यूनिवर्सिटी है या मजाक? MBA टूरिज्म विभाग की महिला शिक्षक का कारनामा, APSU में एक रात पहले टाला एग्जाम, फिर परीक्षा से महज 2 घंटे पहले जारी किया 'ऑडियो समन'

 
nvbn

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा में स्थित अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) एक बार फिर अपनी चरमरा चुकी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया बल्कि उनके पूरे कॅरियर को दांव पर लगा दिया। परीक्षाओं के संचालन में हो रही लगातार देरी के बीच, इस नए घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

fghgh

रात में परीक्षा रद्द, दोपहर में ऑडियो से नया फरमान: क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद विश्वविद्यालय के एमबीए टूरिज्म (MBA Tourism) विभाग से जुड़ा है। परीक्षा के ठीक एक दिन पहले और फिर परीक्षा के दिन महज दो घंटे पहले जारी हुए दो विरोधाभासी (Contradictory) आदेशों ने परीक्षार्थियों के होश उड़ा दिए।

घटनाक्रम के अनुसार, 1 जुलाई की रात को छात्रों को आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सूचित किया गया कि उनकी अगले दो दिनों (2 और 3 जुलाई) की परीक्षाएं अपरिहार्य कारणों से स्थगित की जा रही हैं। इस मैसेज को पढ़कर छात्र निश्चिंत हो गए और अपनी अगली तैयारी या अन्य कामों में व्यस्त हो गए। कई छात्र तो शहर से बाहर भी चले गए। लेकिन असली झटका अगले दिन यानी 2 जुलाई की दोपहर को लगा, जब अचानक एक ऑडियो मैसेज जारी कर कहा गया कि परीक्षा अपने तय समय पर दोपहर 3 बजे से ही होगी।

एमबीए टूरिज्म विभाग की लापरवाही: व्हाट्सएप ग्रुप बना मुसीबत की वजह
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे असमंजस की सूत्रधार विभाग की महिला शिक्षिका निशा गुप्ता रहीं। उन्होंने ही 1 जुलाई की रात करीब 8:26 बजे व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज ड्रॉप किया था कि परीक्षाएं टाली जा रही हैं और नई तारीखों का एलान बाद में होगा। इसके बाद, अगले ही दिन दोपहर 12:44 बजे उन्हीं की तरफ से एक ऑडियो नोट जारी हुआ, जिसमें कहा गया:

"परीक्षा का टाइम टेबल ग्रुप में डाल दिया गया है। सभी छात्रों की परीक्षाएं आज दोपहर 3:00 बजे से ही आयोजित की जा रही हैं। सभी छात्र समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचें।"

इस तुगलकी फरमान को सुनते ही छात्रों में हड़कंप मच गया। परीक्षा शुरू होने में सवा दो घंटे से भी कम का समय बचा था। जो छात्र शहर में थे, वे किताबें छोड़कर बदहवास हालत में दौड़ते-भागते यूनिवर्सिटी पहुंचे। हालांकि, छात्रों ने किसी तरह परीक्षा तो दे दी, लेकिन गलत और भ्रामक मैसेजिंग के कारण वे न तो रिवीजन कर पाए और न ही मानसिक रूप से परीक्षा के लिए तैयार थे, जिससे उनका शैक्षणिक नुकसान होना तय है।

नए कुलपति प्रो. राजेंद्र कुड़रिया के कार्यकाल में बेपटरी हुईं व्यवस्थाएं
विश्वविद्यालय के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति और प्रशासनिक कमियों पर भी अब उंगलियां उठने लगी हैं। कैंपस में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि नए कुलपति प्रो. राजेंद्र कुड़रिया के कार्यभार संभालने के बाद से यूनिवर्सिटी का ढर्रा सुधरने के बजाय और ज्यादा बिगड़ गया है।

आरोप हैं कि वरिष्ठ प्राध्यापकों की अनदेखी कर जूनियर शिक्षकों को महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंप दी गई है। अनुभव की कमी के कारण ये जूनियर प्रभारी व्यवस्थाओं को संभाल नहीं पा रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा निर्दोष छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी में सत्र और परीक्षाएं पहले ही 7 से 8 महीने की देरी से चल रही हैं, ऊपर से इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना प्रबंधन कोढ़ में खाज का काम कर रहा है।

छात्र नेता अमन सिंह बघेल ने उठाई निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
इस गंभीर लापरवाही के सामने आने के बाद छात्र संगठन भी मुखर हो गए हैं। छात्र नेता अमन सिंह बघेल ने इस पूरे वाकये पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

अमन सिंह बघेल का कहना है कि सोशल मीडिया या व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह से आधिकारिक परीक्षाएं रद्द करना या अचानक शुरू करने का फरमान जारी करना पूरी तरह से अवैध और छात्र-विरोधी है। इससे छात्रों को न केवल मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है, बल्कि जो छात्र दूर-दराज के क्षेत्रों से आते हैं, उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। उन्होंने कुलपति से मांग की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों की जवाबदेही तय की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति (Repetition) न हो।

क्या डिजिटल मैसेजिंग के भरोसे चलेगा विश्वविद्यालय का सिस्टम?
APSU रीवा की यह घटना देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक चेतावनी है। क्या किसी विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षाओं जैसे संवेदनशील मामलों को व्हाट्सएप ग्रुप और पर्सनल ऑडियो मैसेज के भरोसे छोड़ा जा सकता है? किसी भी परीक्षा को टालने या पुनर्निर्धारित करने की एक तय वैधानिक प्रक्रिया होती है, जिसके तहत आधिकारिक अधिसूचना (Official Notification) वेबसाइट पर जारी की जानी चाहिए। रीवा विश्वविद्यालय को अपनी आंतरिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के साथ-साथ छात्रों के प्रति अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है, ताकि किसी का भविष्य इस तरह के 'शॉर्टकट' सिस्टम की भेंट न चढ़े।

Related Topics

Latest News