रीवा का ये स्कूल या स्विमिंग पूल? हाथ में जूते लेकर क्लास जाने को मजबूर मासूम; कलेक्टर ने दिए कड़े निर्देश
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही व्यवस्थाओं की पोल खुलने लगी है। सोमवार सुबह से शुरू हुआ मानसूनी बारिश का सिलसिला मंगलवार देर रात तक रुक-रुक कर चलता रहा। इस अनवरत बारिश का सबसे गंभीर असर बुधवार को रीवा शहर के प्रतिष्ठित 'समान विद्यालय' में देखने को मिला। पूरा स्कूल परिसर देखते ही देखते एक विशाल तालाब में तब्दील हो गया।
ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद जैसे ही बच्चे उत्साह के साथ स्कूल पहुंचे, उन्हें पढ़ाई के बजाय जलभराव की इस भयानक स्थिति का सामना करना पड़ा। स्कूल के मैदान से लेकर कक्षाओं के प्रवेश द्वार तक केवल गंदा और बदबूदार पानी नजर आ रहा था। बरसाती पानी के साथ-साथ शहर की नालियों का ओवरफ्लो हुआ कचरा भी स्कूल कैंपस में तैरता दिखा। इस भयावह नजारे ने न केवल मासूम बच्चों को डरा दिया है, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता भी बढ़ा दी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि हर साल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा इन बच्चों को भुगतना पड़ता है।
विद्यार्थियों की आपबीती: 'हाथ में जूते लेकर जाना पड़ता है क्लास'
जलभराव के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। स्कूल परिसर में घुटनों तक भरे पानी के बीच से गुजरकर बच्चे कक्षाओं तक पहुंचने को मजबूर हैं।
छात्र आदित्य मिश्रा ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया:
"जब भी तेज बारिश होती है, हमारे स्कूल के मैदान में इतना पानी जमा हो जाता है कि अंदर जाना असंभव लगता है। हमें कई बार अपने जूते-चप्पल हाथों में उठाने पड़ते हैं और उसी गंदे पानी के बीच से पैदल चलकर क्लास में जाना पड़ता है। इससे हमारे कपड़े भी गंदे हो जाते हैं।"
वहीं, इसी विद्यालय की छात्रा साक्षी पटेल का कहना है:
"पानी के नीचे का फर्श दिखाई नहीं देता, जिससे पैर फिसलने और गिरने का डर हमेशा बना रहता है। कई बच्चे पहले भी यहां गिरकर चोटिल हो चुके हैं। हर साल वादे किए जाते हैं, लेकिन बारिश आते ही स्थिति जस की तस हो जाती है।"
शिक्षकों का भी मानना है कि इस तरह के माहौल में न तो बच्चे ध्यान लगाकर पढ़ पाते हैं और न ही शिक्षक सही ढंग से पढ़ा पाते हैं। चारों तरफ फैली गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों (जैसे डेंगू, मलेरिया) का खतरा भी मंडरा रहा है।
क्यों बना स्कूल तालाब? जानिए जलभराव का मुख्य कारण
समान विद्यालय परिसर में पिछले दो दशकों (20 साल) से यह समस्या बनी हुई है। स्थानीय निवासियों और जानकारों से बात करने पर इस जलभराव के पीछे एक बड़ी तकनीकी और ढांचागत चूक सामने आई है।
दोषपूर्ण सड़क निर्माण
रहवासियों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक विद्यालय के आसपास पानी की निकासी (Drainage System) काफी अच्छी थी। लेकिन विकास कार्यों के नाम पर स्कूल के ठीक सामने मुख्य सड़क को सीमेंट-कंक्रीट (CC Road) से पक्का कर दिया गया। इस निर्माण के दौरान सड़क की ऊंचाई को काफी बढ़ा दिया गया, जबकि स्कूल का कैंपस अपने पुराने स्तर पर ही नीचे रह गया।
मुख्य कारण:
ऊंची सड़कें और नीचा परिसर: सड़क ऊंची होने के कारण आसपास के पूरे इलाके का पानी ढलान पाकर सीधे स्कूल ग्राउंड में समा जाता है।
नालियों का उल्टा बहाव: सड़कों के किनारे बनी नालियां जाम हैं, जिससे नालियों का गंदा पानी भी बैक मारकर स्कूल के अंदर घुस जाता है।
निकासी का अभाव: स्कूल परिसर से पानी बाहर निकालने के लिए कोई बड़ा आउटलेट या ड्रेनेज चैनल नहीं बनाया गया है।
प्रशासन का रुख: कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के सख्त निर्देश
समान स्कूल में जलभराव और बच्चों को हो रही असुविधा का मामला जैसे ही रीवा के जिला कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत इस पर कड़ा रुख अपनाया। प्रशासन अब इस मामले में त्वरित कार्रवाई के मूड में दिख रहा है।
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने संबंधित नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत मौके पर जाकर निरीक्षण करें। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि:
तत्काल राहत: पंप लगाकर या वैकल्पिक माध्यमों से स्कूल परिसर में जमा पानी को तुरंत बाहर निकाला जाए।
स्थायी समाधान: इस २० साल पुरानी समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक ठोस तकनीकी प्रस्ताव (Technical Proposal) तैयार किया जाए।
शिक्षा को प्राथमिकता: किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
स्कूल में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कैसे करें?
यदि रीवा प्रशासन वाकई इस समस्या का परमानेंट इलाज चाहता है, तो उसे निम्नलिखित सुधारात्मक कदम उठाने होंगे:
कैंपस का समतलीकरण (Ground Leveling): स्कूल ग्राउंड की मिट्टी या कंक्रीट फिलिंग करके इसके स्तर को सामने वाली सड़क के बराबर या उससे ऊंचा करना होगा।
अंडरग्राउंड ड्रेनेज पाइपलाइन: स्कूल के भीतर से एक बड़ी कवर्ड नाली का निर्माण किया जाए, जो सीधे शहर के मुख्य नाले से जुड़ी हो।
वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम: परिसर के एक हिस्से में बड़ा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पिट बनाया जा सकता है, ताकि बरसात का पानी जमीन के अंदर चला जाए।