रीवा बीआरसी दफ्तर में 'फर्जी सत्यापन' का खेल! 3 दुकानों में 8 कक्षाएं, न बीएड शिक्षक, न ग्राउंड न शौचालय! न कमरे... बस दस हज़ार में मिल गई 8वीं तक की मान्यता!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल के केंद्र रीवा में नौनिहालों के भविष्य को संवारने का दावा करने वाली प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था खुद सवालों के कटघरे में खड़ी हो गई है। जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 जन शिक्षा केंद्र के अंतर्गत विजय विलास होटल के पीछे गडरिया क्षेत्र स्थित एक्सीलेंस पब्लिक स्कूल का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग के विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली और निजी स्कूलों की मान्यता देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि कागजों पर तमाम नियम-कायदों की पूर्ति दिखाकर धरातल पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना किसी भी शैक्षणिक संस्थान का प्राथमिक उत्तरदायित्व होता है। इसके विपरीत, इस विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा मानकों और पर्याप्त स्थान का भारी अभाव पाया गया है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम और राज्य शिक्षा केंद्र के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद इस प्रकार के संस्थानों को मान्यता मिलना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि निरीक्षण प्रक्रिया में किस कदर औपचारिकता निभाई जाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है।

तीन दुकानों में 10 कक्षाएं: मान्यता प्रक्रिया और भौतिक सत्यापन पर उठते सवाल
सामने आई शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्सीलेंस पब्लिक स्कूल गडरिया में कक्षा नर्सरी से लेकर कक्षा आठवीं तक की पढ़ाई महज तीन दुकानों/छोटे कमरों में संचालित की जा रही है। बताया जा रहा है कि इन कमरों का आकार बहुत ही सीमित है। इतने कम स्थान में इतनी सारी अलग-अलग स्तर की कक्षाओं का संचालन किस तरह संभव हो पा रहा है, यह अपने आप में एक बड़ा यक्ष प्रश्न है। आरोप यह भी हैं कि एक-एक कमरे के भीतर दो-दो कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बिठाकर पढ़ाया जाता है, जिससे पढ़ाई का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह प्रभावित होता है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा संशय मान्यता दिए जाने से पहले किए जाने वाले भौतिक सत्यापन (Physical Verification) पर उठ रहा है। विद्यालय के मान्यता आवेदन से संबंधित उपलब्ध पोर्टल दस्तावेजों में बीआरसी कार्यालय द्वारा सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण दिखाए जाने का उल्लेख है। दस्तावेजी जांच और भौतिक स्थिति के बीच का यह अंतर स्पष्ट करता है कि या तो निरीक्षण के समय तथ्यों को छुपाया गया या फिर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बिना मौके की जांच किए कागजी खानापूर्ति कर मान्यता की फाइल को हरी झंडी दे दी गई।

जांच के प्रमुख बिंदु और एक्सीलेंस स्कूल गडरिया की स्थिति
भौतिक सत्यापन (Physical Verification):

  • शासकीय नियम एवं मानक: मौके पर जाकर कमरों, भवन और परिसर की वास्तविक स्थिति की जांच की जानी अनिवार्य है।
  • एक्सीलेंस स्कूल गडरिया की स्थिति: स्कूल में मौके पर जाकर जांच करने के बजाय दफ्तर में बैठकर ही सत्यापन किए जाने का गंभीर आरोप है।
  • संचालक व बीआरसी का पक्ष: स्कूल संचालक का स्पष्ट आरोप है कि बीआरसी दीपेंद्र सिंह द्वारा पांच हजार (₹5000) रुपये की रिश्वत लेकर दफ्तर में ही बैठकर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट तैयार की गई थी।

कमरों की संख्या और कक्षाएं:

  • शासकीय नियम एवं मानक: विद्यालय संचालन के लिए कम से कम 8 से 10 बड़े और हवादार कमरे होने चाहिए।
  • एक्सीलेंस स्कूल गडरिया की स्थिति: धरातल पर केवल 3 छोटे कमरे (लगभग 10×15 फीट) उपलब्ध हैं।
  • संचालक व बीआरसी का पक्ष: इतने कम स्थान में कक्षा 1 से 8 तक की आठ कक्षाएं चलाई जा रही हैं, जहाँ एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाया जाता है।

शिक्षकों की संख्या:

  • शासकीय नियम एवं मानक: नियमों के अनुसार विद्यालय में न्यूनतम 12 प्रशिक्षित शिक्षक होना अनिवार्य हैं।
  • एक्सीलेंस स्कूल गडरिया की स्थिति: वर्तमान में मौके पर केवल 3 शिक्षक ही पदस्थ पाए गए हैं।
  • संचालक व बीआरसी का पक्ष: बीआरसी का इस पर दावा है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति और स्पष्टीकरण सामने आ सकेगा।

शिक्षक योग्यता और प्रशिक्षण:

शासकीय नियम एवं मानक: शिक्षकों के पास डी.एल.एड (D.El.Ed) या बी.एड (B.Ed) जैसी व्यावसायिक शैक्षणिक योग्यता होना जरूरी है।

एक्सीलेंस स्कूल गडरिया की स्थिति: कार्यरत शिक्षकों की आवश्यक व्यावसायिक योग्यता की स्वतंत्र पुष्टि दस्तावेजों से नहीं हो पाई है।

संचालक व बीआरसी का पक्ष: बीआरसी द्वारा यह अजीब तर्क दिया गया कि रीवा शहर में कोई अन्य स्कूल उपलब्ध न होने के कारण शिक्षकों का प्रशिक्षण गडरिया रोड स्थित 'विंध्य इंटरनेशनल स्कूल' (एक निजी संस्था) में आयोजित कराया गया था।

मूलभूत सुविधाएं (शौचालय और खेल मैदान):

शासकीय नियम एवं मानक: छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय और बच्चों के खेलकूद के लिए मैदान होना अनिवार्य शर्त है।
एक्सीलेंस स्कूल गडरिया की स्थिति: विद्यालय परिसर में शौचालय और खेल मैदान जैसी बुनियादी एवं अति-आवश्यक सुविधाओं का भारी अभाव है।
संचालक व बीआरसी का पक्ष: मौके पर बच्चों के लिए कोई भी उचित एवं मानक व्यवस्था उपलब्ध नहीं पाई गई है, जिसके चलते मान्यता प्रक्रिया पूरी तरह संदेह के घेरे में है।

'10,000 का सच': स्कूल संचालक का बीआरसी पर रिश्वत लेकर सत्यापन का बड़ा आरोप
इस मामले में तब एक नया और बड़ा प्रशासनिक विस्फोट हुआ जब स्कूल संचालक द्वारा बीआरसी रीवा दीपेंद्र सिंह पर सीधे तौर पर ₹10,000 रुपये की रिश्वत लेकर दफ्तर में बैठकर ही फर्जी तरीके से भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने का संगीन आरोप लगाया गया। जबकि 5 हज़ार लेके मामले को निपटा दिया गया। 

स्कूल संचालक से जब मान्यता से जुड़े सवाल पूछे गए, तो उन्होंने खुलासा किया कि मान्यता प्रक्रिया के दौरान जब भौतिक सत्यापन की बारी आई, तो वे बीआरसी कार्यालय रीवा पहुंचे थे, जहाँ बीआरसी दीपेंद्र सिंह द्वारा पांच हजार रुपये लेकर कार्यालय में ही बैठकर भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट तैयार कर दी गई। हालांकि, इस दावे में कितनी सच्चाई है, यह तो एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन इसने पूरे विभाग पर भ्रष्टाचार का बड़ा धब्बा लगा दिया है।

बीआरसी रीवा दीपेंद्र सिंह का पक्ष और 12 शिक्षकों के नियम का सच
मामले के तूल पकड़ने और विभागीय साक्ष्यों के सामने आने के बाद बीआरसी रीवा श्री दीपेंद्र सिंह की भूमिका पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ गई है। जब उनसे विद्यालय की वास्तविक स्थिति और भौतिक सत्यापन से जुड़े बिंदुओं पर जवाब मांगा गया, तो उनका कहना था:

"भौतिक सत्यापन के लिए जब मैं मौके पर जांच करने गया था, तब वहां पर्याप्त बिल्डिंग रही होगी। उस समय क्या परिस्थितियां थीं और अब क्या स्थिति है, यह विस्तृत जांच कराने के बाद ही पूरी तरह से स्पष्ट किया जा सकेगा।"
बीआरसी ने स्वयं स्वीकार किया कि शासकीय एवं विभागीय मानदंडों के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालय में कम से कम 12 शिक्षक पदस्थ होने चाहिए, जो कि विधिवत व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित यानी बी.एड (B.Ed) या डी.एल.एड धारक हों। जबकि चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान में इस विद्यालय में केवल 3 शिक्षक ही कार्यरत पाए गए हैं।

प्राइवेट संस्था में ट्रेनिंग और मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव
इस पूरे विवाद में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब शिक्षकों के प्रशिक्षण स्थल को लेकर भी सवाल खड़े हुए। जब बीआरसी से पूछा गया कि शासकीय या अन्य उपयुक्त प्रशिक्षण केंद्र के बजाय निजी संस्था में प्रशिक्षण कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया, तो उनका कहना था कि रीवा शहर में उस समय कोई भी उपयुक्त शासकीय या प्राइवेट स्कूल की उपलब्धता न होने के कारण मजबूरीवश गड़रिया रोड स्थित विंध्य इंटरनेशनल स्कूल में प्रशिक्षण की व्यवस्था कराई गई थी।

इसके अतिरिक्त, एक्सीलेंस पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों के लिए अति-आवश्यक बुनियादी सुविधाएं जैसे:
शौचालय (लैट्रिन-बाथरूम) की व्यवस्था: छात्र एवं छात्राओं के लिए स्वच्छ और पृथक शौचालय सुविधाओं का न होना।
खेल का मैदान: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक खेल परिसर का पूरी तरह नदारद होना।
प्रशिक्षित शिक्षक: तीन शिक्षकों के पास भी आवश्यक व्यावसायिक शैक्षणिक डिप्लोमा न होना।

नौनिहालों के भविष्य पर संकट और प्रशासनिक निष्पक्ष जांच की मांग
प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा बच्चे के सर्वांगीण विकास की नींव होती है। यदि नींव के स्तर पर ही इस प्रकार का समझौता किया जाएगा, तो बच्चों का बौद्धिक और मानसिक विकास पूरी तरह अवरुद्ध हो जाएगा। बिना पर्याप्त स्थान, बिना योग्य शिक्षकों और बिना बुनियादी सुविधाओं के संचालित हो रहे ऐसे विद्यालयों की मान्यता को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।

स्थानीय अभिभावकों और सजग नागरिकों ने रीवा जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त से मांग की है कि:

  • रिश्वत के आरोपों की स्वतंत्र टीम से तात्कालिक जांच कराई जाए।
  • वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का दल गठित कर स्कूल का तत्काल पुन: भौतिक सत्यापन कराया जाए।
  • नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर स्कूल की मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व प्रबंधकों पर कड़ी कार्रवाई हो।

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