रात के अंधेरे में उठी इंसाफ की मांग: BSNL ऑफिस की गाड़ी ले गई थी रामसेवक को, फिर लौटकर आया शव!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद सनसनीखेज और गमगीन मामला सामने आया है। बीएसएनएल (BSNL) विभाग में कार्यरत कर्मचारी रामसेवक की संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शहर का राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। न्याय की मांग को लेकर मंगलवार की रात परिजनों और स्थानीय लोगों ने शहर के व्यस्ततम कॉलेज चौराहे पर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क पर बैठे परिवार ने करीब 45 मिनट तक यातायात को प्रभावित करते हुए न्याय की गुहार लगाई। पुलिस प्रशासन द्वारा मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन मिलने के बाद ही परिजन वहां से हटने को तैयार हुए।

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कंपनी के बयानों में विरोधाभास और परिजनों के गंभीर आरोप
इस पूरी घटना की शुरुआत सोमवार की रात को हुई थी, जब परिजनों के अनुसार बीएसएनएल ऑफिस की एक आधिकारिक गाड़ी रामसेवक को उनके घर से अपने साथ ले गई थी। उस वक्त घर के सदस्यों को यह तर्क दिया गया था कि कंपनी के किसी जरूरी और आपातकालीन काम के सिलसिले में रामसेवक को बुलाया गया है। परिवार ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई और वे बेफिक्र रहे।

मंगलवार का सूरज परिवार के लिए एक भारी वज्रपात बनकर आया। कंपनी की तरफ से उन्हें रामसेवक का शव सौंप दिया गया। जब परिजनों ने मौत का कारण पूछा, तो अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आया। रामसेवक के परिजन रजनीश सोंधिया ने मीडिया और पुलिस के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शुरुआत में उन्हें केवल यह कहकर बरगलाया गया था कि रामसेवक की अचानक तबीयत खराब हो गई है, जिसके चलते उन्हें अस्पताल या कार्यालय ले जाया गया था। लेकिन बाद में जब शव सौंपा गया, तो बिल्कुल अलग कहानी गढ़ी गई और कहा जाने लगा कि किसी कार्यस्थल पर मलबा गिरने के कारण उनकी मौत हुई है। परिवार का कहना है कि बयानों में यह बार-बार बदलाव इस पूरी घटना को बेहद संदिग्ध बनाता है।

पुलिस रिपोर्ट में गड़बड़ी और निष्पक्ष जांच की मांग
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब परिजनों ने स्थानीय थाने की कार्रवाई पर सवालिया निशान खड़े किए। रजनीश सोंधिया का आरोप है कि पुलिस द्वारा तैयार की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) या शुरुआती दस्तावेजों में मृतक रामसेवक का नाम, घटना का सटीक स्थान और अन्य महत्वपूर्ण तथ्य पूरी तरह से गलत और भ्रामक तरीके से दर्ज किए गए हैं।

परिजनों की मांग है कि पुलिस को गहराई से इन सवालों के जवाब तलाशने चाहिए:

सोमवार की रात आखिर किस विशिष्ट परिस्थिति या दबाव में रामसेवक को घर से उठाकर कार्यालय ले जाया गया था?
ड्यूटी के दौरान उनकी मौत किन वास्तविक परिस्थितियों के तहत हुई?
यदि मलबा गिरने जैसी कोई दुर्घटना हुई थी, तो उसकी सूचना परिवार को तुरंत क्यों नहीं दी गई और घटनास्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?

कॉलेज चौराहे पर 45 मिनट तक चला विरोध प्रदर्शन और पुलिस का आश्वासन
घटना से आक्रोशित परिजनों और शुभचिंतकों का सब्र मंगलवार की रात को टूट गया। उन्होंने न्याय की आस में रीवा के प्रमुख कॉलेज चौराहे पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। चौराहे पर अचानक हुए इस हंगामे से प्रशासनिक महकमे में भी हड़कंप मच गया। भारी वाहनों और आम नागरिकों की आवाजाही रुक गई।

परिस्थिति की नजाकत को भांपते हुए स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को धैर्य बंधाते हुए आश्वस्त किया कि इस पूरे मामले की कड़ाई से जांच की जाएगी और यदि कंपनी या किसी अन्य स्तर पर लापरवाही या संलिप्तता पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के इस ठोस आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए और उन्होंने लगभग 45 मिनट के बाद अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त किया तथा चौराहे से हटे।

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