'रेड मारेंगे और मामला सेट करेंगे': रीवा में बिजली विभाग के JE का वसूली कांड उजागर, लोकायुक्त के केस दर्ज करते ही मचा हड़कंप!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (MPEB) के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। चेकिंग और पेनल्टी के नाम पर आम उपभोक्ताओं से खुलेआम अवैध वसूली करने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। रीवा शहर संभाग में पदस्थ रहे कनिष्ठ अभियंता (JE) प्रदीप दुबे के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय हड़कंप मच गया है और आरोपी अधिकारी को शहर संभाग से हटाकर ग्रामीण क्षेत्र में भेज दिया गया है।

गड़रिया मोड़ का मामला: चेकिंग के नाम पर रेड और 'सेटिंग' का खेल
पूरा मामला रीवा शहर संभाग के गड़रिया मोड़ इलाके का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तत्कालीन प्रभारी कनिष्ठ अभियंता प्रदीप दुबे एक आउटसोर्स कर्मचारी को साथ लेकर एक उपभोक्ता के घर विद्युत कनेक्शन की जांच और रेड मारने पहुंचे थे। जांच के दौरान उपभोक्ता पर मामला बनाने का धौंस दिखाया गया और बाद में केस रफा-दफा करने के लिए रुपयों की मांग की गई।

हालांकि, इस बार दांव उल्टा पड़ गया। सजग उपभोक्ता ने वसूली और रिश्वत की सौदेबाजी का पूरा वाकया अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। इस पुख्ता डिजिटल साक्ष्य (वीडियो रिकॉर्डिंग) के आधार पर पीड़ित ने रीवा लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर मामले ने तूल पकड़ लिया।

लोकायुक्त ने दर्ज किया अपराध, धाराओं के तहत शिकंजा
शिकायत और प्रस्तुत प्रमाणों की सूक्ष्मता से जांच करने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी जेई के खिलाफ विधिक प्रक्रिया शुरू की। शुरुआती दौर में मामले को जीरो पर कायम (Crime No. 0/26) किया गया था, जिसके बाद जांच आगे बढ़ाते हुए विधिवत अपराध क्रमांक 119/2026 दर्ज कर लिया गया।

लोकायुक्त द्वारा यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन अधिनियम 2018) की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) के तहत की गई है। आरोपी प्रदीप दुबे का मूल पद परीक्षण सहायक है और वे शहर संभाग में कनिष्ठ अभियंता के चालू प्रभार में कार्यरत थे।

कुर्सी ही पड़ गई भारी: पहले किशोर त्रिपाठी और अब प्रदीप दुबे
रीवा बिजली विभाग के शहर संभाग में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व कार्यपालन अभियंता नरेंद्र मिश्रा के कार्यकाल के दौरान भी लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की थी। उस समय सोलर पैनल फाइलों के निपटारे के नाम पर दलाल के जरिए रिश्वत लेते हुए तत्कालीन जेई किशोर त्रिपाठी रंगे हाथों पकड़े गए थे।

किशोर त्रिपाठी पर गाज गिरने और उनका तबादला पश्चिम संभाग किए जाने के बाद उसी विवादित कुर्सी का प्रभार प्रदीप दुबे को सौंपा गया था। दुर्भाग्यवश, व्यवस्था में सुधार होने के बजाय पुराने ढर्रे पर ही काम चलता रहा और अब प्रदीप दुबे भी लोकायुक्त के शिकंजे में आ फंसे हैं।

शहर से सीधे गांव रवानगी, अधीक्षण अभियंता ने बदला प्रभार
लोकायुक्त पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक ने अधीक्षण अभियंता (SE) को पत्र लिखकर आरोपी अधिकारी को प्रभावित पद से तत्काल हटाने की सिफारिश की।

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए अधीक्षण अभियंता ने प्रदीप दुबे को शहर संभाग के महत्वपूर्ण प्रभार से मुक्त कर पश्चिम संभाग के ग्रामीण अंचल स्थित हिनौता वितरण केंद्र (Hinauta DC) स्थानांतरित कर दिया है। विभागीय गलियारों में अब पश्चिम संभाग को ऐसे विवादित और दागी अधिकारियों के लिए 'डंपिंग यार्ड' कहा जाने लगा है।

अन्य अधिकारी भी थे रडार पर, कार्यपालन अभियंता ने बदले फीडर
सूत्रों के मुताबिक, शहर संभाग में चल रहे इस वसूली तंत्र में सिर्फ एक जेई शामिल नहीं था, बल्कि कई अन्य एई (सहायक अभियंता) और जेई की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। लोकायुक्त की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अन्य अधिकारियों पर भी जांच की आंच पहुंचने की आशंका बन गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शहर संभाग के कार्यपालन अभियंता (DE) अभिषेक शुक्ला ने तत्काल कदम उठाते हुए कई कनिष्ठ अभियंताओं के फीडर और प्रभार में फेरबदल कर दिया है, ताकि विभागीय व्यवस्था पर उठ रहे सवालों पर पर्दा डाला जा सके।

आधिकारिक बयान
"प्रदीप दुबे के खिलाफ रिश्वत मांगने और अवैध वसूली से संबंधित शिकायत प्राप्त हुई थी। जांच और साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और अग्रिम वैधानिक जांच जारी है।"

— योगेश्वर शर्मा, पुलिस अधीक्षक (लोकायुक्त), रीवा

"मुझे इस बात की आधिकारिक जानकारी नहीं है कि किस मामले में प्रकरण दर्ज हुआ है। लोकायुक्त कार्यालय से अभी तक मुझे कोई औपचारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है।"

— प्रदीप दुबे, आरोपी जेई (वर्तमान पदस्थापना हिनौता DC)

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