इटौरा ITI कॉलेज का काला कारनामा : छात्रों को श्रमिक बनाकर गुजरात कंपनी को 'बेचा', कलेक्टर-SP से हुई बड़ी शिकायत! 1500 रुपये कमीशन के चक्कर में दांव पर लगाया भविष्य
रीवा जिले के इटौरा बायपास स्थित एक निजी आईटीआई (ITI) कॉलेज से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के दर्जनों छात्रों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें बेहतर ट्रेनिंग और सुविधाओं का सपना दिखाकर गुजरात भेजा, लेकिन वहाँ उनके साथ अपराधियों जैसा सुलूक किया गया। छात्रों ने रविवार को वापस लौटकर अपनी आपबीती कलेक्टर और एसपी को सुनाई है।
ट्रेनिंग का झांसा और 16 घंटे की बंधुआ मजदूरी
छात्रों (दिव्यांशु, दीपक, शिवम, पुष्पराज व अन्य) का कहना है कि उन्हें 13 अप्रैल 2026 को इस भरोसे के साथ अहमदाबाद भेजा गया था कि उन्हें 8 घंटे काम करना होगा और रहने-खाने की मुफ्त सुविधा मिलेगी। लेकिन हकीकत इसके उलट निकली।
- छात्रों से प्रतिदिन 16-16 घंटे कठिन परिश्रम कराया गया।
- रहने के नाम पर हर छात्र से 1500 रुपये की अवैध वसूली की गई।
- पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण कई छात्र दिनों तक भूखे रहे।
फेल करने की धमकी देकर जबरन भेजा गुजरात
छात्रों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वे स्वेच्छा से गुजरात नहीं गए थे। कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों ने उन पर दबाव बनाया कि यदि वे इस "ट्रेनिंग" पर नहीं जाते हैं, तो उन्हें परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा। अपना भविष्य बचाने की खातिर छात्र इस जाल में फँस गए। आरोप है कि संस्था ने प्रत्येक छात्र के बदले कंपनी से मोटा कमीशन लिया है।
नाबालिगों के साथ मारपीट और गंभीर चोटें
मामला सिर्फ काम कराने तक सीमित नहीं रहा। छात्रों ने शिकायत में बताया है कि कुछ नाबालिग छात्रों को महाराष्ट्र के केंद्रों पर भेजा गया था। वहाँ विरोध करने पर उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। इस हिंसा में एक छात्र का हाथ टूटने की भी खबर है। जब छात्रों ने रीवा में अपने शिक्षकों और प्राचार्य अजय सिंह पटेल से संपर्क किया, तो उन्हें मदद के बजाय उसी स्थिति में समझौता करने को कहा गया।
प्रशासनिक कार्रवाई: कलेक्टर और एसपी तक पहुँचा मामला
गुजरात के नर्क से किसी तरह बचकर निकले इन छात्रों ने अब न्याय की गुहार लगाई है। रीवा एसपी और कलेक्टर को सौंपी गई लिखित शिकायत में कॉलेज के शिक्षकों- पुष्पेंद्र पटेल, गौरव सिंह, संतोष सिंह परिहार और प्राचार्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
शिक्षा के नाम पर कमीशनखोरी का काला खेल
यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ निजी शिक्षण संस्थान छात्रों के भविष्य और उनके श्रम को पैसों के लिए बेच रहे हैं। 'स्किल इंडिया' के नाम पर छात्रों को श्रमिक बनाना न केवल गैरकानूनी है बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। अब देखना होगा कि रीवा प्रशासन इन "शिक्षा के सौदागरों" पर क्या कार्रवाई करता है।