"विधायक मांगते हैं पैसे!" मनगवां अध्यक्ष के पत्र ने भोपाल तक हिलाया भाजपा संगठन, जानें पूरी सच्चाई
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले की मनगवां नगर परिषद इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई है। आमतौर पर विकास कार्यों के लिए चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज अपनी ही पार्टी के दो दिग्गजों के बीच छिड़ी जुबानी और कागजी जंग के कारण सुर्खियों में है। नगर परिषद की अध्यक्ष बुटला कमलेश बंसल ने अपनी ही पार्टी के विधायक नरेंद्र प्रजापति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

हाल ही में एक गोपनीय पत्र सार्वजनिक हुआ है, जिसने भोपाल से लेकर रीवा तक हलचल मचा दी है। यह पत्र मनगवां नगर परिषद की अध्यक्ष बुटला कमलेश बंसल द्वारा भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री को लिखा गया है। पत्र में अध्यक्ष ने विधायक नरेंद्र प्रजापति पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं:
- विधानसभा प्रश्नों का दुरुपयोग: अध्यक्ष का आरोप है कि विधायक जानबूझकर परिषद के कार्यों में बाधा डालने के लिए विधानसभा सत्र के दौरान प्रश्न लगाते हैं। विशेष रूप से प्रश्न क्रमांक 1163, 743 और 3009 का उल्लेख करते हुए इसे 'राजनीतिक दबाव' बताया गया है।
- आर्थिक अवैध मांग: पत्र में सीधा आरोप लगाया गया है कि विधायक द्वारा बार-बार पैसों की मांग की जाती है और मांग पूरी न होने पर उच्च स्तर पर शिकायतें की जाती हैं।
- दलित महिला का अपमान: अध्यक्ष ने यह भी कहा कि वह एक अनुसूचित जाति वर्ग की महिला हैं और उन्हें इस प्रकार प्रताड़ित करना सामाजिक और राजनीतिक रूप से गलत है।
विधायक नरेंद्र प्रजापति का पलटवार: क्या भ्रष्टाचार छिपाने के लिए लगाए जा रहे हैं आरोप?
जब इस वायरल पत्र के संबंध में विधायक नरेंद्र प्रजापति से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इन सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज कर दिया। विधायक का पक्ष भी काफी मजबूत नजर आता है, उनका कहना है:
"मैं जनता का प्रतिनिधि हूँ और मेरा कर्तव्य है कि सरकारी पैसे का सही उपयोग हो। वर्ष 2018 से 2026 के बीच मनगवां नगर परिषद में जितने भी निर्माण कार्य हुए हैं, उनमें भारी अनियमितता की शिकायतें मिल रही थीं। मैंने केवल उन कार्यों की जांच की मांग की है। जांच के डर से ही अध्यक्ष इस तरह के अनर्गल आरोप लगा रही हैं।"
विधायक ने स्पष्ट किया कि विधानसभा में प्रश्न लगाना उनका संवैधानिक अधिकार है और वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
भाजपा के अंदरूनी कलह का क्या होगा असर और पार्टी नेतृत्व इस पर क्या करेगा?
मनगवां में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत रही है। परिषद में भाजपा का बहुमत है, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित 8 पार्षद भाजपा के ही हैं। ऐसे में विधायक और अध्यक्ष के बीच का यह टकराव आगामी चुनावों और पार्टी की छवि के लिए घातक हो सकता है।
संगठन की जांच: अध्यक्ष ने मांग की है कि प्रदेश संगठन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए।
कार्यकर्ताओं में निराशा: शीर्ष नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाजी से निचले स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है।
विपक्ष को मौका: भाजपा की इस आपसी गुटबाजी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।