सोलर पैनल की फाइल पास करने के नाम पर 40 हजार की घूस लेते जूनियर इंजीनियर गिरफ्तार, लोकायुक्त की बड़ी रेड
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। एक तरफ सरकार आम जनता को राहत देने के लिए हर घर पर सोलर पैनल लगाने और भारी सब्सिडी देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारी सरकार की इन योजनाओं को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला इंदौर से सामने आया है, जहां बिजली विभाग के एक जूनियर इंजीनियर (जेई) को लोकायुक्त की टीम ने 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। यह घूस सोलर पैनल की फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में मांगी गई थी।
होटल पर सोलर पैनल लगाने के एवज में मांगी थी मोटी रकम
मिली जानकारी के अनुसार, इंदौर के परदेशीपुरा निवासी शिवप्रकाश बसवाल पेशे से बिल्डर और होटल व्यवसायी हैं। उन्होंने अपनी एक होटल की इमारत पर सोलर पैनल लगवाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सुखलिया जोन में पदस्थ कनिष्ठ यंत्री (जेई) नमेश कुमार भोंडेकर ने इस फाइल को दबाकर रख लिया। फाइल को पास करने और आगे बढ़ाने के बदले में आरोपी जेई द्वारा 80,000 रुपए की मोटी रिश्वत मांगी जा रही थी।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल, रंगे हाथों दबोचा
परेशान होकर पीड़ित व्यवसायी ने 17 जुलाई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के निर्देश पर जब शिकायत की जांच की गई, तो घूस मांगे जाने की बात पूरी तरह सच साबित हुई।
इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से 18 जुलाई 2026 को लोकायुक्त इंस्पेक्टर सचिन पटेरिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 40,000 रुपए आरोपी जेई नमेश कुमार भोंडेकर को सहायक अभियंता कार्यालय के भीतर सौंपे, पहले से तैयार लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। लोकायुक्त ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
रीवा संभाग में भी आ चुका है ऐसा ही मामला
गौरतलब है कि बिजली विभाग में सोलर पैनल और एनओसी के नाम पर भ्रष्टाचार का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले रीवा संभाग के शहर उपसंभाग में भी लोकायुक्त ने एक जूनियर इंजीनियर (जेई) और उसके वेंडर को इसी तरह फाइल क्लीयरेंस के नाम पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप किया था। बिजली विभाग के इन भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से उपभोक्ता लगातार परेशान हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है।