तस्करों का नया पैंतरा फेल: रीवा में वीआईपी गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूम रहे थे संदिग्ध, पुलिस ने दबोचा
मध्य प्रदेश के रीवा जिले से कानून-व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। रविवार को रीवा शहर के मुख्य चौराहों और व्यस्त मार्गों पर उस समय हड़कंप मच गया, जब यातायात पुलिस की कई टीमों ने अचानक घेराबंदी करके लग्जरी गाड़ियों की सघन चेकिंग शुरू कर दी। इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने महिंद्रा थार (Thar) और टोयोटा फॉर्च्यूनर (Fortuner) समेत कई अन्य करोड़ों रुपये की महंगी एसयूवी वाहनों को जब्त किया है।
पुलिस की इस औचक कार्रवाई का मुख्य कारण इन वाहनों में पाई गई गंभीर अनियमितताएं थीं। कई रईसजादों और संदिग्धों ने अपनी गाड़ियों की पहचान छिपाने के लिए असली नंबर प्लेट के ऊपर एक फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए गाड़ियों के शीशों पर गाढ़ी काली फिल्म (ब्लैक फिल्म) चढ़ाई गई थी, जिससे गाड़ी के अंदर बैठे व्यक्ति को बाहर से देख पाना नामुमकिन था। रीवा पुलिस का साफ कहना है कि ऐसे वाहन शहर में बड़े अपराधों को अंजाम देने और पुलिस की आंखों में धूल झोंकने का एक मुख्य जरिया बन रहे हैं।
अपराधियों का नया हथियार: क्यों चुनी जा रही हैं थार और फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियां?
विगत कुछ समय से यह देखा गया है कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोग या अवैध धंधों में लिप्त तत्व अब पुरानी या खटारा गाड़ियों के बजाय नई और बेहद महंगी कारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। थार और फॉर्च्यूनर जैसी भारी-भरकम गाड़ियों को चुनने के पीछे अपराधियों की एक सोची-समझी रणनीति होती है:
रसूख और धौंस जमाना: सड़कों पर इन गाड़ियों को देखकर आम तौर पर पुलिस या आम लोग इन्हें किसी रसूखदार, नेता या बड़े व्यवसायी की गाड़ी समझकर जल्दी रोकने की हिम्मत नहीं करते।
तेज रफ्तार और सुरक्षा: यह गाड़ियां बेहद शक्तिशाली इंजन के साथ आती हैं, जिससे पुलिस द्वारा पीछा किए जाने की स्थिति में इन्हें तेजी से भगाया जा सकता है।
जांच को भटकाना: जब इन गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट लगा दी जाती है, तो रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरे या इंटीग्रेटेड प्रबंधन प्रणाली (ITMS) केवल उस फर्जी नंबर को रिकॉर्ड करते हैं। जब पुलिस उस नंबर की जांच करती है, तो वह किसी टू-व्हीलर या किसी अन्य निर्दोष व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड निकलती है, जिससे असली अपराधी का सुराग मिलना नामुमकिन हो जाता है।
नशीली कफ सिरप की तस्करी और अवैध परिवहन पर रीवा पुलिस की पैनी नजर
रीवा और आसपास के विंध्य क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप की अवैध तस्करी पुलिस के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। पुलिस के उच्च अधिकारियों के मुताबिक, तस्कर अब नशीले पदार्थों की सुरक्षित डिलीवरी के लिए इन्हीं फर्जी नंबर प्लेट वाले लग्जरी वाहनों का सहारा ले रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का बयान:
"हालिया जांचों और खुफिया इनपुट्स से यह साफ हुआ है कि जिले में होने वाली बड़ी चोरियों, अवैध हथियारों की तस्करी और नशीली सिरप के परिवहन में ऐसी गाड़ियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। असली नंबर को छिपाकर नकली नंबर का इस्तेमाल केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि संगीन वारदातों को अंजाम देकर सुरक्षित भाग निकलने के लिए किया जा रहा है।"
रविवार को चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने केवल चालान काटने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि हर एक संदिग्ध वाहन के इंजन नंबर, चेसिस नंबर और उनके मूल रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों का मिलान किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं ये गाड़ियां चोरी की तो नहीं हैं।
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत क्या होगी कानूनी कार्रवाई?
यातायात थाना प्रभारी अखिलेश कुशवाह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिन भी वाहनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है, उनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) की विभिन्न धाराओं के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फर्जी नंबर प्लेट लगाने वाले वाहन स्वामियों के खिलाफ सीधे धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी, साथ ही गाड़ी को तुरंत प्रभाव से जब्त कर लिया जाएगा। वहीं जिन गाड़ियों पर काली फिल्म लगी पाई गई है, उनके खिलाफ कोर्ट का चालान बनाया जा रहा है और मौके पर ही फिल्म को उतरवाया जा रहा है। जिन वाहनों के पास वैध दस्तावेज या रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं मिलेंगे, उन्हें पुलिस कस्टडी में रखकर आरटीओ (RTO) को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी।
थाना प्रभारी ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यह अभियान सिर्फ एक दिन का नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में इसे और अधिक आक्रामक तरीके से चलाया जाएगा। उन्होंने आम जनता और वाहन मालिकों से अपील की है कि वे अपनी गाड़ियों पर केवल सरकार द्वारा अधिकृत हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) का ही उपयोग करें। अगर किसी ने अपने शौक या किसी अन्य वजह से गाड़ी पर काली फिल्म लगा रखी है, तो वे पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए उसे तुरंत खुद ही हटा लें।