केंद्र के पैसों का 'गलत इस्तेमाल'? क्रिटिकल केयर के फंड से बना डाला कैंसर अस्पताल, अब NHM ने रोके 8 करोड़!

 
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रीवा मेडिकल कॉलेज के कैंसर अस्पताल का बजट खत्म, एनएचएम से नहीं मिले 8 करोड़ रुपये, क्रिटिकल केयर फंड डायवर्जन के बाद निर्माण कार्य बंद होने की कगार पर।

विंध्य अंचल के कैंसर मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज की सुविधा मुहैया कराने का दावा अब प्रशासनिक और वित्तीय विसंगतियों के दलदल में फँसता नजर आ रहा है। रीवा स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज (SSMC) परिसर में निर्माणाधीन 100 बेड वाले सुपर स्पेशलिटी कैंसर अस्पताल का काम बजट समाप्त होने के कारण पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुँच गया है।

निर्माण एजेंसी मध्य प्रदेश बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPBDC) को आबंटित किया गया 12 करोड़ रुपये का शुरुआती फंड पूरी तरह खत्म हो चुका है। शेष कार्यों को पूरा करने के लिए एजेंसी द्वारा शासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) से 8 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट की माँग की गई थी। मार्च महीने में ही आधिकारिक पत्राचार और बैठकों के बावजूद यह फंड स्वीकृत नहीं हो सका है, जिसके चलते प्रोजेक्ट का भविष्य अधर में लटक गया है।

क्रिटिकल केयर यूनिट के बजट से कैंसर अस्पताल: फंड के फेरबदल का सच
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि केंद्र सरकार द्वारा स्वास्थ्य ढाँचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जो वित्तीय सहायता भेजी गई थी, उसका उपयोग निर्धारित मद के बजाय दूसरी जगह कर दिया गया।

  • मूल आवंटन: केंद्र सरकार ने रीवा मेडिकल कॉलेज परिसर में एक अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट (Critical Care Unit - CCU) स्थापित करने के लिए 12 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे।
  • फंड डायवर्जन का आरोप: चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रबंधन ने रणनीतिक चूक करते हुए इस राशि का उपयोग जी+3 (G+3 Floor) मंजिला कैंसर अस्पताल की नींव रखने और ढाँचा खड़ा करने में कर दिया।
  • एनएचएम का सख्त रुख: सूत्रों के अनुसार, जिस मद के लिए बजट मंजूर हुआ था, उसका उपयोग अन्य निर्माण में किए जाने की वजह से अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) अतिरिक्त 8 करोड़ रुपये की राशि जारी करने में तकनीकी और वित्तीय हिचकिचाहट दिखा रहा है।

12 करोड़ स्वाहा, 8 करोड़ की नई माँग: एमपीबीडीसी और एनएचएम के बीच पेंच
अस्पताल की शुरुआती निर्माण लागत 11 करोड़ 80 लाख रुपये आंकी गई थी। हालाँकि, निर्माण प्रक्रिया के दौरान बंकर, विशेष सुरक्षा दीवारों और एयर-कंडीशनिंग डक्टिंग जैसे कई तकनीकी संशोधनों के जुड़ने से लागत में अचानक बढ़ोतरी हो गई।

  • शुरुआती चेतावनी: एमपीबीडीसी के अधिकारियों ने कार्य की शुरुआत में ही एनएचएम की तत्कालीन निदेशक को अवगत करा दिया था कि संशोधित प्लान के हिसाब से स्वीकृत राशि नाकाफी साबित होगी।
  • प्रशासनिक आश्वासन: उस समय अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि उपलब्ध 12 करोड़ रुपये को पहले निर्माण में व्यय किया जाए, जिसके बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) के आधार पर अतिरिक्त राशि जारी कर दी जाएगी।
  • वर्तमान गतिरोध: अब जबकि पूरी राशि खर्च हो चुकी है, मार्च से भेजी गई 8 करोड़ की फाइल मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव (ACS) स्तर की बैठकों के चक्कर काट रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर फंड आबंटित नहीं हुआ है।

कैंसर अस्पताल में कौन-कौन से तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य हैं अभी अधूरे?
वर्तमान में कैंसर अस्पताल केवल कंक्रीट और ईंटों का एक ढाँचा मात्र बनकर रह गया है। फिनिशिंग और अति-आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का काम अधर में लटका हुआ है:

  • इलेक्ट्रिकल एवं पावर बैकअप: अस्पताल में 150 से 180 KVA क्षमता का समर्पित डीजी (DG) सेट बैकअप, यूपीएस रूम (UPS Room), ट्रेंच पिट्स और संपूर्ण आंतरिक वायरिंग का काम अधूरा है।
  • एचवीएसी और चिलर सिस्टम: कैंसर केयर में तापमान नियंत्रण बेहद संवेदनशील होता है। इसके लिए चिलर इंस्टॉलेशन स्पेस, कोर कट्स और पाइपिंग का काम रुक गया है।
  • रेडिएशन बंकर और फिनिशिंग: कैंसर की सबसे महँगी मशीनों को स्थापित करने वाले विशेष बंकर की सिविल फिनिशिंग, कोर कट्स (Dosemetry Core Cuts), टाइलिंग, पुट्टी और पेंटिंग का काम पूरी तरह से ठप है।
  • फायर फाइटिंग सिस्टम: अग्नि सुरक्षा प्रणाली के तहत पाइपलाइन बिछा दी गई है, लेकिन मुख्य पंप और कंट्रोल पैनल असेंबल होना बाकी है।

31 करोड़ की लीनेक (LINAC) मशीन और सीमेंस कंपनी की सख्त शर्तें
कैंसर अस्पताल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रेडिएशन थेरेपी के लिए इस्तेमाल होने वाली 31 करोड़ रुपये की लीनियर एक्सीलेटर (LINAC) मशीन है। इसके अलावा अस्पताल में ब्रैकीथेरेपी (Brachytherapy) मशीन और अन्य अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण भी स्थापित किए जाने हैं।

मशीन की आपूर्तिकर्ता कंपनी सीमेंस हेल्थिनियर्स (Siemens Healthineers) के इंजीनियरों ने हाल ही में साइट का बारीकी से तकनीकी निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद कंपनी ने निर्माण एजेंसी और स्वास्थ्य विभाग के सामने कुछ अनिवार्य शर्तें रखी हैं:

  • डस्ट-फ्री बंकर: संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और लेज़र अलाइनमेंट के लिए बंकर को पूरी तरह से धूल-मुक्त (Dust-Free) वातावरण में तब्दील करना अनिवार्य है।
  • पावर स्टेबिलिटी: मशीन के परीक्षण और असेंबलिंग के लिए बिना किसी रुकावट के उच्च क्षमता वाले बिजली बैकअप की माँग की गई है।
  • 15 अगस्त की डेडलाइन: कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 अगस्त तक बंकर डस्ट-फ्री करके हैंडओवर कर दिया जाता है, तभी मशीन इंस्टॉलेशन शुरू हो पाएगा। इंस्टॉलेशन और कैलिब्रेशन की इस जटिल प्रक्रिया में कम से कम 2 से 3 महीने का समय लगेगा।

डिप्टी सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर असर और विंध्य के मरीजों की बढ़ी चिंताएँ
रीवा से प्रतिनिधित्व करने वाले मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) और स्वास्थ्य मंत्री के लिए यह कैंसर अस्पताल एक प्रमुख ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। पूर्व में इस अस्पताल का निर्माण जुलाई-अगस्त तक पूर्ण कर लोकार्पण करने का लक्ष्य रखा गया था।

हालाँकि, प्रशासनिक तालमेल की कमी और बजट संकट के कारण अब यह तय माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट अगले वर्ष (2027) से पहले चालू नहीं हो पाएगा। यदि बजट जारी भी कर दिया जाता है, तो निर्माण एजेंसी को अवशेष कार्य निपटाने में कम से कम 6 महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। इस प्रशासनिक देरी का सीधा नुकसान विंध्य क्षेत्र के हजारों गरीब कैंसर मरीजों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें मजबूरन नागपुर, जबलपुर या भोपाल जाकर महँगा इलाज कराना पड़ रहा है।

अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों का आधिकारिक पक्ष
डॉ. अजीत मार्को (सह प्राध्यापक, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज, रीवा):
"बजट को लेकर कुछ तकनीकी अड़चनें आई हैं। निर्माण एजेंसी ने शासन को पूरक बजट का प्रस्ताव भेज दिया है। मुख्य भवन का सिविल स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है, लेकिन फिनिशिंग और विशेष फिटिंग्स के लिए बजट कम पड़ रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही फंड स्वीकृत हो जाएगा।"

आदर्श प्रताप सिंह (प्रोजेक्ट मैनेजर, MPBDC रीवा):
"हमें जो 12 करोड़ का बजट प्राप्त हुआ था, वह पूरा निर्माण कार्य में उपयोग किया जा चुका है। 8 करोड़ रुपये की अतिरिक्त माँग मार्च महीने में ही भेजी जा चुकी है। बजट आते ही बाकी बचे हुए काम शुरू कर दिए जाएँगे। जहाँ तक बंकर का सवाल है, उसे डस्ट-फ्री बनाकर कंपनी को समय पर हैंडओवर कर दिया जाएगा ताकि मशीन इंस्टॉलेशन में कोई रुकावट न आए।"

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