साधु है या शूटर? रीवा के गुलाब नगर में सरेआम फायरिंग, वीडियो में चेहरा साफ फिर भी पुलिस ने दर्ज की 'अज्ञात' पर FIR! आखिर किसे बचा रही पुलिस?

 
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ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा के समान थाना क्षेत्र स्थित गुलाब नगर में 19 मार्च को चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर निकाली जा रही कलश यात्रा अचानक चीख-पुकार में बदल गई। भक्ति के माहौल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब यात्रा में शामिल एक तथाकथित साधु ने अपनी बंदूक से हर्ष फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में वीडियो कवर कर रहे कैमरामैन पवन सिंह के पैर में गोली लग गई। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना का स्पष्ट वीडियो सामने आने के बावजूद, पुलिस ने चार दिन बाद भी मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।

पहले वो 2 तस्वीरें देखिए… 

बाउंसर ने गन लोड कर हाथ में दी।

बाउंसर ने गन लोड कर हाथ में दी।

साधू ने हवा में फायर किया।

साधू ने हवा में फायर किया।

भगवा चोला और सफारी सूट वाले गनमैन: क्या यह सोची-समझी साजिश थी?
कलश यात्रा के दौरान के जो वीडियो सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। वीडियो में काला चश्मा लगाए, सफेद पगड़ी बांधे और भगवा कपड़े पहने एक शख्स साफ नजर आ रहा है, जिसे लोग 'साधु' बता रहे हैं। इस शख्स के साथ सफारी सूट पहने चार निजी सुरक्षाकर्मी (गनमैन) भी चल रहे थे।

वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि एक गनमैन बड़ी ही सहजता से बंदूक लोड करके साधु को थमाता है और साधु बिना किसी डर के हवा में फायरिंग करता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, साधु ने एक नहीं बल्कि कई राउंड फायर किए। इसी दौरान एक गोली सीधे शूटिंग कर रहे पवन सिंह के पैर में जा धंसी।

"पता होता कि वहां मौत का खेल होगा, तो कभी नहीं जाता" - पीड़ित पवन सिंह
अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराह रहे पवन सिंह ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "मैं तो सिर्फ अपना काम करने, यानी वीडियो शूटिंग के लिए वहां गया था। मुझे क्या पता था कि श्रद्धा की इस यात्रा में कुछ लोग मौत का सामान लेकर चल रहे हैं। अगर मुझे जरा भी अंदेशा होता कि वहां हर्ष फायरिंग जैसी अवैध हरकत होगी, तो मैं अपनी जान जोखिम में डालकर कभी वहां नहीं जाता।" पवन ने आगे कहा कि यह घटना इतनी डरावनी थी कि वह आज भी सदमे में हैं। उन्होंने मांग की है कि जब वीडियो में आरोपी का चेहरा साफ दिख रहा है, तो पुलिस उसे बचाने की कोशिश क्यों कर रही है?

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल: अज्ञात पर FIR क्यों?
इस पूरे मामले में रीवा पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लग रहे हैं। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक मुख्य आरोपी साधु की पहचान उजागर नहीं की है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करना तो दूर, मामले में 'अज्ञात' के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वीडियो में आरोपी और उसके गनमैन के चेहरे शीशे की तरह साफ हैं, तो पुलिस "अज्ञात" का सहारा लेकर किसे बचाने की कोशिश कर रही है? पुलिस ने पवन का कैमरा और मेमोरी कार्ड तो जब्त कर लिया है, लेकिन असली मुजरिम अब भी खुलेआम घूम रहा है।

सीएसपी राजीव पाठक का बयान: "फरियादी ने नहीं बताई पहचान"
जब इस मामले में सीएसपी राजीव पाठक से बात की गई, तो उनका तर्क थोड़ा अलग था। उन्होंने कहा, "फरियादी जब थाने आया था, तो उसने किसी भी पुरानी दुश्मनी या जानबूझकर किए गए हमले की बात नहीं कही थी। उसने केवल घटना की जानकारी दी थी और आरोपी की पहचान स्पष्ट नहीं की थी। हम अभी फुटेज के आधार पर जांच कर रहे हैं और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।"

हालांकि, सीएसपी के इस बयान से आम जनता संतुष्ट नहीं है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए केवल फरियादी द्वारा नाम बताना जरूरी है? क्या पुलिस अपने स्तर पर वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकती?

हर्ष फायरिंग: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रीवा में रसूखदार लोग कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ठेंगे पर रखते हैं। हर्ष फायरिंग पर कड़ा प्रतिबंध होने के बावजूद, सार्वजनिक यात्राओं में हथियारों का प्रदर्शन और फायरिंग करना प्रशासन की ढिलाई को दर्शाता है।

न्याय की उम्मीद में रीवा की जनता
रीवा की जनता अब यह देख रही है कि क्या पुलिस इस रसूखदार 'साधु' पर हाथ डालेगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। एक गरीब कैमरामैन जो अपनी रोजी-रोटी के लिए वहां गया था, आज अस्पताल में है। रीवा न्यूज़ मीडिया इस मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करता है।

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