कल्पना मिश्रा कांड में डिप्टी सीएम का बड़ा एक्शन: डॉ. गुंजन गोस्वामी सस्पेंड, डॉक्टरों में बगावत और सामूहिक इस्तीफे की तैयारी
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में डिप्टी सीएम के निर्देश पर डॉ. गुंजन गोस्वामी को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके विरोध में गायनी विभाग के डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र रीवा स्थित संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल और श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ी बहुचर्चित 'कल्पना मिश्रा मौत कांड' में प्रशासनिक कार्रवाई का दौर लगातार जारी है। राज्य के उपमुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद कॉलेज प्रशासन ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गुंजन गोस्वामी को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से जहां एक तरफ अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली चर्चा में है, वहीं दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के बीच भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की चेतावनी दी है।
क्यों गिरी डॉ. गुंजन गोस्वामी पर निलंबन की गाज?
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, हाटवा निवासी प्रसूता कल्पना मिश्रा का पूरा चिकित्सीय उपचार और देखरेख डॉ. गुंजन गोस्वामी के अंतर्गत ही चल रही थी। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि परिजनों द्वारा लगातार कम प्लेटलेट्स और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं की रिपोर्ट दिखाए जाने के बावजूद समय रहते मरीज को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया।
इसके अलावा, प्रसव के उपरांत अत्यधिक ब्लीडिंग होने के बावजूद मरीज को समय पर आईसीयू (ICU) में शिफ्ट करने में गंभीर लापरवाही बरती गई। भोपाल से रीवा आई उच्चस्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन तमाम बिंदुओं को रेखांकित करते हुए डॉ. गुंजन गोस्वामी को प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया था। इसी रिपोर्ट और जांच निष्कर्षों को आधार बनाते हुए श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन द्वारा यह निलंबन आदेश जारी किया गया है।
पृष्ठभूमि: वीडियो वायरल होने से लेकर 14 दिनों तक चले धरने तक का सफर
गत 26 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में हुई कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की दुखद मृत्यु ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। मौत से ठीक पहले मृतका का सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी थी। इस घटना से उपजे भारी जनआक्रोश के बाद मृतका के पिता ने रीवा के व्यस्त सिरमौर चौराहे पर लगातार 14 दिनों तक धरना प्रदर्शन किया था। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक आंदोलन खड़ा किया था, जिसके बाद से लगातार एक के बाद एक गाज गिर रही है।
अब तक की गई प्रशासनिक कार्रवाई का क्रम
इस पूरे प्रकरण में अब तक कई बड़े प्रशासनिक और चिकित्सीय चेहरों पर गाज गिर चुकी है:
- शुरुआत में अभद्रता और लापरवाही के आरोप में दो स्टाफ नर्सों को निलंबित किया गया।
- इसके बाद गायनी विभाग की ही सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल पर निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई।
- मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया गया।
- तत्पश्चात, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को भी उनके पद से हटा दिया गया।
- भोपाल से जारी आदेशों के बाद रीवा के ड्रग इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया और संलिप्त अर्थवर्म ब्लड बैंक के खिलाफ एफआईआर के निर्देश दिए गए।
- अब इस कड़ी में ताजा कार्रवाई करते हुए डॉ. गुंजन गोस्वामी को सस्पेंड कर दिया गया है।
अन्य विभागों की कथित लापरवाही और डॉक्टरों में सुलगता आक्रोश
इस पूरी कार्रवाई के बाद मेडिकल बिरादरी में दोहरी नीति अपनाने को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों और स्थानीय जानकारों का आरोप है कि इस पूरे मामले में केवल गायनी विभाग के चिकित्सकों को ही निशाना बनाया जा रहा है, जबकि नवजात शिशु की मृत्यु के मामले में बाल रोग (पीडियाट्रिक) विभाग के डॉक्टर दीपक द्विवेदी और डॉक्टर गौरव त्रिपाठी की रात में ड्यूटी होने के बावजूद वे मौके से नदारद थे।
इसी प्रकार, मेडिसिन विभाग में रात की ड्यूटी पर तैनात डॉ. राकेश पटेल और डॉ. केशव सिंह ड्यूटी पर उपस्थित नहीं रहे और उनकी जगह जूनियर पीजी छात्रों को भेज दिया गया। एनेस्थीसिया विभाग में भी प्रथम और द्वितीय कॉल पर तैनात चिकित्सकों द्वारा कथित रूप से फोन न उठाने या ऑपरेशन में व्यस्त रहने की बात सामने आई थी। इन तमाम अन्य विभागों के डॉक्टरों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से जनता और चिकित्सकों में असंतोष है।
इसी बीच, गायनी विभाग के चिकित्सकों ने कॉन्फ्रेंस हॉल में एक आपातकालीन बैठक आयोजित कर इस कार्रवाई के विरोध में कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, लगातार केवल एक ही विभाग को टारगेट किए जाने से नाराज सभी चिकित्सकों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है और त्यागपत्र का पत्र तैयार कर डीन को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे चिकित्सा जगत में भारी हड़कंप मच गया है।