रीवा में भाईचारे की मिसाल: अकीदत और उत्साह के साथ मनाई गई बकरीद, मस्जिदों में गूंजी अमन-चैन की दुआएं!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले सहित पूरे शहर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार बेहद शांतिपूर्ण, गरिमामय और आपसी भाईचारे के माहौल में संपन्न हुआ। सुबह की पहली किरण के साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोग पारंपरिक और नए वस्त्र धारण कर मस्जिदों तथा ईदगाहों की तरफ बढ़ने लगे। हर तरफ उत्साह और इबादत का माहौल नजर आ रहा था।

नमाज के दौरान सामूहिक रूप से हाथ उठाकर देश और मध्य प्रदेश में सुख-समृद्धि, तरक्की, आपसी प्रेम और अमन-चैन की विशेष दुआएं मांगी गईं। नमाज मुकम्मल होने के तुरंत बाद सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर "ईद मुबारक" कहा और त्योहार की शुभकामनाएं दीं। शहर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां हर उम्र के लोग इस पवित्र दिन की खुशियां बांटते नजर आए।

इन प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब
शरीअत हिलाल तस्दीक कमेटी के दिशा-निर्देशन में रीवा के तमाम छोटे-बड़े इबादतगाहों में नमाज के मुकम्मल इंतजाम किए गए थे। शहर के ग्रामीण और शहरी इलाकों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद तय समय पर नमाज के लिए पहुंचे।

शहर के प्रमुख नमाज स्थल:
बिछिया क्षेत्र: शाही ईदगाह बिछिया और दाराशाह तकिया बिछिया में सुबह सबसे बड़ा मजमा देखा गया।

  • धोबिया टंकी व खुटेही: रजा मस्जिद (धोबिया टंकी) और निजामिया मस्जिद (खुटेही) में भी सैकड़ों लोगों ने सफों में खड़े होकर इबादत की।
  • घोघर व निपनिया: जामा मस्जिद मौलवी अयाज अली (घोघर), रिसालदार मस्जिद (घोघर) और जामा मस्जिद तुरकान (निपनिया) में नमाजियों की भारी भीड़ रही।
  • अन्य प्रमुख स्थान: बड़ी दरगाह, छोटी दरगाह, नूरानी जामा मस्जिद (बाणसागर कॉलोनी), जामा मस्जिद शफीफ, हमीदिया कॉलोनी (ढेकहा), जामा मस्जिद अब्दुल हफीज (बोदबाग) और जामा मस्जिद यासीन (कटरा) में भी अकीदत के साथ नमाज अदा की गई।

केंद्रीय जेल में बंदियों ने भी मांगी मुल्क की सलामती की दुआ
इस पावन अवसर पर रीवा की केंद्रीय जेल में एक अलग और भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। जेल प्रशासन के सहयोग से वहां बंद मुस्लिम कैदियों के लिए विशेष नमाज की व्यवस्था की गई थी। सलाखों के पीछे बंदियों ने पूरी शिद्दत के साथ अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाया और अपने गुनाहों की तौबा करते हुए देश में शांति और सौहार्द बनाए रखने की प्रार्थना की।

इस दौरान धार्मिक गुरुओं (उलेमाओं) ने बकरीद के वास्तविक संदेश को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह त्योहार केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह आत्म-त्याग, निस्वार्थ कुर्बानी, इंसानियत की सेवा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने सभी से समाज में आपसी सद्भाव को मजबूत करने की अपील की।

कब्रिस्तानों में फातिहा और घरों में हुई कुर्बानी की रस्म
धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार, मुख्य नमाज की समाप्ति के बाद लोग सीधे स्थानीय कब्रिस्तानों की ओर रुख कर गए। वहां उन्होंने अपने पूर्वजों और बिछड़ चुके परिजनों की याद में शिफा की दुआ की और उनकी कब्रों पर फातिहा पढ़ा।

इसके बाद घरों में पवित्र कुर्बानी की रस्म पूरी शुचिता के साथ अदा की गई। त्योहार की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए, मांस और अन्य जरूरी खाद्य सामग्रियों को तीन हिस्सों में बांटा गया, जिसका एक बड़ा भाग गरीबों, बेसहारा लोगों और जरूरतमंदों के बीच वितरित किया गया ताकि समाज का हर वर्ग इस त्योहार की खुशियों में शामिल हो सके।

बाजारों में रही भारी रौनक, देर रात तक चली खरीदारी
बकरीद को लेकर रीवा के स्थानीय बाजारों में पिछले कई दिनों से चहल-पहल बनी हुई थी। त्योहार की पूर्व संध्या पर यानी गुरुवार की देर रात तक शहर के प्रमुख बाजार ग्राहकों से गुलजार रहे। नए कपड़ों की दुकानों, सुगंधित मसालों, सेवइयों और अन्य घरेलू सामानों के काउंटरों पर भारी भीड़ देखी गई। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में त्योहार को लेकर एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह था। घरों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था और मेहमानों की आवभगत के लिए लजीज पकवान तैयार किए गए थे।

प्रशासन की मुस्तैदी और चौतरफा सुरक्षा घेरा
रीवा जिला और पुलिस प्रशासन त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर था। संवेदनशीलता और सुरक्षा को देखते हुए शहर के सभी प्रमुख चौराहों, मस्जिदों और ईदगाहों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

  • यातायात प्रबंधन: नमाज के समय ट्रैफिक जाम की स्थिति न बने, इसके लिए यातायात पुलिस ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती के साथ रूट डायवर्जन किया था।
  • नागरिक सुविधाएं: नगर निगम प्रशासन द्वारा सभी नमाज स्थलों के आसपास विशेष साफ-सफाई अभियान चलाया गया था। इसके साथ ही चूने का छिड़काव, निर्बाध बिजली आपूर्ति और शुद्ध पेयजल के टैंकरों की मुकम्मल व्यवस्था की गई थी।
  • निगरानी: वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार पेट्रोलिंग वाहनों के जरिए पूरे शहर का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।

इस पावन मौके पर विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य धर्मों के नागरिकों ने मुस्लिम भाइयों से मुलाकात कर उन्हें बकरीद की बधाई दी, जिससे रीवा की गंगा-जमुनी तहजीब एक बार फिर जीवंत हो उठी।

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