"रिश्तेदारी या खुलेआम हिस्सेदारी? रीवा में विकास के नाम पर 'लोहा गायब' नाली निर्माण पर भारी घमासान, कमिश्नर तक पहुंची पार्षदों की जंग!"

 
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रीवा के नेहरू नगर में नाली निर्माण को लेकर दो पार्षद आमने-सामने। वार्ड 13 की पार्षद ने वार्ड 12 की पार्षद के प्रतिनिधि पर लगाया घटिया निर्माण का बड़ा आरोप।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा नगर निगम से एक बेहद हैरान करने वाला और प्रशासनिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाला मामला सामने आया है। नगर सरकार की परिषद की बैठकों में विकास कार्यों और गुणवत्ता का लंबा-चौड़ा भाषण देने वाले जनप्रतिनिधि खुद अपने स्वार्थों के चक्रव्यूह में घिरे नजर आ रहे हैं। ताजा विवाद शहर के नेहरू नगर यानी वार्ड क्रमांक 13 से उपजा है, जहां चल रहे एक सार्वजनिक निर्माण कार्य ने दो पार्षदों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।

दरअसल, नेहरू नगर में बनाई जा रही एक नाली के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह सवाल किसी आम नागरिक ने नहीं, बल्कि खुद उसी क्षेत्र की महिला पार्षद ने उठाए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के भीतर चल रहे ठेकेदारी के सिंडिकेट की कलई खुलकर सामने आ गई है। विरोध के इस स्वर के बाद अब निगम की राजनीति में एक बड़ा घमासान मचना पूरी तरह तय माना जा रहा है।

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नेहरू नगर में नाली निर्माण के दौरान किन तकनीकी नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं?
वार्ड क्रमांक 13 की जुझारू पार्षद नम्रता संजय सिंह ने मौके पर चल रहे काम का मुआयना करने के बाद ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए हैं। उनके आरोपों के मुताबिक, इस निर्माण कार्य का जिम्मा पड़ोसी वार्ड क्रमांक 12 की पार्षद ज्योति पटेल के प्रतिनिधि प्रदीप पटेल के पास है। आरोप है कि यह निर्माण कार्य स्वीकृत नियमों और वर्क आर्डर की शर्तों के पूरी तरह विपरीत किया जा रहा है।

पार्षद ने मौके की स्थिति बयां करते हुए बताया कि जिस नाली का निर्माण किया जा रहा है, उसमें पहले से भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था। बिना उस पानी की निकासी किए, उसी जलजमाव के ऊपर कंक्रीट का बेस डाला जा रहा था। तकनीकी रूप से ऐसे हालात में डाला गया सीमेंट और कंक्रीट का मिश्रण बह जाता है और निर्माण की मियाद चंद महीनों की भी नहीं रह जाती। इसके अलावा, एनआईटी (Notice Inviting Tender) के कड़े नियमों को ताक पर रखकर नाली की कंक्रीट की दीवारों में लोहे के सरियों का इस्तेमाल ही नहीं किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर जनता के पैसे की खुली लूट है।

रिश्तेदारी और हिस्सेदारी का कॉकटेल: रीवा नगर निगम का कड़वा सच
यह घटना रीवा नगर निगम के उस व्यापक ढर्रे को उजागर करती है, जहां अधिकांश वार्डों में विकास कार्यों की आड़ में भाई-भतीजावाद का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। शहर के भीतर यह बात किसी से छिपी नहीं है कि ज्यादातर पार्षदों के सगे-संबंधी और करीबी रिश्तेदार ही कागजों पर या परदे के पीछे ठेकेदारी का काम संभाल रहे हैं।

नियम यह बन चुका है कि पार्षद अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने ही वार्डों या पड़ोसी वार्डों में मोटी रकम के काम स्वीकृत करवाते हैं और फिर उनके अपने लोग ही उस निर्माण कार्य को अंजाम देते हैं। जहाँ सीधे तौर पर सगे संबंधियों को ठेका नहीं मिल पाता, वहाँ परदे के पीछे से 'हिस्सेदारी' तय कर ली जाती है। यही मुख्य वजह है कि शहर में बनने वाली सड़कें और नालियां पहली ही बारिश का दबाव भी नहीं झेल पातीं और भरभरा कर ढह जाती हैं।

वार्ड 13 की पार्षद ने नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय पर क्या गंभीर आरोप मढ़े हैं?
इस पूरे मामले में उस वक्त एक बड़ा राजनीतिक मोड़ आ गया जब पार्षद नम्रता संजय सिंह ने इस घटिया निर्माण के पीछे सीधे तौर पर सत्ता और संगठन के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के संरक्षण का दावा कर दिया। उन्होंने खुले शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति इस नाली का निर्माण कार्य करा रहा है, वह नगर निगम के वर्तमान अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय का अत्यंत करीबी और खास सिपहसालार है।

उनका आरोप है कि इसी ऊंचे राजनीतिक रसूख और अध्यक्ष की छत्रछाया होने के कारण ही ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं। ठेकेदार को इस बात का पूरा भरोसा है कि नियमों और शर्तों का सरेआम उल्लंघन करने के बावजूद उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यही कारण है कि बिना किसी डर के मानकों के विपरीत घटिया सामग्री का उपयोग कर नाली खड़ी की जा रही है।

निगम के इंजीनियरों और प्रशासनिक अधिकारियों की इस पूरे मामले पर क्या भूमिका है?
इस गंभीर अनियमितता की शिकायत समय रहते नगर निगम के मैदानी अमले से भी की गई थी। पीड़ित पार्षद के अनुसार, उन्होंने निर्माण कार्य की बेहद खराब गुणवत्ता के संबंध में नगर निगम के संबंधित सब इंजीनियर और एसडीओ कमलेश्वर सिंह को तुरंत फोन पर जानकारी दी थी। लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि इतनी बड़ी लापरवाही की सूचना के बाद भी मौके की हकीकत देखने या जांच पड़ताल करने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी घटना स्थल पर नहीं पहुंचा।

अधिकारियों की इस रहस्यमयी उदासीनता से तंग आकर वार्ड पार्षद नम्रता संजय सिंह ने सीधे नगर निगम कमिश्नर को पूरे मामले से अवगत कराया है। उन्होंने प्रशासनिक मुखिया को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अपने वार्ड के भीतर इस तरह की घटिया और भ्रष्टाचार से युक्त निर्माण गतिविधि को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी। यदि क्षेत्र में काम करना है, तो उसे पूरी तरह से शासकीय गाइडलाइंस और पारदर्शिता के दायरे में रहकर ही करना होगा, अन्यथा काम को बीच में ही रोक दिया जाएगा।

जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी पर कब लगेगा अंकुश?
रीवा नगर निगम का यह ताजा विवाद केवल एक नाली के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सड़ चुकी व्यवस्था का प्रतीक है जहां रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। जो जनप्रतिनिधि सदन में खड़े होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उनके ही सहयोगियों पर जब इस तरह के गंभीर आरोप लगते हैं, तो पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम कमिश्नर इस खुली चुनौती के बाद ठेकेदार और दोषी इंजीनियरों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं।

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