कलेक्टर का अबतक का सबसे सख्त एक्शन : रीवा में अवैध प्लॉटिंग का 'खेल' खतम: 12 भू-स्वामियों पर आपराधिक केस, अब सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों की खैर नहीं!

 
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ऋतुराज द्विवेदी (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले में बिना वैधानिक स्वीकृति के कॉलोनियां बसाने और प्लॉट बेचने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अभूतपूर्व और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। नियम-कायदों को ताक पर रखकर कृषि भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर बेचने वाले भू-स्वामियों पर कानून का शिकंजा कस चुका है। इस कड़ी कार्रवाई से पूरे जिले के प्रॉपर्टी डीलरों और अवैध प्लॉटिंग करने वालों में हड़कंप मच गया है।

प्रशासनिक जांच में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि कई भू-स्वामी बिना किसी नगर एवं ग्राम निवेश (T&CP) विभाग की अनुमति और बिना लैंड डायवर्सन के ही आवासीय कॉलोनियां काट रहे थे। शासन को राजस्व का बड़ा चूना लगाने और आम जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने के इस खेल पर अब पूर्ण विराम लगाने की तैयारी कर ली गई है।

ग्राम गड़रिया का मामला: बिना डायवर्सन के बेचे गए प्लॉट
पूरा मामला रीवा जिले के ग्राम गड़रिया से जुड़ा हुआ है। यहाँ की उपजाऊ कृषि भूमि को कागजों में बिना किसी व्यावसायिक या आवासीय उपयोग में बदले (बिना डायवर्सन कराए) मनमाने तरीके से छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर बेचा जा रहा था।
विकास के नाम पर जमीन मालिकों ने केवल कच्ची सड़कों का खाका तैयार कर दिया, लेकिन पेयजल आपूर्ति, ड्रेनेज सिस्टम, स्ट्रीट लाइट और सीवेज निस्तारण जैसी अनिवार्य सुविधाओं की पूरी तरह अनदेखी की गई। जब उपमंडलीय अधिकारी (SDM हुजूर) की अगुवाई में जांच टीम ने स्थल का निरीक्षण किया, तो वहां भारी अनियमितताएं और सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन पाया गया।

कलेक्टर का कड़ा रुख: FIR से लेकर संपत्ति कुर्की तक के आदेश
जांच रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटिस जारी करने तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे आपराधिक अपराध मानकर कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर द्वारा जारी प्रमुख निर्देशों में शामिल हैं:
संबंधित 12 भू-स्वामियों और इसमें संलिप्त अन्य लोगों के विरुद्ध पुलिस थाने में आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज करना।
दोषियों की अविक्रीत (बिना बिकी) जमीन और अन्य संपत्तियों को नीलाम या कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करना।
राजस्व रिकॉर्ड (खसरा) में स्पष्ट रूप से 'अवैध कॉलोनी' दर्ज करना ताकि भविष्य में कोई खरीद-बिक्री न हो सके।

नोटिस और जांच प्रक्रिया: क्यों खारिज हुए भू-स्वामियों के तर्क?
एसडीएम हुजूर की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी भू-स्वामियों को कारण बताओ नोटिस थमाए गए थे। जवाब में अधिकांश जमीन मालिकों ने यह दलील दी कि उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों, बीमारी के इलाज और कर्ज चुकाने के लिए अपनी जमीन के टुकड़े बेचे थे, और उनका इरादा कोई अवैध कॉलोनी बसाने का नहीं था। हालांकि, जब प्रशासनिक अधिकारियों ने कानूनी दस्तावेजों की पड़ताल की, तो किसी भी जमीन मालिक के पास निम्नलिखित दस्तावेज नहीं मिले:

  • नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से स्वीकृत ले-आउट।
  • सक्षम अधिकारी द्वारा जारी भू-परिवर्तन (Diversion) प्रमाण पत्र।
  • सक्षम निकाय से प्राप्त कॉलोनी विकास अनुमति।

जवाब में ठोस और वैधानिक प्रमाण न होने के कारण प्रशासन ने उनकी दलीलों को खारिज करते हुए इसे एक संगठित अवैध प्लॉटिंग का मामला माना।

कार्रवाई के दायरे में आए 12 मुख्य भू-स्वामी
ग्राम गड़रिया में अवैध तरीके से जमीन के टुकड़े कर बेचने के मामले में जिन 12 लोगों को नामजद कर कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं, उनकी सूची निम्नलिखित है:

  • गिरिवरधारी दुबे
  • रामलली दुबे
  • गोमती प्रसाद दुबे
  • श्रीनिवास विश्वकर्मा
  • प्रेमवती विश्वकर्मा
  • अनीता विश्वकर्मा
  • संजू उर्फ अंजू विश्वकर्मा
  • चिड्डी विश्वकर्मा
  • धनवंती रजक
  • पूनम विश्वकर्मा
  • सुरेश कुमार उपाध्याय
  • देवेंद्र कुमार तिवारी

(नोट: देवेंद्र कुमार तिवारी द्वारा नोटिस का समय पर जवाब प्रस्तुत न करने के कारण उनके खिलाफ एकपक्षीय दंडात्मक कार्रवाई की गई है।)

अवैध प्लॉटिंग पर लगा चौतरफा बैन: सरकारी विभागों को कड़े निर्देश
कलेक्टर के निर्देशों के बाद संबंधित जमीनों पर पूरी तरह से तालाबंदी जैसी स्थिति बन गई है। प्रशासन ने आम जनता और सरकारी विभागों के लिए सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं:

  • पंजीयन विभाग पर रोक: संबंधित खसरों के नए विक्रय पत्रों के पंजीयन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिससे कोई नया खरीदार न ठगा जा सके।
  • नामांतरण प्रक्रिया स्थगित: राजस्व विभाग द्वारा संबंधित भूखंडों के नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है।
  • बिजली कनेक्शन पर पाबंदी: विद्युत वितरण कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इन अवैध भूखंडों पर नए घरेलू या व्यावसायिक बिजली कनेक्शन जारी न किए जाएं।
  • निर्माण अनुमति निरस्त: संबंधित ग्राम पंचायत को निर्देशित किया गया है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार के मकान या भवन निर्माण की अनुमति न दी जाए।
  • आर्थिक क्षति की वसूली: अवैध कॉलोनी विकास के कारण शासन को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई दोषी भू-स्वामियों की संपत्ति नीलाम करके की जाएगी।

भविष्य के लिए कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की चेतावनी
मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने स्पष्ट संदेश दिया है:
"मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम तथा पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिना पूर्व अनुमति कॉलोनी विकसित करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। रीवा जिले में ऐसे किसी भी अवैध निर्माण या प्लॉटिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आम नागरिक भी भूखंड खरीदने से पहले सभी वैधानिक अनुमतियों की जांच अवश्य कर लें।"

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