विंध्य में पहली बार इतनी बड़ी 'नार्को स्ट्राइक': किराए के कमरे में चल रही थी इंटरनेशनल ड्रग्स फैक्ट्री, मऊगंज पुलिस भी दंग, रीवा के 4 लड़के गिरफ्तार

 
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ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल।  मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिले मऊगंज में कानून व्यवस्था और एंटी-ड्रग्स स्क्वाड ने नशे के अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय काले कारोबार के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। सोमवार की दोपहर शाहपुर थाना अंतर्गत आने वाले बिझौली गांव में पुलिस की विशेष टीमों ने अचानक छापेमारी कर एक आलीशान और गुप्त तरीके से संचालित हो रही एमडी (MDMA) ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।

इस पूरी सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में तैयार सिंथेटिक ड्रग्स, कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाला घातक रासायनिक लिक्विड, अत्याधुनिक स्वचालित मशीनें और परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली लग्जरी गाड़ी समेत कुल 1 करोड़ 28 lakh रुपए मूल्य की संपत्ति जब्त की है। पुलिस ने इस हाईटेक नार्को लैब को संचालित करने वाले चार शातिर अपराधियों को रंगे हाथों दबोचने में सफलता हासिल की है।

बिझौली गांव में खुफिया रेड: कैसे हुआ इस इंटरनेशनल सिंडिकेट का पर्दाफाश?
मऊगंज जिला पुलिस अधीक्षक (SP) सुरेंद्र कुमार जैन को पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में संदिग्ध बाहरी गतिविधियों और सिंथेटिक नशीले पदार्थों की गुप्त सप्लाई की गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं। एसपी ने इस इनपुट पर काम करने के लिए साइबर सेल और शाहपुर पुलिस की एक संयुक्त विशेष टीम का गठन किया। सोमवार को पुलिस को एक सटीक मुखबिर से पक्की सूचना मिली कि बिझौली गांव में एक सुनसान जगह पर स्थित मकान के भीतर कुछ संदिग्ध लोग बंद कमरों में भारी वेंटिलेशन और जनरेटर का उपयोग कर कोई अवैध केमिकल प्रोसेस कर रहे हैं।

सूचना मिलते ही शाहपुर थाना प्रभारी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने बिना वक्त गंवाए बिझौली गांव के उस लक्षित मकान को चारों तरफ से घेर लिया। जब पुलिस टीम ने दरवाजे को तोड़कर अंदर प्रवेश किया, तो वहां का नजारा देखकर खुद पुलिस अधिकारी दंग रह गए। घर के भीतर कोई सामान्य रहवास नहीं था, बल्कि वहां वैज्ञानिक उपकरणों से लैस एक पूरी रासायनिक प्रयोगशाला (नार्को लैब) धधक रही थी। मशीनें चालू थीं, हीटर ऑन थे और कांच के बड़े बर्तनों में खतरनाक नशीला केमिकल उबल रहा था।

जब्त की गई संपत्तियों का पूरा विवरण: अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1 करोड़ की ड्रग्स बरामद
पुलिस द्वारा इस नार्को लैब से की गई जब्ती की सूची बेहद लंबी है, जो यह साबित करती है कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक स्तर पर किया जा रहा अपराध था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सबसे पहले मौके से 360 ग्राम शुद्ध सॉलिड फॉर्म में तैयार एमडी ड्रग बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट और मुंबई के बड़े नाइट क्लबों में अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा लैब के भीतर ड्रमों में भरकर रखा गया 300 लीटर से ज्यादा खतरनाक नशीला रासायनिक लिक्विड भी मिला है, जिसका इस्तेमाल ड्रग्स को प्रोसेस करने में किया जाना था।

किरान के मकान में एमडी ड्रग्स बनाने का सामान मिला है।

किरान के मकान में एमडी ड्रग्स बनाने का सामान मिला है।

इतना ही नहीं, घर के अंदर पूरी तरह से प्लांट सेटअप स्थापित किया गया था। वहाँ से बड़ी ओवन मशीन, वैक्यूम पंप, हाई-पावर जनरेटर, इंडक्शन हीटर, हेवी मोटर, मोटर कंट्रोलर डिवाइस, तापमान मापने वाली डिजिटल मशीनें और केमिकल मिक्सिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कांच के बड़े फ्लास्क (विशेष बर्तन) बरामद किए गए हैं। साथ ही, तैयार माल की सप्लाई के लिए इस्तेमाल होने वाली एक ब्रांड न्यू महिंद्रा नियो बोलेरो गाड़ी को भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। इस पूरे जब्त सामान और फैक्ट्री के इंफ्रास्ट्रक्चर की कुल आंकी गई कीमत 1 करोड़ 28 लाख रुपए है।

आरोपियों का पूरा प्रोफाइल: रीवा के रहने वाले हैं पकड़े गए चारों तस्कर
इस काले धंधे में शामिल जो चार चेहरे बेनकाब हुए हैं, वे सभी मऊगंज के पड़ोसी जिले रीवा के मूल निवासी हैं। शिक्षा और कम उम्र की आड़ में इन युवाओं ने अपराध की दुनिया का यह खतरनाक रास्ता चुना:

चंदन सिंह (उम्र 26 वर्ष): यह इस पूरे रैकेट का मुख्य संचालक, केमिस्ट और मास्टरमाइंड है, जो रीवा के ग्राम सोनवर्षा का निवासी है।
अशोक गुप्ता (उम्र 40 वर्ष): रीवा के लालगांव का रहने वाला यह आरोपी स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स, फंडिंग और पूरी व्यवस्था को बैकएंड से संभालने का काम करता था।
पीकचंद्र यादव (उम्र 21 वर्ष): रीवा के ग्राम सोनवर्षा का रहने वाला यह युवक मुख्य आरोपी चंदन का सबसे करीबी मददगार और लैब के भीतर असिस्टेंट के तौर पर काम करता था।
ऋषभ सेन (उम्र 18 वर्ष): रीवा के गोविंदगढ़ इलाके के शुकुलगवां का रहने वाला यह गैंग का सबसे युवा सदस्य है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से डिलीवरी और लोकल रेकी के लिए किया जाता था।

मास्टरमाइंड चंदन सिंह की इनसाइड स्टोरी: मुंबई के नाइट क्लब से सीखा मौत बनाने का फॉर्मूला
शुरुआती पुलिस रिमांड और सघन पूछताछ के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। मुख्य सरगना चंदन सिंह कोई पेशेवर वैज्ञानिक नहीं है, बल्कि उसने यह सब अपराध की संगत में सीखा। कुछ समय पहले तक चंदन सिंह मुंबई के उपनगरीय इलाके बदलापुर में स्थित एक नामी नाइट क्लब में काम करता था। वहां हाई-प्रोफाइल पार्टियों में एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स की भारी मांग और इसके पीछे के अंधाधुंध मुनाफे को देखकर उसकी नीयत डोल गई।

बदलापुर के उसी क्लब में उसकी मुलाकात देश के बड़े नार्को सप्लायर्स के गुर्गों से हुई। वहीं पर चंदन ने रासायनिक तत्वों को मिलाकर सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की गुप्त विधि (रेसिपी) सीख ली। लगभग एक साल पहले जब मुंबई पुलिस ने उस नेटवर्क पर बड़ा क्रैकडाउन किया, तो चंदन वहां से गिरफ्तारी से बचने के लिए रातों-रात फरार हो गया और अपने गृह क्षेत्र विंध्य (मध्य प्रदेश) वापस लौट आया।

पाइपलाइन केमिकल के नाम पर धोखा: ₹3000 के किराए के कमरे में नार्को लैब
मुंबई से भागने के बाद चंदन ने मऊगंज के शाहपुर क्षेत्र को सेफ हेवन के रूप में चुना। मार्च 2026 में उसने बिझौली गांव के सीधे-साधे ग्रामीण यज्ञभान साहू से संपर्क किया। चंदन ने यज्ञभान को झांसा दिया कि वह एक ठेकेदार है और प्लंबिंग तथा औद्योगिक पाइपलाइनों को आपस में जोड़ने वाला एक विशेष 'सिंथेटिक एडहेसिव केमिकल' (गोंद/सॉल्यूशन) बनाने का वैध लघु उद्योग शुरू करना चाहता है।

मकान मालिक को इस साजिश की भनक तक नहीं थी। चंदन ने ₹3000 प्रति माह के किराए पर पूरा मकान बुक कर लिया। इसके बाद उसने रीवा से अपने अन्य साथियों को बुलाया और घर के खिड़की-दरवाजों को पूरी तरह से साउंडप्रूफ और एयर-टाइट पैक्ड कर दिया, ताकि केमिकल की गंध बाहर न जा सके। बंद कमरों के भीतर दिन-रात मुंबई और नागपुर के रईसजादों के लिए मौत का सामान (MDMA) तैयार किया जाने लगा।

शाहपुर थाने में एफआईआर: एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
मऊगंज पुलिस ने चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर शाहपुर थाने में एनडीपीएस (NDPS - नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट की गंभीर और गैर-जमानती धारा 8/22 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन अब इन सभी आरोपियों को जिला अदालत में पेश कर अधिकतम दिनों की पुलिस रिमांड (Police Custody) मांगेगी।

एसपी सुरेंद्र कुमार जैन का आधिकारिक बयान:
"यह केवल एक फैक्ट्री की जब्ती नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ने जैसा है। हमारी जांच अभी शुरुआती चरण में है। हमारा अगला निशाना वे लोग हैं जो इन लड़कों को कच्चा माल (केमिकल प्रिकर्सर) सप्लाई कर रहे थे और मुंबई-नागपुर के वे बड़े ड्रग डीलर कौन हैं जो इनसे माल रिसीव करते थे। इस नेटवर्क से जुड़े किसी भी सफेदपोश या अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।"

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