डालमिया रीवा सीमेंट प्लांट में भूचाल! जेपी से अधिग्रहण के बाद मजदूरों पर तानाशाही, गेट पर उग्र प्रदर्शन और मीडिया बैन से हड़कंप
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक जिले रीवा में स्थित प्रमुख औद्योगिक इकाई, जो कभी जेपी ग्रुप (Jaiprakash Associates) के नाम से पहचानी जाती थी, अब डालमिया सीमेंट लिमिटेड (Dalmia Cement Limited) के स्वामित्व में आ चुकी है। इस बड़े अधिग्रहण के साथ ही प्लांट के भीतर और बाहर उथल-पुथल का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहां प्रबंधन अपनी नई कार्यप्रणाली को स्थापित करने में लगा है, वहीं दूसरी ओर वहां कार्यरत हजारों श्रमिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। मुख्य मुद्दा कर्मचारियों के कथित शोषण और उनकी मर्जी के खिलाफ थोपी जा रही स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) का है, जिसके विरोध में अब मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं।

स्थानांतरण नीति और श्रमिकों का उग्र विरोध
प्लांट के हाथों से हाथ बदलने के बाद से ही कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना घर कर गई है। आरोप यह है कि डालमिया प्रबंधन द्वारा एक सुनियोजित तरीके से स्थानांतरण नीति का हवाला देकर रीवा प्लांट के पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को देश के अन्य राज्यों में स्थित डालमिया सीमेंट प्लांटों में भेजा जा रहा है। श्रमिकों का कहना है कि यह नीतियां पूरी तरह से मनमानी और नियम विरुद्ध हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य पुराने कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाना और उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर करना है।

इस दमनकारी रवैये के खिलाफ मुखर होते हुए सीमेंट श्रमिक एकता यूनियन के बैनर तले सैकड़ों श्रमिकों ने डालमिया सीमेंट लिमिटेड रीवा के मुख्य गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन विरोधी नारे लगाए और स्पष्ट चेतावनी दी कि श्रमिकों के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस आंदोलन के कारण प्लांट के प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ा है और क्षेत्र में औद्योगिक अशांति का माहौल बन गया है।
पत्रकारों के प्रवेश पर रोक और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जब इस बड़े श्रमिक आंदोलन और धरने की कवरेज करने के लिए स्थानीय पत्रकार रीवा सीमेंट प्लांट के मुख्य गेट पर पहुंचे, तो वहां तैनात निजी सुरक्षा एजेंसी जीडीएक्स (GDX) के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से कड़ाई से रोक दिया। मीडियाकर्मियों द्वारा जब प्लांट के भीतर की वास्तविक स्थिति और प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए प्रवेश की अनुमति मांगी गई, तो सुरक्षाकर्मियों ने गेट बंद कर दिए।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पत्रकारों ने सुरक्षा अधिकारी राजा सिंह से दूरभाष के माध्यम से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया और उन्हें मीडिया के वैध अधिकारों का हवाला दिया। हालांकि, आरोप है कि सुरक्षा अधिकारी ने इस संवेदनशील मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया और प्लांट के अंदर जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। एक औद्योगिक इकाई के गेट पर इस तरह से मीडिया को रोकना और जानकारी छिपाने का प्रयास करना प्रशासनिक पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सीटू (CITU) और श्रमिक संगठनों का कड़ा रुख
इस आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने डालमिया प्रबंधन की कार्यशैली की तीव्र आलोचना की है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में उद्योग का संचालन वहां के स्थानीय विकास और जनता के हित में होना चाहिए, न कि वहां के कामगारों का शोषण करने के लिए। सीटू नेताओं ने मांग की कि तत्काल प्रभाव से सभी प्रकार के नियम विरुद्ध स्थानांतरणों पर रोक लगाई जाए।
पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रबंधन अपनी तानाशाही और दमनकारी नीतियों से बाज नहीं आया, तो इस आंदोलन को रीवा से लेकर भोपाल स्तर तक और अधिक उग्र किया जाएगा। इस धरना-प्रदर्शन में सीमेंट श्रमिक एकता यूनियन के अध्यक्ष रामनरेश द्विवेदी, राकेश सिंह, रमाकांत तिवारी, अल्ट्राटेक बेला सीमेंट कंपनी श्रमिक एकता यूनियन के अध्यक्ष बसंतलाल सिंह सहित तमाम प्रमुख श्रमिक नेता और सैकड़ों की संख्या में आम मजदूर उपस्थित रहे।
प्रबंधन की चुप्पी और भविष्य की दिशा
अभी तक डालमिया सीमेंट लिमिटेड रीवा के आधिकारिक प्रबंधन की ओर से इन तमाम गंभीर आरोपों पर कोई भी स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। स्थानांतरण नीति के औचित्य, श्रमिकों के कथित उत्पीड़न और पत्रकारों को रोके जाने की घटना पर प्रबंधन की चुप्पी कई तरह की शंकाओं को जन्म दे रही है। क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि यदि समय रहते प्रबंधन ने श्रमिक संगठनों के साथ बैठकर सौहार्दपूर्ण संवाद नहीं स्थापित किया, तो यह विवाद और अधिक गहरा सकता है।