हाईकोर्ट का 'स्टे' फेल, रसूख के बाद भी भोपाल रवानगी तय! रीवा शिक्षा विभाग में 'दीक्षित युग' का अंत! शिकायतों की फाइल खुली तो आयुक्त ने किया भोपाल अटैच 

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर रीवा संभाग से आ रही है। लंबे समय से विवादों और चर्चाओं में रहे प्रभारी संयुक्त संचालक (JD) नीरव दीक्षित को आखिरकार रीवा से विदा कर दिया गया है। लोक शिक्षण आयुक्त ने तमाम कानूनी अड़चनों को दरकिनार करते हुए उन्हें भोपाल मुख्यालय में पदस्थ करने का अंतिम फैसला सुना दिया है।

हाईकोर्ट का स्टे भी नहीं आया काम: क्या है पूरा मामला?
बता दें कि नीरव दीक्षित, जो मूल रूप से उप संचालक के पद पर हैं, रीवा संभाग में प्रभारी संयुक्त संचालक का दायित्व संभाल रहे थे। 17 जून 2025 को शासन ने उनका स्थानांतरण भोपाल कर दिया था। इस आदेश के विरुद्ध दीक्षित ने उच्च न्यायालय, जबलपुर की शरण ली थी। याचिका क्रमांक 22166/2025 पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें अस्थायी राहत (स्टे) दी थी, जिसके भरोसे वे अब तक रीवा में डटे हुए थे।

लोक शिक्षण आयुक्त का कड़ा रुख: आखिर क्यों हुई भोपाल रवानगी?
कानूनी दांव-पेंच के बावजूद, लोक शिक्षण आयुक्त ने प्रशासनिक आवश्यकताओं और शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण का विस्तृत निराकरण किया। शासन के आदेश दिनांक 12 जनवरी 2026 को प्रभावी रूप से लागू करते हुए, आयुक्त ने नीरव दीक्षित को तत्काल प्रभाव से रीवा कार्यालय से कार्यमुक्त करने और भोपाल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

विवादों से पुराना नाता: शिकायतों के घेरे में नीरव दीक्षित
आदेश की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें दर्ज की गई टिप्पणी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि नीरव दीक्षित की अधिकांश पदस्थापनाएँ रीवा और उसके आसपास के जिलों में ही रही हैं। इस दौरान उनके कार्यकाल को लेकर कई गंभीर शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई थीं। लगातार शिकायतों और एक ही क्षेत्र में लंबे समय तक जमे रहने के कारण प्रशासन ने उनका तबादला अनिवार्य समझा।

स्थानांतरण की टाइमलाइन: जून 2025 से जनवरी 2026 तक का घटनाक्रम

  • 17 जून 2025: शासन द्वारा भोपाल स्थानांतरण का पहला आदेश जारी।
  • जुलाई 2025: हाईकोर्ट में याचिका दायर, स्थानांतरण पर अस्थायी रोक (स्टे) मिली।
  • दिसंबर 2025: विभागीय समीक्षा और शिकायतों पर मंथन।
  • 12 जनवरी 2026: लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा स्थगन के बावजूद पदस्थापना का अंतिम आदेश।
  • जनवरी 2026 (वर्तमान): रीवा कार्यालय से कार्यमुक्ति की तैयारी।

रीवा संभाग में असर: शिक्षा विभाग को मिलेगा नया नेतृत्व
नीरव दीक्षित की रवानगी के साथ ही रीवा संभाग के लोक शिक्षण कार्यालय में पिछले कई महीनों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होने की उम्मीद है। विभागीय कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि अब रीवा संभाग की कमान किस अनुभवी अधिकारी को सौंपी जाएगी, ताकि विभाग की छवि और कामकाज में सुधार हो सके।

प्रशासनिक संदेश: रसूख पर भारी पड़ा सरकारी आदेश
इस फैसले को मध्य प्रदेश शासन की ओर से एक सख़्त संदेश माना जा रहा है। आमतौर पर स्टे मिलने के बाद अधिकारी लंबे समय तक अपनी जगह सुरक्षित रखने में कामयाब हो जाते हैं, लेकिन नीरव दीक्षित के मामले में लोक शिक्षण आयुक्त की दृढ़ता यह बताती है कि अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

निष्कर्ष: अनिश्चितता के दौर का अंत
प्रभारी जेडी नीरव दीक्षित की भोपाल रवानगी तय होने के बाद अब रीवा संभाग में शिक्षा विभाग की नई रूपरेखा तैयार होगी। शिकायतों के आधार पर किए गए इस बड़े बदलाव ने यह साफ कर दिया है कि रसूख चाहे कितना भी हो, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनता की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. नीरव दीक्षित का स्थानांतरण कहां किया गया है? उन्हें रीवा संभाग से हटाकर लोक शिक्षण कार्यालय (DPI), भोपाल में पदस्थ किया गया है।
2. क्या उन्हें हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी? जी हाँ, उन्हें हाईकोर्ट जबलपुर से अस्थायी स्थगन (Stay) मिला था, लेकिन लोक शिक्षण आयुक्त ने प्रकरण का अंतिम निराकरण करते हुए नया आदेश जारी कर दिया।
3. नीरव दीक्षित के खिलाफ मुख्य आरोप क्या थे? आदेश के अनुसार, उनके विरुद्ध विभिन्न कार्यकालों के दौरान कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं और वे लंबे समय से एक ही क्षेत्र (रीवा संभाग) में पदस्थ थे।
4. नीरव दीक्षित मूल रूप से किस पद पर कार्यरत हैं? वे मूल रूप से उप संचालक (Deputy Director) के पद पर हैं, लेकिन रीवा में प्रभारी संयुक्त संचालक (JD) का कार्यभार संभाल रहे थे।
5. नया आदेश कब लागू हुआ? लोक शिक्षण आयुक्त ने शासन के 12 जनवरी 2026 के आदेश के आधार पर उन्हें कार्यमुक्त करने के निर्देश जारी किए हैं।

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