रीवा में भूचाल! आधी रात कलेक्टर-एसपी की रेड, अय्याशी और काले कारनामों के अड्डे बने प्राइवेट अस्पताल का पर्दाफाश, सील हुआ 'आयुष्मान'!

 
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डॉ केडी सिंह बिना अनुमति के रोगियों का उपचार करते पाए गए, अस्पताल में अनैतिक और असामाजिक गतिविधियां पाई गईं

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो)  मध्य प्रदेश के रीवा जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसे पढ़कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। जिले के संवेदनशील इलाकों में शुमार नए बस स्टैंड के पास संचालित 'आयुष्मान अस्पताल' (Ayushman Hospital Rewa) पर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने आधी रात को औचक छापा मारा।

छापेमारी की यह कार्रवाई इतनी गोपनीय और ताबड़तोड़ थी कि अस्पताल संचालक और वहां मौजूद अमले को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कलेक्टर और एसपी खुद इस रेड की अगुवाई कर रहे थे। जब पुलिस बल ने अस्पताल के कमरों और रिकॉर्ड्स को खंगाला, तो वहां जो कुछ मिला उसने चिकित्सा पेशे को पूरी तरह कलंकित कर दिया। अस्पताल के नाम पर अंदर किस तरह के गंदे और अनैतिक खेल खेले जा रहे थे, उसका पर्दाफाश हो चुका है।

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आपत्तिजनक वीडियो और साक्ष्यों से खुला अस्पतालों की अय्याशी का राज
सूत्रों और प्रशासनिक जांच के मुताबिक, जिला प्रशासन के पास इस अस्पताल के भीतर चल रही अमानवीय और अनैतिक गतिविधियों के पुख्ता सुबूत और वीडियो पहुंच चुके थे। शिकायतों में यह बात सामने आई थी कि इस प्राइवेट अस्पताल में आने वाले मरीजों, खासकर बेहोशी की हालत में मौजूद महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाया जाता था और उनके साथ गंभीर हरकतें की जाती थीं।

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जब कलेक्टर और एसपी ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर उन वीडियो और शिकायतों की पड़ताल की, तो एक-एक करके सारे सबूत सही पाए गए। अस्पताल के अंदर से बरामद चीजें और डिजिटल फुटेज यह चीख-चीखकर कह रहे थे कि यह कोई चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि गुनाहों और अनैतिक कृत्यों का अड्डा बन चुका था। इस खुलासे के बाद पूरे रीवा शहर में आग की तरह सनसनी फैल गई है।

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डॉ. केडी सिंह की कारगुजारियां और अस्पताल की भारी लापरवाहियां
इस पूरी रेड के केंद्र में रहे डॉ. केडी सिंह (Dr. KD Singh), जो कि एक हार्ट रोग विशेषज्ञ हैं और पूर्व में भी अपने विवादित वीडियो, मारपीट और ऑडियो वायरल कांड को लेकर चर्चा में रह चुके हैं।

हैरानी की बात यह है कि डॉ. केडी सिंह सरकारी सेवा में पदस्थ हैं, लेकिन इसके बावजूद वे शासन या सक्षम अधिकारी की बिना किसी वैध अनुमति के इस निजी अस्पताल में मरीजों का धड़ल्ले से इलाज कर रहे थे। उनके साथ एक बीएचएमएस डॉक्टर भी अवैध रूप से मरीजों का उपचार करते रंगे हाथ पकड़े गए। अस्पताल की लापरवाही का आलम यह था कि वर्ष 2024 से लेकर अब तक अस्पताल के भीतर जितने भी मरीजों की मौत हुई थी, उनमें से एक भी मौत की आधिकारिक सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी गई थी। पैरामेडिकल स्टाफ में कब बदलाव किए गए, इसकी भनक तक सीएमएचओ कार्यालय को नहीं लगने दी गई थी। 100 बेड के इस बड़े अस्पताल में नियमों के मुताबिक पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ तक मौजूद नहीं था।

इसके अलावा, डॉ. केडी सिंह के खिलाफ पूर्व में सामने आए वायरल वीडियो और अनैतिक तथा असामाजिक गतिविधियों की शिकायतों की जब इस रेड के दौरान पड़ताल की गई, तो मामला प्रथम दृष्टया बिल्कुल सही पाया गया। अस्पताल के भीतर कुछ ऐसे वीडियो और साक्ष्य हाथ लगे, जो यह साबित करने के लिए काफी थे कि यहां मरीजों की आड़ में गंभीर अनैतिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।

CMHO का बड़ा एक्शन: अस्पताल सील और 31 दिन का अल्टीमेटम
इस गंभीर प्रकरण के सामने आने के बाद रीवा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधाकर पाण्डेय ने तुरंत कड़ा कदम उठाते हुए आयुष्मान अस्पताल के संचालन पर आगामी आदेश तक पूर्ण प्रतिबंध (अंतरिम रोक) लगा दिया है। अस्पताल की संचालक डॉ. प्रियंका सिंह को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो अस्पताल का लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाएगा। रोक के आदेश के तुरंत बाद अस्पताल में नए मरीजों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, वहां पहले से भर्ती मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित रूप से अन्य सरकारी या संबद्ध अस्पतालों में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए हैं।

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