रीवा में नशीली दवाओं की तस्करी का पर्दाफाश: 1500 अल्प्राजोलम टैबलेट्स जब्त, गुढ़ पुलिस खंगाल रही सप्लाई चेन

 
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ऋतुराज द्विवेदी (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री के खिलाफ एक और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिले में चलाए जा रहे विशेष नशा विरोधी अभियान के तहत गुढ़ पुलिस टीम ने प्रतिबंधित दवाओं की बड़ी खेप के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

पुलिस की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध रूप से नशीली गोलियां खपाने के सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है। गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण पंजीकृत कर उसे न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया है।

सटीक मुखबिर तंत्र से दबोचा गया 1500 नशीली गोलियों का तस्कर
यह पूरी कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में गुढ़ पुलिस टीम द्वारा अंजाम दी गई। पुलिस को अपने गुप्त सूचना तंत्र (मुखबिर) के माध्यम से पक्की जानकारी मिली थी कि एक व्यक्ति क्षेत्र में अवैध रूप से प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री करने के लिए घूम रहा है।

  • टीम का गठन और रेड: सूचना मिलते ही थाना स्तर पर विशेष टीम का गठन किया गया और बताए गए ठिकाने पर तुरंत घेराबंदी कर दबिश दी गई।
  • रंगे हाथों गिरफ्तारी: पुलिस टीम की अचानक हुई छापेमारी से संदेही को भागने का मौका नहीं मिला और उसे मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि
पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए अपनी सही पहचान उजागर की।

  • नाम व उर्फ: बालेश्वर उर्फ गुल्लू प्रजापति (उम्र 33 वर्ष)
  • पिता का नाम: रामाश्रय प्रजापति
  • निवास: वार्ड क्रमांक 8, थाना गुढ़, जिला रीवा (मध्य प्रदेश)

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी लंबे समय से क्षेत्र में नशीली दवाओं की तस्करी और अवैध बिक्री में संलिप्त बताया जा रहा है।

बिना पर्चे के बरामद हुई अल्प्राजोलम दवाइयों की बड़ी खेप
तलाशी की कानूनी प्रक्रिया के दौरान आरोपी के कब्जे से अल्प्राजोलम (0.5 मिलीग्राम) की 1,500 प्रतिबंधित गोलियां बरामद की गईं।
जब पुलिस अधिकारियों ने आरोपी बालेश्वर उर्फ गुल्लू से इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित मनोरोग दवाओं को रखने, ले जाने या बेचने से संबंधित डॉक्टर का पर्चा (Prescription) अथवा कोई वैध लाइसेंस मांगा, तो वह कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने पूरी खेप को विधिवत जब्त कर लिया।

बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी रीवा पुलिस
रीवा पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई केवल एक तस्कर की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

सप्लाई चेन की जांच: पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है कि यह 1500 नशीली गोलियां किस मेडिकल स्टोर या अंतरराज्यीय गिरोह के माध्यम से रीवा तक पहुंचाई गई थीं।
स्थानीय खरीदारों का पता: आरोपी यह गोलियां किन-किन स्थानीय विक्रेताओं और युवाओं को सप्लाई करता था, इसका डेटा भी पुलिस खंगाल रही है।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि नशीली दवाओं के इस कारोबार में शामिल हर छोटी-बड़ी कड़ी को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

अल्प्राजोलम दवा का चिकित्सीय उपयोग और नशे के रूप में दुरुपयोग
अल्प्राजोलम (Alprazolam) मूल रूप से एक नियंत्रित चिकित्सीय दवा है, जिसे न्यूरोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक मुख्य रूप से अत्यधिक मानसिक तनाव (एंग्जाइटी) और पैनिक डिसऑर्डर के मरीजों के इलाज के लिए सुझाते हैं।

यह दवा प्रतिबंधित और नियंत्रित क्यों है?

  • चिकित्सीय अनिवार्यता: इस दवा को बिना किसी योग्य डॉक्टर के लिखित पर्चे (Prescription) के बेचना या रखना गैर-कानूनी है।
  • दुरुपयोग का खतरा: कई असामाजिक तत्व और युवा इसका इस्तेमाल नींद और मानसिक सुस्ती लाने वाले नशे के रूप में करने लगते हैं।
  • गंभीर शारीरिक लत: बिना चिकित्सीय परामर्श के लगातार सेवन करने से व्यक्ति इसका बुरी तरह आदी हो जाता है, जो तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इसी दुरुपयोग को रोकने के लिए रीवा पुलिस लगातार ऐसे नशा सौदागरों पर गाज गिरा रही है।

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