रीवा के GMH की SNCU में आग: करोड़ों का बजट, फिर भी मौत के मुहाने पर नवजात!
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा के गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल (GMH) की SNCU में लगी आग ने सिर्फ एक वार्ड को नहीं जलाया, बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम की सड़ी हुई हकीकत को सामने ला दिया है। जिस अस्पताल को विंध्य का सबसे बड़ा और सबसे सुरक्षित सरकारी चिकित्सा केंद्र कहा जाता है, वहीं नवजात बच्चों की जिंदगी बिजली के जर्जर तारों और भ्रष्ट सिस्टम के भरोसे चल रही है। गुरुवार देर रात SNCU में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और धुआं फैलने लगा। वार्ड में भर्ती मासूम बच्चों के परिजनों में चीख-पुकार मच गई। कोई बच्चे को गोद में लेकर बाहर भागा, कोई ऑक्सीजन पाइप हटने के डर से रोता रहा। अगर ड्यूटी स्टाफ कुछ मिनट देर कर देता, तो रीवा में एक भयावह हादसा हो सकता था।

सबसे बड़ा सवाल — जिम्मेदार कौन?
अगर किसी नवजात की मौत हो जाती तो जिम्मेदारी कौन लेता?
- मेडिकल कॉलेज प्रबंधन?
- अस्पताल अधीक्षक?
- डीन?
- पीडब्ल्यूडी और इलेक्ट्रिकल विंग?
- मेंटेनेंस कंपनी?
- या फिर स्वास्थ्य विभाग?
हर हादसे के बाद “जांच के आदेश” देकर फाइल बंद कर देना क्या अब सिस्टम का स्थायी इलाज बन चुका है?
GMH में आखिर चल क्या रहा है? करोड़ों का बजट आखिर जाता कहां है?

GMH और मेडिकल कॉलेज को हर साल करोड़ों रुपये का बजट मिलता है।
फिर भी—
- वार्डों में जर्जर वायरिंग
- खराब ICU मशीनें
- बंद पड़े मॉनिटर
- अधूरी फायर सेफ्टी
- खराब AC और वेंटिलेशन सिस्टम
- बिजली बैकअप की समस्या
- उपकरणों का अधूरा मेंटेनेंस
अगर पैसा खर्च हो रहा है, तो सुविधाएं क्यों नहीं दिख रहीं?
मेंटेनेंस कंपनी का भुगतान क्यों रुका?
सूत्रों के मुताबिक बिजली और उपकरणों का मेंटेनेंस करने वाली कंपनी का भुगतान लंबे समय से लंबित है। इसी कारण कई जगहों पर तकनीकी कार्य प्रभावित है।
यानी:
- मशीनें खराब पड़ी हैं
- वायरिंग समय पर नहीं बदली गई
- सुरक्षा जांच अधूरी है
- उपकरण बिना सर्विसिंग के चल रहे हैं
- क्या भुगतान रोककर अस्पताल को खतरे में धकेला गया?
पहले भी उठ चुके हैं सवाल GMH में यह पहली घटना नहीं है।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले:
- ICU उपकरण खराब होने की शिकायत
- बिजली ट्रिपिंग
- ऑक्सीजन लाइन गड़बड़ी
- वार्डों में शॉर्ट सर्किट
- फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी
- अव्यवस्थित इलेक्ट्रिकल सिस्टम
लेकिन हर बार जांच हुई, जिम्मेदारी तय नहीं हुई। अब तक कितनी बार लगी आग? क्या हुआ नुकसान?
सामने आए प्रमुख घटनाक्रम
▪ SNCU आगकांड – मई 2026
- कारण: शॉर्ट सर्किट
- स्थिति: धुआं और अफरा-तफरी
- नुकसान: बड़ा हादसा टला
- राहत: सभी नवजात सुरक्षित शिफ्ट
▪ पुराने विद्युत फॉल्ट और ट्रिपिंग के मामले
- कई वार्डों में बिजली बाधित होने की शिकायतें
- ICU और संवेदनशील वार्डों में उपकरण बंद पड़ने की घटनाएं
- स्टाफ द्वारा कई बार मौखिक शिकायतें
▪ फायर सेफ्टी पर लगातार सवाल
- नियमित ऑडिट की जानकारी सार्वजनिक नहीं
- आपातकालीन ड्रिल की स्थिति अस्पष्ट
- कई हिस्सों में पुराने तार और पैनल
नोट: आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं होने के कारण पूरी संख्या सामने नहीं है। RTI और तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक आंकड़े सामने आ सकते हैं।
अगर आग फैल जाती तो क्या होता? SNCU कोई सामान्य वार्ड नहीं होता।
यहां भर्ती रहते हैं:
- प्रीमैच्योर बच्चे
- ऑक्सीजन सपोर्ट वाले नवजात
- गंभीर संक्रमण से जूझ रहे शिशु
- वेंटिलेटर सपोर्ट वाले बच्चे
अगर आग कुछ मिनट और फैलती:
- ऑक्सीजन लाइन विस्फोट कर सकती थी
- धुएं से दम घुट सकता था
- बिजली बंद होने से मशीनें रुक सकती थीं
- कई नवजातों की जान जा सकती थी
यानी यह सिर्फ “शॉर्ट सर्किट” नहीं, संभावित सामूहिक लापरवाही का मामला है।
कितने लोग हो सकते हैं जिम्मेदार?
इस पूरे मामले में कई स्तरों पर जिम्मेदारी बनती है:
- संभावित जिम्मेदार विभाग
- मेडिकल कॉलेज प्रशासन
- GMH प्रबंधन
- इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस विंग
- PWD विभाग
- फायर सेफ्टी निरीक्षण टीम
- भुगतान और वित्त शाखा
- स्वास्थ्य विभाग के निगरानी अधिकारी
अगर मेंटेनेंस रुका था, तो संचालन की अनुमति किसने दी? अगर फायर ऑडिट अधूरा था, तो वार्ड चालू क्यों रहा?
जनता पूछ रही है ये 10 बड़े सवाल
- GMH को सालाना कितना बजट मिलता है?
- फायर सेफ्टी ऑडिट आखिरी बार कब हुआ?
रीवा का GMH अब इलाज से ज्यादा लापरवाही की खबरों में है।
आज बच्चे बच गए, लेकिन सिस्टम नहीं सुधरा तो कल कोई बड़ी त्रासदी भी हो सकती है।
- SNCU की वायरिंग आखिरी बार कब बदली गई?
- मेंटेनेंस कंपनी का कितना भुगतान लंबित है?
- भुगतान रोकने का आदेश किसने दिया?
- क्या अस्पताल में नियमित सुरक्षा जांच होती है?
- क्या फायर NOC अपडेट है?
- कितनी मशीनें वर्तमान में खराब हैं?
- क्या इस घटना की न्यायिक जांच होगी?
- अगर बच्चा मर जाता तो जिम्मेदार कौन होता?
- अब क्या होना चाहिए?
- सिर्फ जांच नहीं, ये कार्रवाई जरूरी
- हाई लेवल तकनीकी जांच
- फायर सेफ्टी ऑडिट सार्वजनिक हो
- दोषी अधिकारियों पर FIR
- भुगतान और टेंडर की जांच
- पूरे अस्पताल की वायरिंग जांच
- SNCU और ICU का स्वतंत्र निरीक्षण
- RTI के जरिए बजट और खर्च सार्वजनिक
सरकार को तय करना होगा—
- क्या अस्पताल मरीजों के इलाज के लिए चल रहे हैं या सिर्फ बजट, बिल और भुगतानों के खेल के लिए? रीवा की जनता जवाब मांग रही है। और इस बार सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा।