए हैं। इसके बावजूद रीवा नगर निगम की सीमा में सरेआम इन गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे प्रत्यक्ष रूप से घरेलू गैस की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

जायके की आड़ में बीमारी का परोस: चौपाटी में लगा गंदगी का अंबार

रीवा की इन चौपाटियों में सिर्फ गैस का ही अवैध खेल नहीं चल रहा, बल्कि यहाँ आने वाले लोगों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। 'बावर्ची', 'प्रांकी रोल' और उनके आस-पास के पूरे परिसर में गंदगी का भयानक अंबार लगा हुआ है। दुकानों के पीछे सड़ा हुआ कचरा और गंदा पानी खुलेआम फैला रहता है, जिसके ऊपर मक्खियां भिनभिना रही हैं। नगर निगम के स्वच्छता नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बेहद दूषित वातावरण में खाद्य सामग्रियां तैयार की जा रही हैं, जो सीधे तौर पर महामारियों को आमंत्रण दे रही हैं।

रीवा के इन नामी समोसा सेंटर्स और होटलों में गंदगी का अंबार: ब्रांड के पीछे का घिनौना सच
रीवा के जागरूक नागरिकों और ग्राउंड जीरो से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, शहर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित और भीड़भाड़ वाले समोसा सेंटर्स पर जनता की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। आइए इन चेहरों को बेनकाब करते हैं:

रीवा के इन नामी समोसा-चाट सेंटर्स और होटलों में गंदगी का अंबार: ब्रांड के पीछे का घिनौना सच
रीवा के जागरूक नागरिकों और ग्राउंड जीरो से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, शहर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित और भीड़भाड़ वाले समोसा व चाट ठिकानों पर जनता की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। आइए इन चेहरों को बेनकाब करते हैं:

राधा स्वामी रेस्टोरेंट (सिरमौर चौराहा): शहर के इस सबसे व्यस्त चौराहे पर स्थित इस रेस्टोरेंट के बाहर खुले में चाउमीन, मंचूरियन और समोसे सजा कर रखे जाते हैं। दिनभर में गुजरने वाली हजारों गाड़ियों का काला धुआं, कार्बनिक गैसें और धूल के गुबार सीधे इन खाद्य पदार्थों पर जमते हैं। बिना किसी ढक्कन या कांच के कैबिनेट के, इसी 'धूल-धूसरित' और दूषित चाउमीन-समोसे को ग्राहकों की प्लेट में परोस दिया जाता है।

मामा चाट (पड़रा): पड़रा इलाके में इस स्टॉल पर शाम होते ही भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन यहाँ चाट और टिक्की बनाने के लिए जिस पानी और मसालों का इस्तेमाल होता है, उसकी शुद्धता भगवान भरोसे है। काउंटर के आसपास फैली गंदगी और नालियों की सड़ांध के बीच यहाँ सरेआम बीमारियां परोसी जा रही हैं।

दिल्ली दरबार व रज्जी चाट (साईं मंदिर व चौपाटी): साईं मंदिर के पास और उसके ठीक सामने चौपाटी के स्टॉल्स सहित दिल्ली दरबार और रज्जी चाट पर हाइजीन के मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं। मंदिर के सामने श्रद्धा से आने वाले लोग यहाँ का रुख करते हैं, लेकिन इन्हें नहीं पता कि यहाँ चाट के बर्तनों को धोने के लिए जिस पानी का बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, वह कीटाणुओं का घर बन चुका है।

राजू समोसा (खन्ना चौराहा): खन्ना चौराहे का यह नामी समोसा सेंटर भी लापरवाही में पीछे नहीं है। कड़ाही के पीछे झांकते ही रूह कांप जाएगी। रात का बचा हुआ बासी आलू का मसाला सुबह के ताजे लॉट में मिलाकर खपाना यहाँ का रोज का ढर्रा बन चुका है।

पुराने और नए बस स्टैंड के होटल्स: रीवा के पुराने और नए बस स्टैंड पर स्थित होटलों की हालत तो नरक से भी बदतर है। बाहर से आने वाले मुसाफिर मजबूरन इन होटलों में खाते हैं। यहाँ सड़ी-गली सब्जियों, खटारे मैदे और मक्खियों से भिनभिनाते काउंटरों के बीच खाना तैयार होता है। इन होटलों के बैकस्टेज यानी किचन के भीतर अगर कोई ग्राहक कदम रख ले, तो वह जीवन में कभी यहाँ का पानी पीना भी पसंद न करे।

बिहारी समोसा (अमहिया), तिवारी होटल (ढेकहा) व शगुन स्वीट्स: इन सभी बड़े नामों के चमचमाते काउंटरों के पीछे के बेसमेंट या किचन की असलियत बेहद घिनौनी है। सड़े हुए आलू और कीड़े लगी पत्तागोभी को बिना धोए सीधे कतर दिया जाता है।

FSSAI गाइडलाइंस की उड़ी धज्जियां: न ग्लव्स, न कैप; गंदे हाथों से सचेत हो रहा है कोढ़
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की साफ गाइडलाइन है कि भोजन बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों को प्रॉपर हाइजीन मेंटेन करनी होगी। लेकिन रीवा के इन सभी होटलों में FSSAI के नियम केवल कागजी पन्नों तक सिमट कर रह गए हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ देखा जा सकता है कि खाना बनाने वाले कारीगर और टेबल पर सर्व करने वाले कर्मचारी:

  • हाथों में किसी भी प्रकार के ग्लव्स (Gloves/Apron) का इस्तेमाल नहीं करते।
  • सिर पर शेफ कैप (Topi) नहीं पहनते, जिससे कई बार खाने में बाल गिरने की शिकायतें आम होती हैं।

गंदे, पसीने से लथपथ हाथों से ही सीधे समोसे को तोड़ना, कचौड़ी उठाना और चाउमीन को प्लेट में सजाना यहाँ की रोज की कार्यप्रणाली है। बिना हाथ धोए कर्मचारी उसी गंदे हाथ से पैसे का लेनदेन करते हैं और उसी हाथ से दोबारा खाद्य सामग्री छूते हैं, जो सीधे तौर पर बैक्टीरिया को आमंत्रण है।

खौफनाक हकीकत: जले हुए काले तेल का बार-बार इस्तेमाल और एसिडिक चटनी का तड़का
इन समोसा सेंटर्स का सबसे खौफनाक सच वह तेल है, जिसमें इन्हें छाना जाता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, कुकिंग ऑयल को एक या अधिकतम दो बार से ज्यादा गर्म नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसके बाद वह 'ट्रांस फैट' (Trans Fat) और कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) में बदल जाता है।

लेकिन बिहारी समोसा, तिवारी होटल और राधा स्वामी समेत रीवा के इन तमाम सेंटर्स पर कड़ाही का तेल तब तक नहीं बदला जाता जब तक वह जलकर तारकोल (डामर) जैसा काला न हो जाए। रोज बचे हुए जले तेल में ही नया तेल ऊपर से डाल दिया जाता है। यह काला तेल रीवा के युवाओं की धमनियों को ब्लॉक कर रहा है, जो कम उम्र में हार्ट अटैक और लिवर डैमेज का सबसे बड़ा कारण है।

इसके साथ जो मुफ्त में असीमित 'मीठी लाल चटनी' दी जाती है, उसे सड़े हुए अमचूर, केमिकल कलर्स (नॉन-फूड ग्रेड) और भारी मात्रा में कृत्रिम मिठास (Saccharin) से तैयार किया जाता है। यह एसिडिक चटनी पेट में अल्सर, भयंकर एसिडिटी और आंतों में घाव पैदा कर रही है।

कमर्शियल एरिया में घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध खेल: किसी बड़े हादसे का इंतजार?
लापरवाही सिर्फ गंदगी और खराब तेल तक सीमित नहीं है; इन होटल संचालकों की दादागिरी और चोरी का आलम यह है कि ये कमर्शियल उपयोग के लिए बड़े नीले सिलेंडरों के बजाय सरकार द्वारा आम जनता को सब्सिडी पर दिए जाने वाले लाल घरेलू गैस सिलेंडरों (Domestic LPG Cylinders) का धड़ल्ले से अवैध उपयोग कर रहे हैं।

व्यावसायिक क्षेत्रों में इस तरह घरेलू सिलेंडरों का रिसाव और असुरक्षित इस्तेमाल एक बड़े विस्फोट या भीषण आगजनी को बुलावा दे रहा है। इन होटलों के पास आग जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए न तो कोई फायर सेफ्टी (Fire Safety) के पुख्ता इंतजाम हैं और न ही फायर एनओसी। रसूख के दम पर यह अवैध खेल रीवा के रिहायशी और कमर्शियल दोनों इलाकों में खुलेआम चल रहा है।

कुंभकर्णी नींद में रीवा का खाद्य सुरक्षा विभाग: सिर्फ त्योहारों पर वसूली का नाटक
इस पूरे गोरखधंधे और मौत के व्यापार का सबसे बड़ा जिम्मेदार कोई है, तो वह है रीवा का खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग (Food Safety Department)। यह विभाग पूरी तरह से करप्ट और पंगु हो चुका है। सिरमौर चौराहा, अमहिया और ढेकहा जैसे वीआईपी और व्यस्त इलाकों से दिन में पचास बार प्रशासनिक अधिकारियों और खाद्य निरीक्षकों (Food Inspectors) की गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन इन्हें यह गंदगी कभी दिखाई नहीं देती।

रीवा की जनता के बीच यह चर्चा आम है कि यह खामोशी मुफ्त में नहीं खरीदी गई है। बड़े-बड़े होटल संचालकों से हर महीने एक निश्चित 'मंथली नजराना' या 'सुविधा शुल्क' अधिकारियों की जेबों तक नियमित पहुंचता है। यही वजह है कि इन दुकानदारों को जनता की जान से खेलने का खुला लाइसेंस मिला हुआ है।

"खाद्य विभाग के अधिकारी साल के 11 महीने एयरकंडीशनर कमरों में सोए रहते हैं। जैसे ही दीपावली, होली या रक्षाबंधन जैसे त्योहार आते हैं, ये दो-चार दुकानों पर सैंपल लेने का ढोंग रचते हैं, अख़बारों में नाम छपवाते हैं, और फिर अपनी सेटिंग करके सालभर के लिए गायब हो जाते हैं।" - रीवा के पीड़ित नागरिक

जानिए कानूनी प्रावधान: इन लापरवाह होटल संचालकों पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
यदि रीवा जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ईमानदारी से 'खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006' और FSSAI के कड़े कानूनों का पालन करे, तो इन मिलावटखोरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है:

संभावित कानूनी धाराएं और सजा की सूची

अपराध / लापरवाही संबंधित कानूनी धारा संभावित सजा / जुर्माना
अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन बनाना: बिना ग्लव्स, गंदगी और धूल के बीच निर्माण। FSSAI धारा 54 संचालक पर सीधे ₹1 लाख तक का जुर्माना
असुरक्षित/जहरीला भोजन परोसना: बार-बार जले तेल का उपयोग और केमिकल चटनी। FSSAI धारा 59 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास की सजा और ₹5 लाख का जुर्माना।
घरेलू सिलेंडर का कमर्शियल उपयोग: नियम विरुद्ध एलपीजी का इस्तेमाल। आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) सिलेंडर जब्ती और दुकान संचालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज
हाइजीन गाइडलाइंस का उल्लंघन: FSSAI लाइसेंस रद्दीकरण दुकान को तुरंत सील (Seize) करने का प्रावधान।

जनता से अपील:
'दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया' और 'बघेली मीडिया' के माध्यम से हम रीवा की जनता से अपील करते हैं कि केवल ब्रांड और नाम के पीछे न भागें। अपनी और अपने बच्चों की सेहत की रक्षा के लिए ऐसी अस्वच्छ दुकानों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करें। जब तक ये संचालक पूरी साफ-सफाई और FSSAI के नियमों का पालन नहीं करते, तब तक इनकी दुकानों पर ताला लटकना ही रीवा के नागरिकों के हित में है। अब देखना यह है कि रीवा के जिला कलेक्टर और फूड कमिश्नर इस गंभीर जमीनी हकीकत को देखने के बाद कब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं!

दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया से बोले SDM अनुराग तिवारी: "खबर के आधार पर होगी कड़ी कार्रवाई, खाद्य टीम को दी जानकारी" 
इस पूरे मामले और साक्ष्यों के साथ जब दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया की टीम ने सीधे रीवा अनुविभागीय अधिकारी (SDM) अनुराग तिवारी से संपर्क किया, तो उन्होंने इस पर तत्काल संज्ञान लिया।

एसडीएम अनुराग तिवारी का आधिकारिक बयान:
"घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग और चौपाटियों में इस तरह का संचालन पूरी तरह नियमों के विरुद्ध और अवैध है। दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया की टीम द्वारा जो ग्राउंड रिपोर्ट और साक्ष्य हमारे संज्ञान में लाए गए हैं, उस खबर को आधार बनाकर प्रशासन द्वारा तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हमने इस पूरे मामले की जानकारी खाद्य विभाग (Food Team) को दे दी है और उन्हें सख्त निर्देश जारी किए हैं। खाद्य विभाग की टीम बहुत जल्द इन चौपाटियों, 'बावर्ची' और 'प्रांकी रोल' समेत सभी संदिग्ध ठिकानों पर औचक निरीक्षण और छापेमारी करेगी। जहां भी घरेलू या उज्ज्वला योजना के सिलेंडर मिलेंगे, उन्हें तुरंत जब्त किया जाएगा और संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, गंदगी फैलाने वाले काउंटरों पर भी प्रशासनिक डंडा चलेगा।"

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