रीवा में 'शिक्षा' नहीं 'हवस' का कारोबार: गली-गली खुली स्कूलों का रिजल्ट रहा ZERO, मासूमों की सुरक्षा से खेल रहे 'हैवान' संचालक
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। हाल ही में घोषित हुए 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों ने एक कड़वी सच्चाई समाज के सामने रख दी है। जहाँ संसाधनों के अभाव में भी सरकारी स्कूलों के छात्रों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं, वहीं रीवा शहर के गली-गली में खुले निजी स्कूलों (Private Schools) का ग्राफ पूरी तरह 'जीरो' रहा है। ये स्कूल पढ़ाई में तो पीछे हैं ही, लेकिन फीस वसूलने और शर्मनाक वारदातों को अंजाम देने में सबसे आगे निकल गए हैं।
किराने की दुकान जैसे खुले स्कूल: आखिर मान्यता देता कौन है?
रीवा शहर के हर वार्ड और हर गली में कम से कम 4 से 5 स्कूल खुले हुए हैं। स्थिति यह है कि एक छोटे से मकान में बिना किसी खेल के मैदान, बिना हवादार कमरों और बिना योग्य शिक्षकों के "इंटरनेशनल" और "कॉन्वेंट" नाम लगाकर दुकानें चलाई जा रही हैं।
नियमों की धज्जियां: शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार स्कूल के लिए निश्चित जमीन, फायर सेफ्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है, लेकिन रीवा में 'ले-देकर' मान्यता प्राप्त करने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
पैरामाउन्ट स्कूल कांड: हवस का शिकार बनती मासूमियत
शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने का ताजा मामला रामसागर मोड़ स्थित पैरामाउन्ट स्कूल से सामने आया है। स्कूल के संचालक आनंद तिवारी पर कक्षा सातवीं की छात्रा के साथ जो घिनौनी हरकत करने के आरोप लगे हैं, उसने पूरे शहर को आंदोलित कर दिया है।
भक्षक बना रक्षक: यह केवल एक स्कूल की कहानी नहीं है। कई स्कूलों से महिला शिक्षिकाओं को अश्लील मैसेज भेजने और अभिभावकों से अभद्र व्यवहार करने की शिकायतें आती रहती हैं, लेकिन रसूख के दम पर मामला दबा दिया जाता है।
फीस की लूट और सुरक्षा का 'जीरो' स्तर
निजी स्कूलों का एकमात्र उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ 'पैसा' रह गया है।
किताबों का कमीशन: स्कूल संचालक निश्चित दुकानों से महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाते हैं।
भारी-भरकम फीस: पढ़ाई के नाम पर कुछ नहीं, लेकिन डेवलपमेंट फीस और अन्य मदों में अभिभावकों की जेब काटी जा रही है।
सुरक्षा नदारद: न सीसीटीवी कैमरे ठीक से काम करते हैं और न ही स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन होता है। इसी ढिलाई का फायदा आनंद तिवारी जैसे लोग उठाते हैं।
सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन (RTE Rules)
- शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) और म.प्र. निजी स्कूल विनियामक अधिनियम के तहत:
- स्कूल में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य है।
- शिकायत निवारण समिति का होना आवश्यक है।
बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार होने पर तत्काल मान्यता रद्द करने का प्रावधान है।
परंतु रीवा का शिक्षा विभाग आँखें मूंदे बैठा है, जिससे इन 'माफियाओं' के हौसले बुलंद हैं।
अब आर-पार की जंग जरूरी है
जब सरकारी स्कूल बेहतर परिणाम दे रहे हैं, तो अभिभावकों को इन 'दुकानों' में अपने बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दांव पर लगाने से बचना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि बिना मान्यता और बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे हर स्कूल पर तत्काल ताला जड़े और आनंद तिवारी जैसे आरोपियों को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बने।