कलेक्टर का कड़ा एक्शन : कहीं आप भी तो नहीं पी रहे ज़हर? मऊगंज में बिना लाइसेंस चल रही पानी की फैक्ट्रियां बंद

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, पानी की किल्लत और शुद्ध पेयजल की मांग दोनों ही चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। भीषण गर्मी के बीच जनता को दूषित पानी से बचाने के लिए कलेक्ट्रेट संजय कुमार जैन ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। राजस्व और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीमों को मैदान में उतारा गया है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी की शुद्धता की बारीकी से जांच कर रही हैं।

बोरवेल की समस्या? न्यूट्रॉन 40kg केसिंग पाइप है बेहतर विकल्प 
अक्सर देखा जाता है कि लोग बोरवेल करवाते समय कम कीमत के चक्कर में 30 किलो वाले हल्के और लोकल पाइपों का इस्तेमाल करते हैं। ये पाइप जमीन के दबाव को नहीं झेल पाते और बार-बार टूट जाते हैं, जिससे किसानों और आम लोगों का हजारों का नुकसान होता है। प्रशासन अब न्यूट्रॉन 40 किलोग्राम क्षमता वाले बोरवेल केसिंग पाइप के उपयोग को लेकर जागरूकता फैला रहा है।

  • अत्यधिक मजबूती: यह पाइप एक्स्ट्रा थिकनेस के साथ आता है।
  • लंबी उम्र: लोकल पाइप की तुलना में इसकी लाइफ कई गुना अधिक है।
  • किफायती: बार-बार टूटने और मरम्मत के झंझट से मुक्ति मिलती है।

अवैध वाटर प्लांटों का भंडाफोड़: खटखरी में प्रशासन का छापा
जिले में बिना किसी वैध दस्तावेज के संचालित हो रहे वाटर प्लांटों के खिलाफ शनिवार को बड़ी कार्रवाई की गई। डिप्टी कलेक्टर पवन गौरैया के नेतृत्व में खटखरी क्षेत्र में एक बिना नाम वाली पैकेज्ड ड्रिंक वाटर यूनिट पर छापा मारा गया। मौके पर न तो कोई बोर्ड मिला और न ही फैक्ट्री संचालन के जरूरी कागजात। प्रशासन ने इस यूनिट को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया है। इस कार्रवाई से इलाके के अन्य अवैध संचालकों में हड़कंप मच गया है।

केके इंडस्ट्रीज में मानकों की अनदेखी: हिमालय ब्रांड यूनिट बंद 
जांच के दौरान केके इंडस्ट्रीज (हिमालय ब्रांड) की यूनिट में भारी अनियमितताएं पाई गईं। टीम को वहां न तो लैब की सुविधा मिली और न ही पानी की गुणवत्ता जांचने वाली टीडीएस रिपोर्ट। अधिकारियों ने पाया कि यहाँ स्वच्छता के मानकों को ताक पर रखकर पानी की बॉटलिंग की जा रही थी।

  • लाइसेंस का अभाव।
  • वाटर टेस्टिंग रिपोर्ट न होना।

वर्करों के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट की अनुपलब्धता।
इन गंभीर कमियों के चलते प्लांट का उत्पादन तत्काल रुकवा दिया गया और उसे सरकारी मुहर लगाकर बंद कर दिया गया।

जल गुणवत्ता के लिए नए दिशा-निर्देश: टीडीएस और स्वच्छता अनिवार्य 
प्रशासन ने सभी वाटर प्लांट संचालकों को कड़ी चेतावनी जारी की है। अब हर यूनिट को TDS (Total Dissolved Solids) की नियमित जांच करानी होगी। इसके अलावा, यूनिट परिसर में स्वच्छता, आरओ सिस्टम की उचित देखरेख और कर्मचारियों का मेडिकल चेकअप अनिवार्य कर दिया गया है। जो भी संचालक इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उस पर कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

गर्मी से राहत: ले वाटर पार्क बना पसंदीदा डेस्टिनेशन 
एक तरफ प्रशासन पेयजल को लेकर सख्त है, तो दूसरी तरफ जनता के मनोरंजन का भी ध्यान रखा जा रहा है। मऊगंज और आसपास के लोगों के लिए ले वाटर पार्क (Lay Water Park) एक शानदार विकल्प बनकर उभरा है।

  • स्थान: रेवा एयरपोर्ट के पास, गुरुकुल स्कूल के सामने (शहर से मात्र 7 किमी)।
  • फीस: मात्र ₹250 में दिनभर का आनंद।
  • खासियत: सुरक्षित वातावरण और किफायती टिकट दरें इसे परिवार के साथ घूमने के लिए बेस्ट बनाती हैं।

मऊगंज जिले में इस समय प्रशासन का दोहरा रुख देखने को मिल रहा है—जहाँ एक ओर अवैध व्यापार और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे (जैसे न्यूट्रॉन पाइप) और जन-सुविधाओं (जैसे वाटर पार्क) को प्रोत्साहित किया जा रहा है। शुद्ध पानी हर नागरिक का अधिकार है, और प्रशासन की यह सक्रियता एक स्वस्थ समाज की दिशा में बड़ा कदम है।

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