आज से माघ मेला शुरू: रीवा-प्रयागराज हाईवे पर बढ़ा ट्रैफिक का दबाव, 6 प्रमुख स्नानों के लिए चक्रव्यूह तैयार, जाम से बचने के लिए ये रही नई गाइडलाइन
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) आज 3 जनवरी 2026, शनिवार को पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम नगरी प्रयागराज में माघ मेले का आधिकारिक आगाज हो गया है। कड़ाके की ठंड के बावजूद देश के कोने-कोने से श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाने पहुँच रहे हैं। अगले 44 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक समागम में करोड़ों की संख्या में कल्पवासी और तीर्थयात्री जुटेंगे।

रीवा जिला भौगोलिक दृष्टि से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। पिछले महाकुंभ के रिकॉर्ड को देखते हुए, इस साल माघ मेले में लगभग 2 करोड़ श्रद्धालुओं के रीवा के रास्ते प्रयागराज पहुँचने की संभावना जताई गई है। मेले के पहले ही दिन से रीवा-प्रयागराज हाईवे (NH-30) पर वाहनों का रेला देखा जा रहा है। विशेष रूप से चाकघाट और हनुमना बॉर्डर पर प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात किया है।
माघ मेले के 6 प्रमुख स्नान पर्व और तिथियां
मेले के दौरान 6 विशेष तिथियां ऐसी होंगी, जब श्रद्धालुओं की संख्या अपने चरम पर होगी। प्रशासन ने इन दिनों के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार किया है:
- 3 जनवरी 2026: पौष पूर्णिमा (आज से मेले की शुरुआत)
- 15 जनवरी 2026: मकर संक्रांति (सूर्य का उत्तरायण प्रवेश)
- 18 जनवरी 2026: मौनी अमावस्या (मेले का सबसे बड़ा स्नान दिन)
- 23 जनवरी 2026: बसंत पंचमी (ज्ञान और आस्था का पर्व)
- 1 फरवरी 2026: माघी पूर्णिमा (कल्पवास की पूर्णता)
- 15 फरवरी 2026: महाशिवरात्रि (मेले का अंतिम आधिकारिक स्नान)
जाम से मुक्ति के लिए प्रशासन का 'जीरो टॉलरेंस' प्लान
पिछले वर्षों के कड़वे अनुभवों से सीखते हुए इस बार रीवा और प्रयागराज प्रशासन ने तालमेल बिठाया है। हाईवे पर कई किलोमीटर तक लगने वाले जाम को रोकने के लिए 'होल्डिंग पॉइंट्स' बनाए गए हैं। इसका मतलब है कि यदि प्रयागराज शहर में भीड़ अधिक होगी, तो वाहनों को रीवा जिले के सोहागी पहाड़ या चाकघाट के पास सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया जाएगा। भारी वाहनों और ट्रकों के लिए डायवर्जन प्लान लागू किया गया है ताकि श्रद्धालुओं की कारों और बसों को रास्ता मिल सके।
विंध्य क्षेत्र में पर्यटन का संगम: तीर्थयात्रियों का स्वागत
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग इस बार केवल मार्ग ही उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि श्रद्धालुओं को विंध्य की संस्कृति से जोड़ने का प्रयास भी कर रहा है। विभाग के अनुसार, जो भक्त दक्षिण भारत या मध्य भारत से आ रहे हैं, वे रीवा में रुककर यहाँ के प्रसिद्ध महामृत्युंजय मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, चित्रकूट की मंदाकिनी और मैहर की मां शारदा का आशीर्वाद लेकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और भी समृद्ध बना सकते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं
रीवा संभाग में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। मुख्य चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। हाईवे पर श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई चिकित्सा केंद्र, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी यात्रा को सुगम बनाने के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करें और संदिग्ध वस्तुओं की सूचना तुरंत पास के पुलिस बूथ पर दें।