रीवा भाजपा में बड़ा उलटफेर : सिफारिशें धरी रह गईं, 'ऊपर' से तय हुआ नाम! रीवा युवा मोर्चा अध्यक्ष की दौड़ में ये 3 नाम सबसे आगे, उड़ गई दिग्गजों की नींद
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले की राजनीति में इन दिनों 'नियुक्तियों' का मौसम है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने जिस तरह प्रवीण त्रिपाठी को किसान मोर्चा की कमान सौंपी, उसने स्थानीय स्तर पर कई बड़े दिग्गजों के गणित बिगाड़ दिए हैं। अब सबकी नजरें भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के अगले जिलाध्यक्ष पर टिकी हैं। मैदान में कई ऐसे चेहरे हैं जिनके पीछे आरएसएस से लेकर कैबिनेट मंत्रियों तक का वरदहस्त है।
जातीय समीकरण और ब्राम्हण कार्ड: क्या बदलेगी रणनीति?
भाजपा ने किसान मोर्चा में युवा और ब्राम्हण चेहरे (प्रवीण त्रिपाठी) पर दांव लगाकर यह संकेत दे दिया है कि संगठन इस बार 'सिफारिश' से ज्यादा 'रणनीति' को तवज्जो दे रहा है।
चूंकि एक महत्वपूर्ण पद पर ब्राम्हण वर्ग की नियुक्ति हो चुकी है, इसलिए अब युवा मोर्चा और महिला मोर्चा में जातीय संतुलन (Caste Equation) बिठाना बड़ी चुनौती है। यदि पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या अन्य वर्गों को साधने की कोशिश करती है, तो कई ब्राम्हण दावेदारों की राह मुश्किल हो सकती है। हालांकि, रीवा की राजनीति में ब्राम्हण चेहरों का वर्चस्व हमेशा से निर्णायक रहा है।
शक्ति प्रदर्शन: जानिए कौन सा दावेदार किसके करीब?
युवा मोर्चा की कुर्सी तक पहुँचने के लिए तीन-चार प्रमुख गुट सक्रिय हैं:
देवांशु मिश्रा: इन्हें RSS (संघ) की पृष्ठभूमि का लाभ मिल रहा है। अनुशासित और वैचारिक रूप से मजबूत होने के कारण संगठन स्तर पर इनका पलड़ा भारी माना जा रहा है।

अमित तिवारी: यह सबसे अनुभवी नाम है। इन्हें डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल और प्रदेश मंत्री राजेश पाण्डेय का बेहद करीबी माना जाता है। अनुभव के मामले में यह सबसे आगे हैं, लेकिन 'उम्र' इनके लिए बाधा बन सकती है।
दुर्गा तिवारी: पूर्व राष्ट्रीय मंत्री गौरव तिवारी के गुट से जुड़े दुर्गा तिवारी को भी कम नहीं आंका जा सकता। गौरव तिवारी की प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से नजदीकी इनके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है।
प्रदीप पटेल: नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय के समर्थन से प्रदीप पटेल भी मजबूती से डटे हैं। यदि पार्टी ओबीसी चेहरे पर विचार करती है, तो इनका नाम सबसे ऊपर आ सकता है।
ABVP और जमीनी सक्रियता: युवाओं के बीच किसकी पैठ?
छात्र राजनीति से निकले चेहरों की दावेदारी भी इस बार बहुत मजबूत है:

हिंमाशु कौशल गुप्ता: एबीवीपी बैकग्राउंड होने के साथ-साथ यह जातीय संतुलन में भी फिट बैठते हैं।
सूर्य प्रताप तिवारी: संगठन में गहरी पैठ और जुझारू तेवरों के कारण चर्चा में हैं।
अनिमेष द्विवेदी (मंटू) और ऋतुराज चतुर्वेदी: ये दोनों नाम जमीनी स्तर पर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। अनिमेष द्विवेदी की सक्रियता उन्हें एक 'मास लीडर' के रूप में पेश करती है।

उम्र का गणित: किसका पलड़ा भारी?
संगठन इस बार 'युवा' शब्द को सार्थक करने के मूड में है। वर्तमान दावेदारों की उम्र पर एक नजर डालें तो स्थिति कुछ ऐसी है:
क्या फिर चौंकाएगा संगठन?
जिस तरह किसान मोर्चा में जिला अध्यक्ष की सिफारिशों को दरकिनार कर प्रवीण त्रिपाठी का नाम सामने आया, उससे साफ है कि युवा मोर्चा में भी कोई 'डार्क हॉर्स' बाजी मार सकता है। पार्टी हाईकमान की नजर ऐसे चेहरे पर है जो 2028 की तैयारी के लिए युवाओं की एक अभेद्य फौज खड़ी कर सके।