रीवा में हैवानियत की हदें पार : 25 दिन तक भटकती रही 82 साल की पीड़िता, क्या सो रही थी रीवा पुलिस? महिला थाने पहुँचने पर दर्ज हुआ केस
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने समाज और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ हम विकास की बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर एक 82 साल की आदिवासी बुजुर्ग महिला को न्याय पाने के लिए 25 दिनों तक भटकना पड़ा। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता के माथे पर कलंक है।
घटना का विवरण: रात के अंधेरे में हैवानियत की हदें पार
यह रूह कंपा देने वाली घटना 10 दिसंबर की है। सिरमौर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला उस वक्त घर में अकेली थी, जब उसके परिवार के अन्य सदस्य मजदूरी के काम से बाहर गए हुए थे। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले सुग्गा साकेत नामक युवक ने मौका पाकर घर में प्रवेश किया।
पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने पहले उनका गला दबाकर उन्हें जान से मारने की कोशिश की। गला दबने के कारण जब बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई, तो आरोपी ने उनके साथ दुष्कर्म किया और उन्हें मरणासन्न स्थिति में छोड़कर फरार हो गया। जब परिजनों ने घर लौटकर देखा, तो बुजुर्ग की हालत अत्यंत खराब थी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: 25 दिनों तक क्यों भटकती रही पीड़िता?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू स्थानीय पुलिस का ढुलमुल रवैया रहा। घटना के तुरंत बाद जब परिजन पीड़िता को लेकर सिरमौर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि पुलिस ने न तो मामले की एफआईआर (FIR) दर्ज की और न ही बुजुर्ग महिला का मेडिकल कराया गया।
एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ' और 'महिला सुरक्षा' के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ एक बेबस बुजुर्ग महिला न्याय के लिए एक थाने से दूसरे थाने के चक्कर काटती रही। 25 दिनों तक न्याय न मिलना पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
महिला थाने में सुनवाई और वरिष्ठ अधिकारियों का हस्तक्षेप
जब स्थानीय थाने से कोई मदद नहीं मिली, तो हार मानकर पीड़िता और उसके परिजन रविवार को रीवा जिला मुख्यालय स्थित महिला थाने पहुंचे। मामला जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आया, तब जाकर विभाग में हलचल शुरू हुई।
महिला थाना प्रभारी ने तत्परता दिखाते हुए मामले की गंभीरता को समझा और तुरंत जीरो पर एफआईआर दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया। पुलिस ने अब आरोपी सुग्गा साकेत के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी तलाश के लिए टीमें रवाना कर दी हैं।
समाज में बढ़ती असुरक्षा और बुजुर्गों की स्थिति
रीवा की यह घटना समाज के गिरते नैतिक स्तर का प्रमाण है। एक 82 साल की बुजुर्ग, जिसे समाज में दादी या नानी का सम्मान मिलना चाहिए, वह अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव में इस तरह की दरिंदगी का शिकार हुई। यह घटना बताती है कि अकेले रहने वाले बुजुर्ग अपराधी तत्वों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस की देरी अपराधियों के हौसले बुलंद करती है। यदि 10 दिसंबर को ही कार्रवाई हो जाती, तो शायद आरोपी अब तक सलाखों के पीछे होता।
अब तक क्या हुई कार्रवाई?
वर्तमान में, रीवा महिला पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिरमौर पुलिस के उस समय के ड्यूटी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है जिन्होंने रिपोर्ट लिखने से मना किया था। आरोपी सुग्गा साकेत फिलहाल फरार है, लेकिन पुलिस का दावा है कि उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
निष्कर्ष: कब थमेंगे ऐसे अपराध?
रीवा की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं। न्याय में देरी भी एक तरह का अन्याय ही है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए, बल्कि उन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई करे जिन्होंने एक पीड़ित बुजुर्ग को 25 दिनों तक न्याय से वंचित रखा।