प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर: मनगवां से हनुमना तक बदला रूट, जाम से बचने के लिए प्रशासन की नई तरकीब!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) धर्म की नगरी प्रयागराज में आज, 3 जनवरी 2026 से माघ मेले का आगाज हो चुका है। लेकिन इस आध्यात्मिक उत्सव की आहट 1 जनवरी को ही मिल गई थी, जब रीवा-प्रयागराज मार्ग पर भीषण जाम की स्थिति बनी। नए साल के जश्न और मेले की तैयारियों के बीच प्रयागराज सीमा के भीतर लगभग 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इस जाम ने रीवा प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि अभी तो मुख्य स्नान पर्व बाकी हैं।

सोहागी घाटी और एमपी-यूपी बॉर्डर पर सुरक्षा का चक्रव्यूह
रीवा की सोहागी घाटी हमेशा से ट्रैफिक के लिहाज से संवेदनशील रही है। माघ मेला 2026 के दौरान यहाँ से 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के गुजरने का अनुमान है। 1 जनवरी को रीवा सीमा से महज 40 किमी पहले लगे जाम से सबक लेते हुए, अब सोहागी और चाकघाट बॉर्डर पर 'रियल टाइम मॉनिटरिंग' शुरू कर दी गई है। रीवा कलेक्टर और एसपी ने स्पष्ट किया है कि यदि सीमा पर दबाव बढ़ता है, तो वाहनों को होल्डिंग पॉइंट्स पर ही रोक दिया जाएगा।

माघ मेला 2026 में भीड़ का ग्राफ: इन 6 तारीखों को रहें सावधान
प्रयागराज संगम में डुबकी लगाने के लिए आने वाले 44 दिनों में 6 ऐसे खास दिन हैं, जब रीवा मार्ग पर पैर रखने की जगह नहीं होगी। प्रशासन ने इन तारीखों पर 24 घंटे का 'विशेष ट्रैफिक प्रोटोकॉल' लागू किया है:

पौष पूर्णिमा (3 जनवरी 2026): मेले का पहला आधिकारिक स्नान।
मकर संक्रांति (15 जनवरी): जब सूर्य देव का राशि परिवर्तन होगा और लाखों श्रद्धालु जुटेंगे।
मौनी अमावस्या (18 जनवरी): इस दिन मेले में सबसे ज्यादा जनसैलाब उमड़ने की संभावना है।
बसंत पंचमी (23 जनवरी): कल्पवासियों और संतों का मुख्य स्नान।

माघी पूर्णिमा (1 फरवरी): कल्पवास की पूर्णाहुति का दिन।
महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026): मेले का अंतिम और भव्य समापन स्नान।

सातों दिन रूट डायवर्ट: भारी वाहनों के लिए मनगवां-हनुमना का विकल्प
ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया है। निर्धारित स्नान तिथियों से एक दिन पहले रात 12:01 बजे से ही रूट डायवर्जन प्रभावी हो जाएगा।

भारी वाहनों का प्रवेश बंद: मनगवां से प्रयागराज की ओर जाने वाले ट्रकों और भारी मालवाहकों को मऊगंज और हनुमना की ओर मोड़ा जाएगा।
तीन शिफ्टों में ड्यूटी: पुलिस बल की तैनाती इस बार तीन शिफ्टों (सुबह 8 से 4, शाम 4 से रात 12, और रात 12 से सुबह 8) में की गई है, ताकि हाईवे पर एक पल के लिए भी निगरानी न हटे।

कुंभ की गलतियों से सुधार: क्यों रीवा प्रशासन है 'हाई अलर्ट' पर?
पिछला कुंभ मेला रीवा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ था। उस समय नेशनल हाईवे पर घंटों तक एम्बुलेंस और तीर्थयात्री फंसे रहे थे। उसी कड़वे अनुभव को आधार बनाकर इस बार कमिश्नर बीएस जामोद और कलेक्टर प्रतिभा पाल ने 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' तैयार किया है।

कुंभ के दौरान जाम की झलक

कुंभ के दौरान जाम की झलक

होल्डिंग पॉइंट्स: यदि प्रयागराज शहर में वाहनों की क्षमता भर जाती है, तो रीवा के चाकघाट और सोहागी में बड़े मैदानों को 'होल्डिंग स्टेशन' के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल: शहर के एंट्री पॉइंट्स पर सीसीटीवी कैमरों की मदद से हर वाहन की गतिविधि ट्रैक की जा रही है।

यात्रियों के लिए रीवा प्रशासन की विशेष अपील
रीवा प्रशासन ने श्रद्धालुओं और आम जनता से कुछ महत्वपूर्ण सहयोग मांगा है:

निर्धारित मार्ग का उपयोग: केवल उन्हीं रास्तों पर चलें जो प्रशासन द्वारा चिह्नित हैं।
धैर्य बनाए रखें: यदि जाम की स्थिति बनती है, तो होल्डिंग पॉइंट पर सहयोग करें।
वैकल्पिक रूट: छोटे वाहनों के लिए जरूरत पड़ने पर आंतरिक मार्गों की जानकारी पुलिस सहायता केंद्रों से लें।

विंध्य का पर्यटन और तीर्थयात्रियों की सुविधा
प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रीवा केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक पड़ाव भी है। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग यहाँ आने वाले लोगों को मैहर, चित्रकूट और रीवा के महामृत्युंजय मंदिर दर्शन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। हाईवे पर ढाबों और होटलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यात्रियों के साथ शालीन व्यवहार करें और उचित दर पर भोजन उपलब्ध कराएं।

निष्कर्ष: श्रद्धा और अनुशासन का संगम
माघ मेला 2026 केवल उत्तर प्रदेश का ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के रीवा संभाग के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। जहाँ एक तरफ श्रद्धालुओं की आस्था है, वहीं दूसरी तरफ यातायात को संभालना एक चुनौती। यदि प्रशासन का सहयोग और श्रद्धालुओं का अनुशासन मिल जाए, तो यह 44 दिवसीय महापर्व बिना किसी बड़ी बाधा के संपन्न होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. माघ मेला 2026 के दौरान रीवा से प्रयागराज जाने में कितना समय लगेगा? सामान्य दिनों में यह सफर 3-4 घंटे का है, लेकिन स्नान पर्वों पर ट्रैफिक डायवर्जन के कारण 5-7 घंटे लग सकते हैं।
2. क्या माघ मेले के दौरान भारी वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद है? नहीं, केवल प्रमुख स्नान तिथियों और भीड़ बढ़ने की स्थिति में भारी वाहनों को मनगवां से हनुमना की ओर डायवर्ट किया जा रहा है।
3. सोहागी घाटी में जाम से बचने के लिए क्या करें? सुबह जल्दी (भोर में) या देर रात यात्रा करने से बचें, क्योंकि ठंड और कोहरे के कारण वहां दुर्घटनाओं और जाम का खतरा ज्यादा रहता है।
4. प्रशासन की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर क्या है? रीवा ट्रैफिक पुलिस और चाकघाट पुलिस चेक पोस्ट पर विशेष सहायता केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ से आप रूट की जानकारी ले सकते हैं।

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