वैष्णो फ्रूट कंपनी का गुलाम हुआ जिम्मेदार प्रशासन ? संवेदनशील स्थान पर पुलिस का ध्यान नहीं..
मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्थानीय कानून व्यवस्था, नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में से एक, जयस्तंभ चौक पर संचालित 'वैष्णो फ्रूट कंपनी' पिछले कई वर्षों से लगातार वैधानिक नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही है। स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे साक्ष्यों के अनुसार, यह दुकान सिर्फ फल बेचने का केंद्र नहीं रह गई है, बल्कि इसके आस-पास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और अवैध गतिविधियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।
हैरानी की बात यह है कि तमाम शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बावजूद रीवा प्रशासन इस पर कोई कड़ी कार्रवाई करने से बच रहा है। जनता के मन में अब यह सवाल उठने लगा है कि वैष्णो फ्रूट कंपनी रीवा पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? क्या रसूखदार दुकान संचालक और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच कोई गुप्त साठगांठ चल रही है, जिसके कारण कानून के हाथ बंधे हुए हैं?
जब पुलिस ने खुद माना कि यहाँ होती हैं अवैध गतिविधियाँ
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सिविल लाइन थाना पुलिस ने खुद वैष्णो फ्रूट कंपनी को एक आधिकारिक नोटिस भेजा। इस नोटिस में पुलिस ने इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि इस दुकान और इसके आस-पास के क्षेत्र में देर रात तक असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है और अवैध गतिविधियां संचालित होती हैं।
थाना पुलिस के नोटिस का मुख्य अंश: जयस्तंभ चौक स्थित इस व्यावसायिक प्रतिष्ठान के कारण कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है। देर रात तक दुकान खुली रहने से अपराधियों और संदिग्ध चरित्र के लोगों को शह मिल रही है।
जब खुद कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस इस बात को लिखित रूप में मान रही है, तो फिर इस दुकान को सील करने या इसका लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? केवल एक नोटिस भेजकर औपचारिकता पूरी कर लेना प्रशासन की नीयत पर संदेह पैदा करता है। जनता पूछ रही है कि सिविल लाइन थाना पुलिस ने नोटिस में क्या कहा और उसके बाद भी इस दुकान को बंद करवाने में प्रशासन को आखिर क्या दिक्कत आ रही है?
फल की आड़ में नशे का काला कारोबार
जयस्तंभ चौक और उससे सटा हुआ कबाड़ी मोहल्ला पिछले कुछ समय से नशे के सौदागरों का गढ़ बनता जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि वैष्णो फ्रूट कंपनी के देर रात तक खुले रहने का सीधा फायदा इन नशे के कारोबारियों को मिल रहा है। फल बेचने की आड़ में यहाँ संदिग्ध लेन-देन और मादक पदार्थों की सप्लाई से जुड़े लोग सक्रिय रहते हैं। रात के समय यहाँ आने वाले असामाजिक तत्व न केवल खुद नशा करते हैं, बल्कि राहगीरों के लिए भी सिरदर्द बन चुके हैं।
फल की दुकान के आस-पास का यह पूरा माहौल अब आम परिवारों और महिलाओं के निकलने के लिए असुरक्षित हो चुका है। युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने वाले इस सिंडिकेट पर शिकंजा कसने के बजाय, प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। ऐसे में रीवा में नशे के कारोबार को कैसे रोकें, जब रसूखदारों को प्रशासन का ही परोक्ष या अपरोक्ष संरक्षण प्राप्त हो?
चौराहे पर अवैध कब्जा और देर रात तक गुंडागर्दी
वैष्णो फ्रूट कंपनी की मनमानी केवल अवैध गतिविधियों तक सीमित नहीं है। इस दुकान के संचालकों ने जयस्तंभ चौक जैसे महत्वपूर्ण चौराहे की मुख्य सड़क पर बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण कर रखा है। सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दुकान का सामान और गाड़ियाँ सड़क के एक बड़े हिस्से को घेरे रहती हैं।
इसके कारण निम्नलिखित समस्याएं रोज पैदा हो रही हैं:
- यातायात बाधित होना: व्यस्त चौराहा होने के कारण यहाँ दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
- आए दिन विवाद और लूटपाट: देर रात तक असामाजिक तत्वों के जुटने से राहगीरों के साथ गाली-गलौज, मारपीट और झपटमारी (लूटपाट) की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
- प्रशासनिक नाकामी की बानगी: इतनी बड़ी अव्यवस्था पर कार्रवाई के नाम पर प्रशासन सिर्फ रात 12:00 बजे आकर दुकान की लाइट बंद करवा देता है, जबकि दुकान के बाहर सड़क पर फैला अतिक्रमण और भीड़ जस की तस बनी रहती है।
यह अजीबोगरीब रवैया दिखाता है कि प्रशासन सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रहा है। जयस्तंभ चौक पर अवैध अतिक्रमण कैसे हटाएं और रीवा में देर रात तक दुकानें खुलने से क्या खतरा है, इन विषयों पर जिला प्रशासन का कोई स्पष्ट रोडमैप नजर नहीं आता।
हत्या, चोरी और डकैती का पुराना रिकॉर्ड; फिर क्यों सो रहा है प्रशासन?
वैष्णो फ्रूट कंपनी के इर्द-गिर्द का यह इलाका केवल यातायात और अतिक्रमण की समस्या से नहीं जूझ रहा, बल्कि यह एक बेहद संवेदनशील और सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक पॉइंट बन चुका है। अगर इस क्षेत्र का पुराना रिकॉर्ड उठाकर देखा जाए, तो यहाँ का इतिहास बेहद खौफनाक रहा है। यह पूरा बेल्ट आए दिन होने वाली गंभीर वारदातों, चोरी, डकैती और यहाँ तक कि हत्या जैसी जघन्य आपराधिक स्थितियों के लिए जाना जाता था।
इतने संवेदनशील और दागदार आपराधिक इतिहास वाले स्थान पर 24 घंटे दुकान का खुला रहना अपराधियों के हौसलों को हवा देने जैसा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर पृष्ठभूमि को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहा है। पुराने रिकॉर्ड को जानने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना सीधे तौर पर लापरवाही को दर्शाता है। जनता पूछ रही है कि रीवा पुलिस प्रशासन अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज क्यों कर रहा है और क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही पुलिस की नींद खुलेगी?
खबरें छापने वालों को धमकी, आखिर सच से क्यों डर रहा है प्रशासन?
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया को इस मामले में सच दिखाने की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। जब स्थानीय पत्रकारों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और प्रिंट मीडिया ने इस अवैध कारोबार और साठगांठ को उजागर करना शुरू किया, तो उन्हें सुधार के बजाय धमकियाँ मिलने लगीं।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस और प्रशासन इन भू-माफियाओं और अवैध कारोबारियों पर कार्रवाई करने के बजाय शांत बैठा है, जिससे अपराधियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को डराया और धमकाया जा रहा है ताकि इस मुद्दे को दबाया जा सके। यह सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है और यह साबित करता है कि वैष्णो फ्रूट कंपनी के तार ऊपर तक जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल रीवा का वीडियो क्या है और उसमें दिख रहे अतिक्रमण पर सवाल उठाने वालों का मुंह बंद करने की कोशिशें क्यों की जा रही हैं, यह अब जनता के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन चुका है।
नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत के बाद भी सन्नाटा क्यों?
इस पूरे अवैध अतिक्रमण और बाजार नियमों के उल्लंघन के खिलाफ स्थानीय जागरूक नागरिकों द्वारा रीवा नगर निगम आयुक्त को साक्ष्यों के साथ एक लिखित शिकायत सौंपी जा चुकी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि किस प्रकार सरकारी जमीन पर कब्जा करके यातायात को बाधित किया जा रहा है और व्यावसायिक नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
शिकायत के हफ्तों बीत जाने के बाद भी नगर निगम के अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने जयस्तंभ चौक का रुख नहीं किया। आम तौर पर छोटे-मोटे रेहड़ी-पटरी वालों पर डंडा चलाने वाला नगर निगम इस बड़ी फ्रूट कंपनी के सामने पूरी तरह लाचार नजर आ रहा है। नागरिकों का अब नगर निगम की स्वायत्तता से भरोसा उठता जा रहा है। जनता जानना चाहती है कि नगर निगम आयुक्त रीवा को शिकायत कैसे दर्ज करें जिसका कोई वास्तविक असर हो, और अवैध गतिविधियों के खिलाफ लिखित शिकायत कहाँ करें जहाँ बिना किसी डर के आम आदमी की सुनवाई हो सके?
रीवा की जनता अब मुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय से गुहार लगा रही है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि रीवा प्रशासन और भू-माफिया की साठगांठ की सच्चाई क्या है यह सामने आ सके और शहर की कानून व्यवस्था को दुरुस्त कैसे किया जाए रीवा में, इसका स्थायी समाधान निकाला जा सके।
सामाजिक संगठन ने संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली और नगर निगम व पुलिस द्वारा की जा रही टालमटोल से तंग आकर अब 'बारी समाज सेवा संगठन समिति' सामने आई है। संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर सीधे संभागायुक्त रीवा को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है।
बारी समाज सेवा संगठन का स्पष्ट आरोप: शहर में कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। किसी भी रसूखदार व्यक्ति या व्यापारी को नियमों से ऊपर रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वैष्णो फ्रूट कंपनी द्वारा की जा रही मनमानी से पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
संगठन ने केवल ज्ञापन सौंपने तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी है, बल्कि उन्होंने प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस दुकान के खिलाफ शीघ्र ही वैधानिक और सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन जनहित में एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होगा। अब जनता यह जानने को उत्सुक है कि बारी समाज सेवा संगठन ने क्या चेतावनी दी और क्या इसके बाद भी सोता हुआ प्रशासन जागेगा या फिर शहरवासियों को अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा?