रीवा में महज एक घंटे की बारिश ने नगर निगम की खोल दी पोल : नेहरू नगर, सिरमौर चौराहा जलमग्न, महापौर और कमिश्नर के दावों पर जनता ने उठाए गंभीर सवाल, स्थायी समाधान कब?

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। शनिवार की रात रीवा शहर के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी। महज़ एक घंटे की तेज़ बारिश ने रीवा नगर निगम के उन तमाम दावों को पानी-पानी कर दिया, जो मानसून से पहले बड़े जोर-शोर से किए गए थे। यह बारिश नहीं, बल्कि नगर निगम के भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता का कच्चा चिट्ठा था, जो सड़कों पर बह रहा था। शहर के पॉश इलाकों से लेकर पुराने रिहायशी इलाकों तक, हर जगह सिर्फ पानी ही पानी नज़र आया। 

राहगीरों और वाहन चालकों की बढ़ी मुश्किलें

राहगीरों और वाहन चालकों की बढ़ी मुश्किलें

इस एक घंटे की बारिश ने साबित कर दिया कि नगर निगम प्रशासन, चाहे वह निर्वाचित महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' हों या प्रशासनिक प्रमुख आयुक्त अक्षत जैन, दोनों ही मानसून की चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह विफल रहे हैं। जनता के टैक्स के पैसे से नाला सफाई के नाम पर जो करोड़ों रुपए फूके गए, उसकी हकीकत सड़कों पर घुटनों तक भरे गंदे पानी ने बयां कर दी। यह सीधे तौर पर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की लापरवाही का नतीजा है, जिसका खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

  • नेहरू नगर बना 'नरक नगर': नाली-सड़क एक बराबर, नगर निगम प्रशासन सोया रहा
  • नेहरू नगर रीवा में जलभराव का जिम्मेदार कौन? क्या महापौर देंगे जवाब?

बारिश का सबसे खौफनाक मंज़र नेहरू नगर क्षेत्र में देखने को मिला। यहाँ हालात इस कदर बिगड़ गए कि इसे 'नेहरू नगर' के बजाय 'नरक नगर' कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्षेत्र की नालियां पूरी तरह जाम थीं, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों पर उफन पड़ा। स्थिति यह थी कि सड़क और नाली के बीच का अंतर ही खत्म हो गया।

कई घरों में गंदा पानी घुस गया, जिससे लोगों का घरेलू सामान बर्बाद हो गया। स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उनका कहना है कि हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। "हम नगर निगम को टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में हमें गंदा पानी और बीमारियाँ मिलती हैं। मेयर साहब सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, अब जब हम मुसीबत में हैं, तो कोई देखने वाला नहीं है," एक आक्रोशित निवासी ने बताया।

तेज बारिश से सड़कों पर भरा पानी

तेज बारिश से सड़कों पर भरा पानी

नेहरू नगर की यह स्थिति नगर निगम के ड्रेनेज सिस्टम की पूरी तरह से विफलता को दर्शाती है। आखिर मानसून से पहले सफाई का दावा करने वाली टीमें कहाँ थीं? क्या केवल कागजों पर ही नालों की सफाई हुई थी? यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों और महापौर को देना होगा।

  • सिरमौर चौराहा से उपरहटी तक 'जलप्रलय': विकास के दावों पर फिरा पानी, जनता त्रस्त
  • क्या सिरमौर चौराहा और उपरहटी में जलभराव को रोक पाने में विफल रही नगर निगम?

आफत की यह बारिश सिर्फ नेहरू नगर तक सीमित नहीं थी। शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले सिरमौर चौराहा, उपरहटी और तरहटी जैसे प्रमुख इलाकों में भी 'जलप्रलय' जैसी स्थिति बन गई। सिरमौर चौराहा, जहाँ से शहर का अधिकांश ट्रैफिक गुज़रता है, पूरी तरह जलमग्न हो गया।

जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। दुपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान हुए, कई गाड़ियाँ पानी के बीच में ही बंद हो गईं, जिससे लोगों को धक्का मारकर अपनी गाड़ियाँ निकालनी पड़ीं। राहगीर घुटनों तक पानी में चलने को मजबूर थे। उपरहटी और तरहटी जैसे पुराने इलाकों में भी नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा था, जिससे पैदल निकलना भी दूभर हो गया।

यह स्थिति नगर निगम के उन दावों पर करारा तमाचा है, जिनमें कहा गया था कि इस बार शहर में कहीं भी जलभराव नहीं होने दिया जाएगा। विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जन प्रतिनिधियों को इन इलाकों का दौरा करना चाहिए और देखना चाहिए कि उनकी "स्मार्ट सिटी" की असलियत क्या है।

  • आखिर कहाँ गया नाला सफाई का बजट? महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' के वादों पर खड़े हुए गंभीर सवाल
  • रीवा महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' के 'जलभराव मुक्त शहर' के वादे की ज़मीनी हकीकत

बरसात से पहले, रीवा नगर निगम और विशेष रूप से महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' ने शहरवासियों को आश्वस्त किया था कि इस मानसून में जलभराव की समस्या नहीं होगी। बड़े पैमाने पर नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के दावे किए गए थे। लेकिन शनिवार की एक घंटे की बारिश ने इन दावों की कलई खोलकर रख दी।

जनता अब सीधे तौर पर महापौर से सवाल कर रही है:

  • नाला सफाई के नाम पर आवंटित करोड़ों रुपए का बजट आखिर कहाँ खर्च हुआ?
  • अगर नालों की सफाई हुई थी, तो महज एक घंटे की बारिश में शहर क्यों डूब गया?
  • क्या महापौर की "जलभराव मुक्त शहर" की योजना सिर्फ एक चुनावी शिगूफा थी?

महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' को इन सवालों का सीधा और ठोस जवाब देना होगा। जनता को खोखले आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर काम की ज़रूरत है। शहर का डूबना सीधे तौर पर उनके नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।

  • नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन की 'कागजी' सक्रियता: क्या केवल फोटो खिंचवाने से निकलेगा जलभराव का हल?
  • निगमायुक्त अक्षत जैन का एक्शन: वास्तविकता या केवल डैमेज कंट्रोल?

जलभराव की खबरें सोशल मीडिया और मीडिया में वायरल होने के बाद, नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया। निगमायुक्त अक्षत जैन ने आनन-फानन में निगम की टीमों को मैदानी मोर्चे पर उतारा। जेसेबी मशीनें और सफाई कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में भेजे गए ताकि जाम नालियों को खोला जा सके और पानी की निकासी कराई जा सके।

निगमायुक्त का दावा है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई। लेकिन सवाल यह उठता है कि नगर निगम प्रशासन "प्रिवेंटिव मेजर्स" (निवारक उपायों) के बजाय "रिएक्टिव मेजर्स" (प्रतिक्रियात्मक उपायों) पर क्यों निर्भर है? बारिश होने के बाद नालियां साफ़ करने का क्या औचित्य है, जब जनता पहले ही मुसीबत झेल चुकी हो?

निगमायुक्त अक्षत जैन की यह सक्रियता केवल डैमेज कंट्रोल की कोशिश नज़र आती है। नगर निगम का काम बारिश के बाद पानी निकालना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था करना है कि पानी जमा ही न हो। क्या आयुक्त महोदय मानसून से पहले की तैयारियों का भौतिक सत्यापन करने में विफल रहे? यह उनकी प्रशासनिक क्षमता पर एक बड़ा सवाल है।

  • जनता का फूटा गुस्सा: "टेक्स लेते हो पूरा, तो सुविधा क्यों अधूरी?", स्थायी समाधान की मांग
  • रीवा की जनता की मांग: जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कब?

शनिवार रात के घटनाक्रम के बाद रीवा की जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। नागरिक अब नगर निगम और जनप्रतिनिधियों को बख्शने के मूड में नहीं हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपनी भड़ास निकाल रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों को कोस रहे हैं।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि नगर निगम ड्रेनेज सिस्टम में सुधार के लिए तकनीकी सर्वे कराए और एक मास्टर प्लान तैयार करे। हर साल नाला सफाई के नाम पर होने वाली "खानापूर्ति" को बंद किया जाए। जनता का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

"हमें मेयर के भाषण नहीं, बल्कि साफ सड़कें चाहिए। हमें निगमायुक्त की फोटो नहीं, बल्कि काम चाहिए," एक जागरूक नागरिक ने कहा। जनता अब जवाबदेही तय करने और ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है।

खोखले दावों से इतर ठोस धरातलीय कार्य की दरकार
रीवा में शनिवार रात हुई बारिश ने यह साबित कर दिया है कि नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधि मानसून की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार नहीं थे। खोखले दावों और कागजी तैयारियों ने जनता को मुसीबत में डाल दिया है। महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' और निगमायुक्त अक्षत जैन को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और केवल फोटो खिंचवाने के बजाय धरातल पर उतरकर काम करना चाहिए।

यदि रीवा को सचमुच एक "स्मार्ट सिटी" बनाना है, तो सबसे पहले शहर के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे ड्रेनेज सिस्टम, को मजबूत करना होगा। अन्यथा, हर बारिश में रीवा इसी तरह डूबता रहेगा और जनता नगर निगम के भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता का शिकार बनती रहेगी। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार लोगों को उनके कृत्य (या अकृत्य) के लिए जवाबदेह ठहराया जाए।

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