सावधान! रीवा के जोगिनहाई टोल से गुजर रहे हैं तो रुकिए: रसीद चेक की या आप भी हो गए फर्जीवाड़े के शिकार? नकद वसूली का सनसनीखेज पर्दाफाश, गाड़ी आपकी... पर्ची किसी और की!

 
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रीवा के रायपुर कर्चुलियान स्थित जोगिनहाई टोल प्लाजा पर वाहन चालकों ने लगाया गंभीर आरोप। नकद पैसे लेकर दूसरी गाड़ियों की रसीद देने और विरोध पर मारपीट की धमकी का मामला आया सामने।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से गुजरने वाले वाहन चालकों और आम यात्रियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जिले के रायपुर कर्चुलियान अंतर्गत स्थित जोगिनहाई टोल प्लाजा पर टोल वसूली की आड़ में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है।

लगातार मिल रही शिकायतों के अनुसार, इस टोल नाके पर तैनात कर्मचारियों द्वारा वाहन चालकों से नियमों को ताक पर रखकर नकद (Cash) टोल टैक्स वसूला जा रहा है, और बदले में जो रसीद (Toll Receipt) दी जा रही है, उसमें भारी झोल है। इस खुलासे के बाद नेशनल और स्टेट हाईवे अथॉरिटी के नियमों की धज्जियां उड़ती साफ दिखाई दे रही हैं। घटना को लेकर स्थानीय लोगों और विभिन्न मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल व प्राइवेट वाहन चालकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

कैसे हो रहा है खेल: नकद वसूली और गलत पर्ची का पूरा तरीका
शिकायतकर्ताओं और पीड़ित वाहन चालकों ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश करते हुए बताया कि टोल प्लाजा पर सोची-समझी रणनीति के तहत इस गड़बड़ी को अंजाम दिया जा रहा है।

डिजिटल ट्रांजैक्शन से बचाव की कोशिश
यद्यपि पूरे देश में फास्टैग (FASTag) और डिजिटल पेमेंट को अनिवार्य किया जा चुका है, इसके बावजूद जोगिनहाई टोल प्लाजा पर कई वाहनों से जानबूझकर या सर्वर डाउन होने का बहाना बनाकर नकद (Cash) राशि ली जाती है।

'वाहन कोई और, रसीद किसी और की' का खेल
सबसे गंभीर गड़बड़ी रसीद सौंपने में हो रही है। जब कोई चालक नकद पैसे देता है, तो टोल कर्मी उसे उस समय मौके पर खड़े वाहन की वास्तविक पर्ची न देकर, पहले से कटी हुई या किसी अन्य पुराने वाहन की पर्ची थमा देते हैं।
 

ठोस सबूत: कई सजग वाहन चालकों ने इस धोखाधड़ी के पुख्ता प्रमाण (फोटो और वीडियो के रूप में) भी साझा किए हैं। इन साक्ष्यों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि टोल बूथ की लेन में जो गाड़ी खड़ी है, उसका नंबर कुछ और है, जबकि उसके हाथ में जो रसीद मौजूद है, उस पर किसी दूसरी ही कार या ट्रक का नंबर दर्ज है। यह सीधे तौर पर टैक्स चोरी और रिकॉर्ड में हेराफेरी का मामला प्रतीत होता है।

विवाद, अभद्रता और गुंडागर्दी: वाहन चालकों की आपबीती
जोगिनहाई टोल प्लाजा पर मामला सिर्फ कागजी या वित्तीय हेरफेर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर लगी हुई है। वाहन चालकों का आरोप है कि जब कोई पढ़ा-लिखा या जागरूक नागरिक रसीद पर गलत नंबर देखकर उसका विरोध करता है या सही पर्ची काटने की मांग करता है, तो टोल कर्मी अपनी गलती सुधारने के बजाय आक्रामक हो जाते हैं।

  • गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार: काउंटर पर बैठे कर्मचारियों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग आम बात हो चुकी है।
  • मार्केट और धमकी: विरोध दर्ज कराने पर बूथ के अंदर और बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड व अन्य स्टाफ एकजुट होकर वाहन चालक को घेर लेते हैं। चालकों को डराया-धमकाया जाता है, गाली-गलौज की जाती है और कई मामलों में तो मारपीट और वाहन को बंधक बनाने तक की धमकी दी जा रही है।
  • यात्रियों में खौफ: परिवार के साथ यात्रा कर रहे आम नागरिक इन गुंडागर्दी करने वाले कर्मियों के डर से चुपचाप गलत पर्ची लेकर निकलने को मजबूर हैं।

MPRDC और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग (CCTV फुटेज खंगालने की अपील)
इस गंभीर और संगठित प्रतीत होने वाले फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद, स्थानीय समाजसेवियों, नागरिक मंचों और पीड़ित वाहन चालकों ने संयुक्त रूप से शासन-प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।

मामले को लेकर MPRDC (Madhya Pradesh Road Development Corporation) और संबंधित टोल संचालन कंपनी के उच्चाधिकारियों से लिखित और मौखिक शिकायतें की गई हैं। मांग की गई है कि:

  • इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।
  • टोल बूथों के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज और कंप्यूटर सिस्टम के डेटा लॉग्स की बारीकी से फोरेंसिक जांच हो, जिससे यह पता चल सके कि प्रतिदिन कितनी गाड़ियों को गलत पर्चियां जारी की जा रही हैं।
  • नकद वसूली के इस रैकेट में शामिल दोषी कर्मचारियों को तत्काल नौकरी से बर्खास्त किया जाए और उनके संरक्षणदाता प्रबंधन व ठेकेदार के खिलाफ कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई (FIR) दर्ज की जाए।

जोगिनहाई टोल विवाद से जुड़े मुख्य कानूनी और तकनीकी पहलू
यदि इस मामले को गहराई से समझा जाए, तो यह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य सड़क विकास निगम (MPRDC) के दिशानिर्देशों का सीधा उल्लंघन है:

  • FASTag नियमों की अवहेलना: नियमानुसार हर बूथ पर फास्टैग सक्रिय होना चाहिए। यदि जानबूझकर नकद लेनदेन को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो यह वित्तीय पारदर्शिता को खत्म करने की कोशिश है।
  • दस्तावेजों में हेराफेरी (Forgery): किसी अन्य वाहन के नंबर की पर्ची किसी दूसरे वाहन को देना कानूनी रूप से धोखाधड़ी (IPC/BNS की प्रासंगिक धाराएं) के दायरे में आता है।
  • उपभोक्ता अधिकारों का हनन: टोल टैक्स देने वाला हर नागरिक एक 'कंज्यूमर' (उपभोक्ता) है और उसे सही बिल या रसीद प्राप्त करने का पूरा कानूनी अधिकार है।

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