रीवा SP ऑफिस से कलेक्ट्रेट तक हड़कंप : गंगेव जनपद पंचायत में राजनीतिक घमासान, महिला सदस्य के लापता होने से मंचा प्रशासनिक हड़कंप, पूरा रीवा सन्न

 
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गंगेव जनपद ब्लॉक के वार्ड 22 में गहराया रहस्य: क्या यह राजनीतिक किडनैपिंग है या कोई सोची-समझी साजिश?

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के ग्रामीण अंचल में इस समय एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि स्थानीय स्वायत्त शासन की राजनीति को भी हिलाकर रख दिया है। जनपद पंचायत गंगेव के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 22 की चुनी हुई जनप्रतनिधि (जनपद सदस्य) शारदा नामदेव के अचानक रहस्यमयी ढंग से गायब होने का मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर क्षेत्र में तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित महिला के पति ने सीधे तौर पर गंगेव जनपद पंचायत के वर्तमान अध्यक्ष विकास तिवारी पर अपनी पत्नी को जबरन उठा ले जाने का संगीन आरोप मढ़ दिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने रीवा पुलिस और जिला प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। महिला जनप्रतिनिधि का इस तरह अचानक ओझल हो जाना और उनके परिवार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। जिले के वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गंगेव ब्लॉक में पिछले कुछ समय से चल रही वर्चस्व की लड़ाई अब पुलिस थाने और कलेक्ट्रेट की चौखट तक पहुंच चुकी है।

24 मई 2026 की सुबह ऐसा क्या हुआ? जानिए लापता होने की पूरी इनसाइड स्टोरी
शिकायतकर्ता (शारदा नामदेव के पति) द्वारा शासकीय अधिकारियों को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, यह पूरी घटना 24 मई 2026 की सुबह की बताई जा रही है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि सुबह के करीब 9:00 बजे गंगेव जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी कुछ लोगों के साथ उनके निवास स्थान पर पहुंचे थे। आरोप है कि इसके बाद विकास तिवारी द्वारा जनपद सदस्य शारदा नामदेव को उनकी मर्जी के खिलाफ, बलपूर्वक या किसी अज्ञात दबाव में घर से ले जाया गया।

घटना के बाद शुरुआती कुछ घंटों तक परिवार को लगा कि शायद जनपद कार्य या किसी आधिकारिक बैठक के सिलसिले में वह बाहर गई हैं। लेकिन जब शाम ढलने के बाद भी शारदा नामदेव अपने घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों की चिंताएं बढ़ने लगीं। परिवार के सदस्यों ने अपने स्तर पर सगे-संबंधियों, परिचितों और गंगेव ब्लॉक के अन्य क्षेत्रों में उनकी तलाश शुरू की, परंतु उनका कहीं कोई सुराग नहीं मिल सका। पिछले कई दिनों से जारी इस मानसिक प्रताड़ना के बाद अंततः परिवार ने कानून की शरण लेने का फैसला किया।

मोबाइल स्विच ऑफ और संपर्क के सारे साधन बंद: तकनीकी साक्ष्यों की तलाश में रीवा पुलिस
इस कथित किडनैपिंग मामले में सबसे बड़ी बाधा तकनीकी संपर्क को लेकर आ रही है। आवेदनकर्ता के मुताबिक, शारदा नामदेव के पास जो मोबाइल नंबर मौजूद रहता है, वह घटना के बाद से ही लगातार बंद आ रहा है। जब भी उनके नंबर पर संपर्क साधने का प्रयास किया जाता है, तो वह नेटवर्क क्षेत्र से बाहर या पूरी तरह बंद (स्विच ऑफ) बताता है।

अमूमन किसी जनप्रतिनिधि का मोबाइल लंबे समय तक बंद रहना सामान्य बात नहीं मानी जाती, क्योंकि उन्हें अपने क्षेत्र की जनता से लगातार संवाद करना होता है। मोबाइल बंद होने के कारण परिवार की आशंकाएं और गहरी हो गई हैं कि कहीं उन्हें किसी ऐसी जगह तो नहीं रखा गया है जहां से वह किसी से संपर्क न कर सकें। रीवा पुलिस के साइबर सेल विभाग द्वारा अब इस नंबर की आखिरी लोकेशन (Last Tower Location) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) को खंगालने की तैयारी की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 24 मई की सुबह आखिरी बार इस मोबाइल से किस व्यक्ति की बातचीत हुई थी।

मामले का संक्षिप्त विवरण तालिका:
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| घटना की संभावित तिथि     | 24 मई 2026 (सुबह लगभग 9:00 बजे)              |
| मुख्य पीड़ित                     | शारदा नामदेव (निर्वाचित सदस्य, वार्ड 22)     |
| मुख्य आरोपी (कथित)        | विकास तिवारी (अध्यक्ष, जनपद पंचायत गंगेव)     |
| शिकायत का माध्यम          | लिखित आवेदन (SP ऑफिस) एवं स्टाम्प पेपर (कलेक्टर) |
| पुलिस जांच अधिकारी        | संदीप मिश्रा (एडिशनल एसपी, रीवा)              |
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक न्याय की गुहार: स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र का पूरा मामला क्या है?
जब पीड़ित महिला के पति को स्थानीय स्तर पर कोई राहत मिलती नहीं दिखी, तो उन्होंने मामले को जिले के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष उठाने का निर्णय लिया। 30 मई 2026 को शिकायतकर्ता ने रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा। इस शिकायती पत्र में उन्होंने अपनी पत्नी की जान को खतरा बताते हुए तत्काल प्रभाव से एफआईआर (First Information Report) दर्ज करने और आरोपी के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की।

बात यहीं खत्म नहीं हुई; इस मामले को और अधिक कानूनी वजन देने के लिए शिकायतकर्ता ने कानूनी स्टाम्प पेपर पर अपनी पूरी शिकायत और गवाही लिखकर रीवा जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की। रविवार के अवकाश के दिन भी महिला के पति ने कलेक्टर से विशेष मुलाकात की और उन्हें क्षेत्र के राजनीतिक हालात से अवगत कराया। कानूनी जानकारों का कहना है कि स्टाम्प पेपर पर लिखकर दी गई शिकायत को एक तरह का शपथ पत्र माना जाता है, जिसमें यदि शिकायत झूठी पाई जाए तो शिकायतकर्ता पर भी कार्रवाई हो सकती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों को लेकर बेहद गंभीर है।

जनपद अध्यक्ष विकास तिवारी का पलटवार: "राजनीतिक द्वेष और दबाव में रची गई मनगढ़ंत कहानी"
इस पूरे मामले पर जब गंगेव जनपद पंचायत के अध्यक्ष विकास तिवारी से उनका पक्ष जाना गया, तो उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विकास तिवारी ने कहा कि उन पर लगाए जा रहे तमाम आरोप पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं।

जनपद अध्यक्ष का तर्क है कि गंगेv ब्लॉक की राजनीति में कुछ विरोधी तत्व उन्हें पचा नहीं पा रहे हैं, जिसके कारण वे सीधे-साधे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के परिवारों पर दबाव बनाकर इस तरह की झूठी शिकायतें करवा रहे हैं। उन्होंने एक बड़ा बयान देते हुए कहा:

"महिला कहीं बाहर घूमने या अपने किसी निजी काम से पिकनिक पर गई हो सकती हैं। उनके पति को स्थानीय स्तर के कुछ रसूखदार और विरोधी राजनेताओं ने अपने प्रभाव में ले लिया है। उनके ऊपर मानसिक दबाव बनाकर मुझसे राजनीतिक बदला लेने के लिए यह झूठा मोहरा तैयार किया गया है। मुझे देश की कानून व्यवस्था और पुलिस की जांच पर पूरा भरोसा है, दूध का दूध और पानी का पानी जल्द ही सामने आ जाएगा।"

स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट: गंगेव ब्लॉक की अंदरूनी जंग
रीवा जिले का गंगेव क्षेत्र हमेशा से ही राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और सक्रिय रहा है। त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत यहाँ की जनपद सीट पर काबिज होने के लिए हमेशा से विभिन्न गुटों के बीच खींचतान चलती आई है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि आगामी समय में जनपद के भीतर कुछ प्रशासनिक बदलाव या अविश्वास प्रस्ताव जैसी रणनीतियों को लेकर अंदरूनी खिचड़ी पक रही थी।

ऐसे में एक महिला जनपद सदस्य का अचानक गायब हो जाना और उसके बाद सीधे अध्यक्ष पर निशाना साधना, महज़ एक आपराधिक मामला नहीं प्रतीत होता। इसके पीछे गहरे राजनीतिक समीकरण छिपे होने की बू आ रही है। क्षेत्र के लोग दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि जब तक महिला सुरक्षित सामने नहीं आ जातीं, तब तक इस बात का फैसला करना नामुमकिन है कि सच आखिर क्या है—क्या यह वास्तव में एक अपहरण है या फिर राजनीतिक गोटियां सेट करने के लिए किसी गुट द्वारा किया गया 'पॉलिटिकल स्टंट'?

रीवा एडिशनल एसपी संदीप मिश्रा का आधिकारिक वक्तव्य: "निष्पक्षता से हो रही है हर पहलू की बारीकी से जांच"
इस हाई-प्रोफाइल मामले में रीवा पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्कता बरत रहा है। पुलिस इस मामले को किसी भी राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय विशुद्ध रूप से एक लापता व्यक्ति और शिकायत के आधार पर देख रही है। रीवा के एडिशनल एसपी (ASP) संदीप मिश्रा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को लापता महिला के पति की ओर से एक शिकायती आवेदन प्राप्त हुआ है।

एडिशनल एसपी संदीप मिश्रा ने स्पष्ट किया:
"शिकायत में जो भी बिंदु उठाए गए हैं, उन्हें बेहद गंभीरता से लिया गया है। पुलिस की एक विशेष टीम इस मामले की तफ्तीश में जुट गई है। सबसे पहली प्राथमिकता महिला की सकुशल बरामदगी है। हम उनके मोबाइल फोन के डेटा, अंतिम बार देखे जाने वाले स्थान और गवाहों के बयानों को दर्ज कर रहे हैं। जांच से जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उसी के अनुरूप आगे की वैधानिक और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी निर्दोष को फंसाया नहीं जाएगा और न ही किसी दोषी को बख्शा जाएगा।"

क्या हो सकते हैं इस मामले के कानूनी और राजनीतिक परिणाम?
यदि रीवा पुलिस की जांच में अपहरण के आरोपों की पुष्टि होती है, तो गंगेव जनपद पंचायत अध्यक्ष विकास तिवारी की मुश्किलें बेहद बढ़ सकती हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपहरण और जबरन बंधक बनाने की धाराओं में मामला दर्ज होने पर उनकी सदस्यता और पद दोनों पर खतरा मंडरा सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि पुलिस जांच में यह बात सामने आती है कि महिला अपनी मर्जी से कहीं गई थीं और अध्यक्ष को फंसाने के लिए झूठा जाल बुना गया था, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कानूनी डंडा चलना तय है।

फिलहाल, पूरा रीवा जिला और विशेषकर गंगेव क्षेत्र इस बात का इंतजार कर रहा है कि पुलिस कब तक लापता जनपद सदस्य शारदा नामदेव को ढूंढ निकालती है। इस मामले की पल-पल की अपडेट स्थानीय मीडिया और प्रशासनिक अमले द्वारा लगातार मॉनिटर की जा रही है।

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