रीवा में 'जुगाड़' को गैस, जनता को लात: पापुलर गैस एजेंसी पर सुबह 4 बजे से चूल्हा फूंक रही महिलाएं, प्रशासन के 'पर्याप्त स्टॉक' के दावों की निकली हवा

 
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पापुलर गैस एजेंसी पर सर्वर डाउन और 'जुगाड़' के खेल ने बढ़ाई मुसीबत, प्रशासन के दावों की खुली पोल।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य के सबसे बड़े शहर रीवा में इन दिनों रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है। रविवार की सुबह जब शहर सो रहा था, तब अजगरहा स्थित पापुलर गैस एजेंसी के बाहर सैकड़ों की संख्या में लोग सिलेंडर के लिए कतारों में खड़े हो चुके थे। सुबह 4 बजे से ही महिलाओं और पुरुषों का जमावड़ा एजेंसी के गेट पर लग गया, जो घंटों बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हुए।

पापुलर गैस एजेंसी अजगरहा: दावों और हकीकत में अंतर 
अजगरहा की इस एजेंसी पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण देखी गई। कतार में खड़ी महिलाओं का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने बताया कि घरों में चूल्हा बुझ चुका है और छोटे बच्चे भूखे हैं।

"हम अपने मासूम बच्चों को घर पर अकेला छोड़कर भोर में ही यहां आ गए थे, इस उम्मीद में कि आज सिलेंडर मिल जाएगा, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी निराशा ही हाथ लगी।"
प्रशासन जहां एक ओर जिले में गैस की भरपूर सप्लाई का दावा कर रहा है, वहीं हकीकत इन कतारों में साफ देखी जा सकती है।

सर्वर डाउन की मार और 'जुगाड़' का खेल 
उपभोक्ताओं के लिए दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है। एक तरफ सर्वर डाउन होने की वजह से ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही है, वहीं दूसरी तरफ एजेंसी संचालकों का कहना है कि वे केवल उन्हीं को सिलेंडर दे रहे हैं जिनके पास बुकिंग कूपन है।

गंभीर आरोप:
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि एजेंसी के भीतर 'जुगाड़ तंत्र' हावी है। आम लोग लाइन में लगकर पसीना बहा रहे हैं, जबकि पहुंच वाले लोगों को एजेंसी से दूर पिछले दरवाजों या अन्य रास्तों से सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पक्षपात ने आम जनता के गुस्से को और भड़का दिया है।

प्रशासनिक दावे बनाम जमीन पर जनता का दर्द 
जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। उनके अनुसार, यह समस्या तकनीकी (Server Issue) है न कि स्टॉक की। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर स्टॉक पर्याप्त है, तो ऑफलाइन वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? जनता का मानना है कि प्रशासन के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

शहर की अन्य एजेंसियों का हाल: हर तरफ अफरा-तफरी 
अव्यवस्था का यह आलम सिर्फ अजगरहा तक ही सीमित नहीं है। रीवा शहर की लगभग सभी प्रमुख गैस एजेंसियों के बाहर कमोवेश यही स्थिति बनी हुई है। शहर के अलग-अलग कोनों से आ रही खबरें बताती हैं कि लोग काम-काज छोड़कर सिलेंडर के पीछे भागने को मजबूर हैं। अव्यवस्था के कारण कई जगहों पर हल्की नोकझोंक की स्थिति भी निर्मित हो रही है।

निष्कर्ष और समाधान 
रीवा में गैस वितरण प्रणाली पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। जब तक सर्वर की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता और 'जुगाड़' से होने वाली कालाबाजारी पर रोक नहीं लगती, तब तक आम आदमी की रसोई ठंडी ही रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर टोकन सिस्टम या वार्ड-वार वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करे।

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