कलेक्टर साहब देखिये! बड़ी पुल के पास 'बीमार' बेकरी का आतंक, न लाइसेंस न सफाई—सिर्फ जनता की सेहत से खिलवाड़

 
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प्रशासन की नाक के नीचे चल रही 'बीमार' केक फैक्ट्री, सड़े माल और कीड़े-मकोड़ों के बीच तैयार हो रहा जहर। देखें पूरी पड़ताल।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा शहर में मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के नाम पर लोगों की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। ताज़ा मामला बड़ी पुल के पास संचालित 'हरदेव बेकरी' का है, जिसके संचालक हरीश आडवाणी हैं। यहाँ की केक फैक्ट्री के भीतर का नज़ारा किसी डरावने सपने से कम नहीं है। जहाँ खुशबूदार केक बनने चाहिए, वहाँ सड़ांध और गंदगी का साम्राज्य है।

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गंदगी का अंबार: मौत परोस रही है हरदेव बेकरी
फैक्ट्री के भीतर प्रवेश करते ही नियमों की धज्जियाँ उड़ती साफ़ देखी जा सकती हैं। केक बनाने के बर्तनों की महीनों से सफाई नहीं हुई है। फर्श से लेकर छतों तक जाले और कीचड़ जमा है।

  • सड़ा हुआ कच्चा माल: केक बनाने के लिए उपयोग किए जा रहे अंडे और क्रीम से भयंकर दुर्गंध आ रही थी।
  • कीड़े-मकोड़ों का बसेरा: जिस बेस पर केक सजाया जाता है, वहाँ मक्खियों और कीड़ों का जमावड़ा पाया गया।

न बोर्ड, न लाइसेंस: संचालक की भारी मनमानी
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी फैक्ट्री होने के बावजूद संचालक के पास न तो कोई वैध नाम बोर्ड है और न ही अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र।

  • कर्मचारियों की हालत: फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी बिना ग्लव्स, बिना मास्क और गंदे कपड़ों में काम करते पाए गए।
  • सुरक्षा की अनदेखी: अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) और वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं है, जो किसी भी बड़े हादसे को दावत दे सकती है।

प्रशासनिक मिलीभगत या अंधा कानून?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि संचालक हरीश आडवाणी का रसूख इतना है कि वह खाद्य विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक को 'मैनेज' करने का दावा करता है। यही कारण है कि बार-बार मौखिक चेतावनी मिलने के बाद भी फैक्ट्री का संचालन बिना किसी सुधार के जारी है। खबर छपने के बाद भी प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

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एक आदर्श बेकरी के लिए क्या हैं अनिवार्य नियम? 
यदि कोई भी बेकरी या खाद्य इकाई संचालित होती है, तो उसे निम्नलिखित मानकों का पालन करना अनिवार्य है, जिनकी हरदेव बेकरी में भारी कमी है:

अनिवार्य लाइसेंस और कानूनी दस्तावेज 

  • FSSAI लाइसेंस/पंजीकरण: यह खाद्य सुरक्षा का सबसे प्राथमिक प्रमाण है।
  • स्वास्थ्य/व्यापार लाइसेंस: नगर निगम से हेल्थ परमिट लेना अनिवार्य है।
  • फायर NOC: अग्नि विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र होना जरूरी है।
  • GST रजिस्ट्रेशन: व्यवसाय के कानूनी संचालन के लिए आवश्यक।

स्वच्छता के कड़े मानक 

  • पर्सनल हाइजीन: कर्मचारियों को क्लीन यूनिफॉर्म, हेयरनेट और ग्लव्स पहनना अनिवार्य है।
  • भंडारण: कच्चे माल और तैयार माल को अलग-अलग और सही तापमान पर रखना चाहिए।
  • पेस्ट कंट्रोल: फैक्ट्री में कीड़े-मकोड़ों के लिए नियमित पेस्ट कंट्रोल होना चाहिए।

जनता की सेहत से समझौता क्यों?
"जनता की सेहत से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" इस फैक्ट्री पर न केवल भारी जुर्माना लगना चाहिए, बल्कि इसे तत्काल प्रभाव से सील किया जाना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे और ऐसे लापरवाह संचालकों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करे।

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