दोस्ती में खौफनाक दगाबाजी! जूनियर की तरक्की से जलते थे सीनियर सुरक्षाकर्मी, यूपी के जंगल में ले जाकर घोंट दिया गला
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसा सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने दोस्ती के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया है। रीवा शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले निपानिया मोहल्ले में रहने वाले एक युवा सुरक्षाकर्मी (सिक्योरिटी गार्ड) अनूप सेन की उसके ही दो बेहद करीबी दोस्तों ने बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी। इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या की वजह कोई पुरानी पारिवारिक दुश्मनी या पैसों का बड़ा लेनदेन नहीं था, बल्कि कार्यस्थल पर मिलने वाली तरक्की और बढ़ता हुआ प्रभाव था।
अनूप सेन अचानक 18 मई को अपने घर से लापता हो गया था। काफी खोजबीन के बाद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए सिटी कोतवाली थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। रीवा पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जब जांच शुरू की, तो कड़ियां जुड़ती गईं और अंततः पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के एक घने जंगल से मृतक का नरकंकाल बरामद हुआ। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों शातिर आरोपियों को दबोच लिया है, जिन्होंने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है।
जूनियर गार्ड की कामयाबी और रसूख से क्यों जलते थे सीनियर दोस्त?
इस हत्याकांड की जड़ें उस दफ्तर और सुरक्षा कंपनी से जुड़ी हैं, जहाँ ये तीनों मिलकर काम करते थे। मृतक अनूप सेन के साथ सुरक्षा गार्ड का काम करने वाले दोनों आरोपी—यशवंत चतुर्वेदी (निवासी नीरी, उत्तर प्रदेश) और पंकज शुक्ला (निवासी इटमा, उत्तर प्रदेश)—रिश्ते में आपस में जीजा-साले हैं। ये दोनों अनूप से काम के मामले में सीनियर थे और काफी समय से इस क्षेत्र में सक्रिय थे।
अनूप सेन इन दोनों से जूनियर होने के बावजूद बेहद कर्मठ और मिलनसार था। बहुत ही कम समय में उसने सुरक्षा कंपनी के प्रबंधन और अधिकारियों के बीच अपनी एक मजबूत साख बना ली थी। अनूप की काबिलियत को देखते हुए कंपनी ने उसे नए गार्ड्स की भर्ती और सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने (गार्ड सप्लाई) का अतिरिक्त काम भी सौंप दिया था। इस नए काम के कारण अनूप की आर्थिक स्थिति तेजी से सुधरने लगी और कंपनी में उसका रसूख बढ़ गया। यही कामयाबी उसके दोनों दोस्तों की आँखों में चुभने लगी। उन्हें लगने लगा कि एक जूनियर उनसे आगे निकल रहा है और उनका प्रभाव कम हो रहा है। इसी पेशेवर ईर्ष्या और हीनभावना की आग में जलकर दोनों ने अनूप को रास्ते से हटाने का मन बना लिया।
18 मई की खौफनाक रात: बुलेट से यूपी ले जाने की पूरी कहानी
अपनी खौफनाक योजना को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने 18 मई का दिन चुना। मुख्य आरोपी यशवंत चतुर्वेदी ने सबसे पहले अनूप का भरोसा जीता और उसे अपनी बातों में फंसाकर अपनी बुलेट मोटरसाइकिल पर बैठाया। यशवंत उसे रीवा से दूर उत्तर प्रदेश की सीमा में स्थित अपने पैतृक गांव 'देवरा' ले गया। अनूप को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस दोस्त के साथ वह सफर कर रहा है, वही उसका काल बनने जा रहा है।
18 मई की रात को यशवंत अनूप को लेकर गांव के ही एक स्थानीय मंदिर परिसर में पहुंचा। वहां दोनों ने बैठकर शराब पी। अनूप को पूरी तरह नशे में धुत करने की योजना थी ताकि वह किसी भी तरह का विरोध न कर सके। रात भर दोनों वहीं रहे। अगली सुबह जब मंदिर के पुजारी वहां पहुंचे, तो पकड़े जाने के डर से यशवंत अनूप को लेकर वहां से निकल गया। इसके बाद उसने पहले से तय साजिश के तहत अपने साले पंकज शुक्ला को फोन करके एक निश्चित स्थान पर बुला लिया।
महुरिया का घना जंगल, शराब पार्टी और गंमछे से घोंटा गया गला
सुबह जब पंकज शुक्ला भी इस खौफनाक खेल में शामिल हो गया, तो दोनों आरोपी अनूप सेन को लेकर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र/मिर्जापुर सीमा के पास स्थित 'महुरिया' के बेहद घने और सुनसान जंगलों के भीतर ले गए। जंगल के सन्नाटे का फायदा उठाकर वहां एक बार फिर शराब की महफिल सजाई गई। अनूप पहले से ही नशे की हालत में था और इस बार वह पूरी तरह अपने होश खो बैठा।
जैसे ही आरोपियों ने देखा कि अनूप अब खुद को संभालने की स्थिति में नहीं है, उन्होंने अपनी योजना को अंतिम रूप दिया। दोनों ने मिलकर अनूप को दबोच लिया और पास ही रखे एक सूती गमछे से उसका गला पूरी तरह घोंट दिया। अनूप ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया, लेकिन आरोपियों की क्रूरता यहीं नहीं रुकी; उन्होंने मौत सुनिश्चित करने के लिए उसके बेजान शरीर पर भारी हथियारों या पत्थरों से भी हमला किया। शव को घने जंगल की झाड़ियों में फेंककर दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए, उन्हें लगा कि इस वीरान जंगल में लाश कभी किसी को नहीं मिलेगी।
कंकाल से हुई शिनाख्त: कैसे खुली जीजा-साले की शातिराना साजिश?
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने खुद को बचाने के लिए कई शातिराना कदम उठाए। यशवंत ने मृतक अनूप सेन की कीमती बुलेट मोटरसाइकिल अपने साले पंकज को दे दी। पुलिस को गुमराह करने और गाड़ी पकड़े जाने से बचने के लिए उन्होंने तुरंत बुलेट की नंबर प्लेट बदल दी और उस पर फर्जी नंबर डाल दिया। उन्हें लगा कि बिना शव और बिना गाड़ी के नंबर के पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंच पाएगी।
इस केस में मुख्य मोड़ तब आया जब 18 मई को लापता हुए अनूप की तलाश में जुटी रीवा पुलिस को उत्तर प्रदेश के महुरिया वन क्षेत्र से एक अज्ञात नरकंकाल मिलने की जानकारी मिली। पुलिस ने जब मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक व फॉरेंसिक जांच की, तो कपड़ों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उस कंकाल की पहचान लापता सुरक्षाकर्मी अनूप सेन के रूप में पुख्ता हो गई। इसके बाद पुलिस की शक की सुई अनूप के अंतिम समय के संपर्कों पर घूमी। साइबर सेल की मदद से जब अनूप के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन निकाली गई, तो आखिरी बार उसकी लोकेशन यशवंत और पंकज के साथ पाई गई।
रीवा सिटी कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की बड़ी कामयाबी
रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन और सिटी कोतवाली थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी और पारंपरिक मुखबिर तंत्र का बेहतरीन तालमेल बिठाया। संदेह के आधार पर जब यशवंत चतुर्वेदी और पंकज शुक्ला को हिरासत में लेकर मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई, तो शुरुआत में वे पुलिस को गुमराह करते रहे। लेकिन जब पुलिस ने उनके सामने मोबाइल लोकेशन और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य रखे, तो उनके हौसले पस्त हो गए।
आरोपियों ने टूटकर अपना गुनाह कुबूल कर लिया और पूरी कहानी बयां कर दी। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर मृतक की वह बुलेट मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है, जिसका नंबर बदला गया था। इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने में रीवा पुलिस और साइबर सेल की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही, जिन्होंने एक साधारण गुमशुदगी के मामले को गहराई से सुलझाकर अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया।
पेशेवर ईर्ष्या जब अपराध की पराकाष्ठा बन जाए
अनूप सेन हत्याकांड समाज के सामने एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा करता है। यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक दौर में इंसानी रिश्तों में सहनशीलता और संवेदनशीलता किस कदर खत्म होती जा रही है। किसी साथी की मेहनत और उसकी तरक्की से प्रेरणा लेने के बजाय, उसे अपनी ईर्ष्या का पात्र बनाकर उसकी जीवन लीला ही समाप्त कर देना मानसिक विकृति की पराकाष्ठा है।
रीवा पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं (हत्या, साक्ष्य छुपाना और साजिश रचना) के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर ली है। अनूप तो वापस नहीं आ सकता, लेकिन उम्मीद है कि रीवा की अदालत इन आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देगी ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।