रीवा के क्योटी नेहरू प्लांट इलाके में दिल दहला देने वाली वारदात: मामूली विवाद में युवक की पीट-पीटकर हत्या
ऋतुराज द्विवेदी (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। जिले के गढ़ थाना क्षेत्र की लालगांव चौकी अंतर्गत आने वाले क्योटी नेहरू प्लांट इलाके में शनिवार की देर रात महज कहासुनी और गाली-गलौज के बाद एक युवक की निर्मम तरीके से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
मृतक की पहचान 30 वर्षीय संजय कोल के रूप में हुई है। बेदर्दी से की गई मारपीट के चलते गंभीर रूप से घायल युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल निर्मित हो गया।
सड़क किनारे बैठे थे चाचा-भतीजे: जानिए शनिवार रात की पूरी घटना का खौफनाक ब्योरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार रात लगभग 9 से 10 बजे के बीच संजय कोल अपने भतीजे के साथ क्योटी नेहरू प्लांट के पास सड़क किनारे शांति से बैठा हुआ था। इसी दौरान वहां से स्थानीय निवासी आरोपी कृष्ण गोपाल तिवारी उर्फ मोनू मिश्रा (उम्र 22 वर्ष, निवासी पिपरहा) और गोलू तिवारी (उम्र 30 वर्ष) गुजर रहे थे। किसी पुरानी बात या रास्ते से निकलने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने आपा खो दिया और गाली-गलौज करते हुए संजय कोल पर लात और घूंसों की बौछार कर दी। हमला इतना अचानक और हिंसक था कि संजय को संभलने का मौका तक नहीं मिला। शरीर के नाजुक अंगों में गंभीर चोट लगने के कारण संजय कोल की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
लालगांव पुलिस की त्वरित कार्रवाई: आरोपी मोनू मिश्रा और गोलू तिवारी गिरफ्तार
घटना के तुरंत बाद मृतक के भतीजे और स्थानीय लोगों ने लालगांव चौकी पुलिस को सूचना दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गढ़ थाना प्रभारी और लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव पुलिस बल के साथ बिना देर किए मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दोनों नामजद आरोपियों—कृष्ण गोपाल तिवारी उर्फ मोनू मिश्रा और गोलू तिवारी को हिरासत में ले लिया। लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव ने बताया कि "मामूली कहासुनी के बाद मारपीट की यह घटना घटी थी, जिसमें एक युवक की मौत हुई है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।"
पोस्टमार्टम को लेकर ग्रामीणों और परिजनों का भारी हंगामा: मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक
रविवार की सुबह जैसे ही संजय कोल की मौत की खबर इलाके में फैली, ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने शव को उठाने और पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों की मांग थी कि:
- आरोपियों के खिलाफ अति-शीघ्र सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई (फास्ट ट्रैक कोर्ट के तहत) की जाए।
- पीड़ित गरीब परिवार को आर्थिक मुआवजा और सरकारी सहायता तुरंत प्रदान की जाए।
हंगामे की सूचना मिलते ही पूर्व विधायक राम गरीब वनवासी सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच गए और परिजनों की मांगों का समर्थन करते हुए पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके कारण रविवार को दिनभर इलाके में गहमागहमी का माहौल बना रहा।
प्रशासन के कड़े आश्वासन और समझाइश के बाद शांत हुआ मामला: जांच जारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों से काफी देर तक बातचीत की। पुलिस प्रशासन ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच, आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने और शासन के नियमानुसार उचित आर्थिक सहायता दिलवाने का ठोस लिखित व मौखिक आश्वासन दिया।
अधिकारियों की लंबी समझाइश और सख्त कार्रवाई के भरोसे के बाद परिजन शाम को शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हुए। इसके बाद पुलिस की निगरानी में शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post Mortem Report) का इंतजार कर रही है, ताकि मौत के सटीक कारणों का वैज्ञानिक खुलासा हो सके।
विंध्य क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाएं और पुलिस गश्त पर उठते गंभीर सवाल
रीवा जिले के ग्रामीण अंचलों में लगातार हो रही मारपीट और मामूली विवादों में हत्या जैसी घटनाएं पुलिस की रात्रि गश्त व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्योटी नेहरू प्लांट और आसपास के क्षेत्रों में असमाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। यदि पुलिस प्रशासन समय रहते ऐसे उपद्रवियों पर नकेल कसे और गश्त बढ़ाए, तो संजय कोल जैसे बेगुनाह नवयुवकों की जान बचाई जा सकती है।