नशा, गुंडागर्दी और सोता सिस्टम: पीके स्कूल से नेशनल हॉस्पिटल तक नशेड़ियों का कब्जा, नए SP के लिए बड़ी चुनौती, क्या टीआई विजय चौहान की जेबें हो रही हैं गरम?
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर, जिसे कभी अपनी संस्कृति के लिए जाना जाता था, आज नशे की गर्त में डूब रहा है। शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले नए बस स्टैंड और समान थाना क्षेत्र में खुलेआम शराब, गांजा और 'ब्राउन शुगर' जैसे घातक नशों का कारोबार फल-फूल रहा है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि यह सब उन जगहों पर हो रहा है जहाँ कदम-कदम पर सरकारी और निजी स्कूल (जैसे पीके स्कूल) और बड़े अस्पताल (नेशनल हॉस्पिटल, बालाजी हॉस्पिटल) स्थित हैं।

समान थाना टीआई विजय चौहान: लापरवाही या मिलीभगत?
समान थाना प्रभारी विजय चौहान की भूमिका पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्या उन्हें अपने थाना परिसर के ठीक बाहर हो रही अवैध गतिविधियों की जानकारी नहीं है? या फिर जानबूझकर इन माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है? जिस इलाके में पुलिस की गश्त होनी चाहिए, वहाँ नशेड़ी और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। जनता पूछ रही है कि क्या टीआई साहब हर महीने मिलने वाली 'मोटी रकम' के बदले जनता की सुरक्षा का सौदा कर चुके हैं?

नया बस स्टैंड: अव्यवस्था और गुंडागर्दी का नया अड्डा
नए बस स्टैंड की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। यहाँ न केवल अवैध पार्किंग और ट्रैफिक जाम की समस्या है, बल्कि यह इलाका अब अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह बन गया है। अस्पताल के बगल में होने के बावजूद यहाँ एम्बुलेंस को रास्ता नहीं मिलता, लेकिन नशे के सौदागरों के लिए यहाँ हर रास्ता खुला है। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस तरफ से पूरी तरह आँखें मूँद ली हैं।

बेटियों की सुरक्षा और सिसकता सिस्टम: पीके स्कूल का हाल
पीके स्कूल, जहाँ हजारों की संख्या में छात्राएं और महिलाएं रोज आना-जाना करती हैं, उस रास्ते पर नशेड़ियों का खुला तांडव देखना रीवा प्रशासन के मुंह पर तमाचा है। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में हों या चुपचाप जेबें गरम करने में व्यस्त हों, तो बेटियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।

प्रशासनिक भ्रष्टाचार: जेबें गरम और जनता बेहाल
कलेक्टर, डीईओ और पुलिस के आला अधिकारियों को शायद एसी दफ्तरों से बाहर की गंदगी दिखाई नहीं देती। शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूलों के बाहर नशे की दुकानों पर मौन हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरे सिस्टम में 'ऊपर से नीचे तक' भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब यह आम जनता के लिए एक मजबूरी बन गई है।
रीवा न्यूज़ मीडिया स्पेशल रिपोर्ट: आईजी सक्रिय, थाना निष्क्रिय!
आईजी का 'ऑपरेशन प्रहार' और जमीनी हकीकत का अंतर
रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत द्वारा नशे के खात्मे के लिए चलाया जा रहा 'ऑपरेशन प्रहार' निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है. उनके नेतृत्व में पुलिस लगातार तस्करों पर नकेल कस रही है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि जिले के कुछ जिम्मेदार अधिकारी इस मुहिम को पलीता लगा रहे हैं. जब उच्च अधिकारी सख्त हों, तो निचले स्तर पर थाना प्रभारियों की ढिलाई पुलिस की छवि खराब कर रही है.

समान थाना: टीआई की आँखों पर पट्टी या 'मंथली' का खेल?
समान थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। थाने के ठीक बगल में नशाखोरी का अड्डा बन जाना यह दर्शाता है कि या तो टीआई की आँखों पर पट्टी बंधी है या फिर अपराधियों के साथ गहरी साँठ-गाँठ है. कई वीडियो वायरल होने के बावजूद पुलिस का सोता हुआ रवैया यह साबित करता है कि थाना प्रभारी को कानून के पालन से ज्यादा अपनी 'सुविधा' की चिंता है.
अस्पताल, मॉल और शराब दुकान: कानून के खौफ से मुक्त इलाका
नए बस स्टैंड के पास का यह इलाका, जहाँ नेशनल अस्पताल, मॉल और स्कूल स्थित हैं, अब शराबियों और नशेडियों का गढ़ बन गया है। शराब दुकान के बाहर सरेआम महफिलें सज रही हैं. न तो कानून का खौफ है और न ही नियमों का पालन। शाम होते ही यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे मरीजों और राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है.

पेट्रोल पंप वाली गली का मुद्दा: रीवा न्यूज़ मीडिया की रिपोर्ट पर चुप्पी क्यों?
दो दिन पहले रीवा न्यूज़ मीडिया ने समान थाने के आगे पेट्रोल पंप के बगल वाली गली में चल रहे अवैध कारोबार का मुद्दा उठाया था. लेकिन हैरानी की बात है कि न तो अब तक कोई आरोपी पकड़ा गया और न ही पुलिस को कुछ पता है. क्या पुलिस प्रशासन ने चुप्पी साधकर आरोपियों को भागने का मौका दिया है? यह सवाल आज पूरी जनता पूछ रही है.
नए एसपी से उम्मीद: क्या बदलेगी रीवा की तस्वीर?
रीवा के नए एसपी गुरुकरण सिंह से शहर को बहुत उम्मीदें हैं। आईजी गौरव राजपूत के मार्गदर्शन में क्या वे समान थाना जैसे इलाकों में तैनात लापरवाह अधिकारियों को बदलेंगे? रीवा न्यूज़ मीडिया स्पष्ट चेतावनी देता है कि अगर नशे के खिलाफ जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो सड़कों पर उतरकर सो रहे सिस्टम को जगाया जाएगा. रीवा में नए एसपी के आगमन के बाद जनता में एक नई उम्मीद जगी है। क्या नया नेतृत्व समान थाना टीआई जैसे 'सोते हुए' प्रभारियों पर नकेल कसेगा? क्या रीवा की सड़कों से ब्राउन शुगर और गांजे के कलंक को मिटाया जाएगा? रीवा न्यूज़ मीडिया लगातार इन मुद्दों को उठाता रहेगा जब तक जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं करते।