रीवा में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश! विवादित बयान देने वाली अमिलकी की महिला का माफीनामा वायरल, तथ्यों की पुष्टि के बाद दामिनी पटेल पर होगी वैधानिक कार्रवाई
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ और जातिगत टिप्पणी का एक नया मामला गरमा गया है। इंटरनेट पर "पंडित जी पायलागू" वाक्य से शुरू हुए एक वीडियो ने इस समय पूरे जिले में बवाल मचा रखा है। इस वीडियो में एक महिला द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली बातें कही गई हैं। वीडियो के सामने आते ही विभिन्न सामाजिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और विप्र समाज के लोगों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है और आरोपी महिला के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, पिछले कुछ घंटों से रीवा के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में दिखाई दे रही महिला यह तर्क दे रही है कि "पंडित जी पायलागू" (प्रणाम) बोल-बोलकर एक विशेष वर्ग को समाज में अत्यधिक महत्व दे दिया गया है, जो कि गलत है। महिला ने समाज के लोगों से आह्वान किया है कि शादी-विवाह, गृह प्रवेश, कथा और श्रीमद्भागवत जैसे तमाम पारंपरिक और धार्मिक अनुष्ठानों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया चर्चाओं के अनुसार, वीडियो में दिख रही महिला की पहचान कथित तौर पर ग्राम अमिलकी की रहने वाली दामिनी पटेल उर्फ भोली के रूप में की जा रही है। हालांकि, यह केवल प्राथमिक कयास हैं। जिला प्रशासन, पुलिस और जनसंपर्क विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से इस महिला के नाम, पते या वास्तविक पहचान की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच के बाद ही सही नाम सामने आ सकेगा।
आपत्तिजनक टिप्पणियों की सूची: वीडियो में कही गईं 10 मुख्य बातें
वायरल हो रहे वीडियो में महिला ने समाज को पूरी तरह से बांटने और बहिष्कार करने की बात कही है। वीडियो के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला ने समाज के सामने निम्नलिखित 10 आपत्तिजनक बातें रखी हैं:
- किसी भी ब्राह्मण समाज के जनप्रतिनिधि या नेता को मतदान (वोट) न देने की अपील।
- घर में होने वाले किसी भी मांगलिक या धार्मिक कार्य में पुरोहितों और ब्राह्मणों को आमंत्रित न करने की बात।
- मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए जाना पूरी तरह बंद करने की सलाह, क्योंकि वहां के पुजारी ब्राह्मण होते हैं।
- अपने बच्चों को शिक्षा या ट्यूशन के लिए किसी ब्राह्मण शिक्षक के पास न भेजने की हिदायत।
- कानूनी मामलों या अदालती पैरवी के लिए किसी ब्राह्मण अधिवक्ता (वकील) की सेवाएं न लेने की बात।
- व्यापारिक स्तर पर ब्राह्मणों द्वारा संचालित दुकानों या प्रतिष्ठानों से किसी भी प्रकार की खरीदारी का बहिष्कार।
- धार्मिक अनुष्ठानों के बाद दी जाने वाली पारंपरिक दक्षिणा या दान पर पूरी तरह रोक लगाना।
- समाज में शिष्टाचार के नाते किए जाने वाले नमस्कार, प्रणाम या 'पायलागू' जैसे शब्दों के प्रयोग को बंद करना।
- व्यावसायिक क्षेत्रों में किसी भी ब्राह्मण व्यक्ति के साथ व्यापारिक साझेदारी (Partnership) या संबंध समाप्त करना।
उन्हें सामाजिक रूप से अपना शत्रु या दुश्मन मानकर व्यवहार करने का भड़काऊ संदेश।
विरोध के बाद आया दूसरा वीडियो: कान पकड़कर मांगी माफी
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, रीवा संभाग सहित पूरे मध्य प्रदेश में इसका पुरजोर विरोध शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर महिला की गिरफ्तारी को लेकर मुहिम छिड़ गई। चौतरफा दबाव और कानूनी कार्रवाई के डर के बीच संबंधित महिला का एक और वीडियो सामने आया है।
इस दूसरे वीडियो में महिला का रुख पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। वह कैमरे के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक लगाने जैसी मुद्रा में है और अपने पहले दिए गए बयान पर गहरा खेद व्यक्त कर रही है। वीडियो में वह यह कहती सुनाई दे रही है कि उससे बहुत बड़ी भूल हुई है, वह अपने शब्दों को वापस लेती है और पूरे समाज से हाथ जोड़कर क्षमा याचना करती है। हालांकि, समाज के विभिन्न गुटों का कहना है कि सिर्फ वीडियो बनाकर माफी मांग लेने से अपराध कम नहीं हो जाता, कानूनन कार्रवाई होनी ही चाहिए।
पुलिस प्रशासन का रुख: रीवा एसपी गुरुकरण सिंह का बड़ा बयान
इस पूरे विवाद पर रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) गुरुकरण सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। एसपी ने मीडिया को बताया कि वीडियो की जानकारी पुलिस के संज्ञान में आई है। प्राथमिक जांच और इनपुट के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि वीडियो में दिखाई दे रही महिला रीवा शहर की मूल निवासी नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र या बाहरी जिले से ताल्लुक रखती है।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीमें वीडियो की तकनीकी सत्यता (Authenticity) की जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो कब और कहाँ शूट किया गया था, और इसे सबसे पहले किस सोशल मीडिया हैंडल से अपलोड किया गया। संबंधित महिला की वास्तविक पहचान स्थापित करने के लिए भी पुलिस टीमें काम कर रही हैं। तथ्यों और सबूतों की पुष्टि होते ही वैधानिक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
सोशल मीडिया एडवाइजरी: भड़काऊ पोस्ट पर पुलिस की सख्त चेतावनी
गौरतलब है कि रीवा जिला पुलिस प्रशासन पहले ही सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। पुलिस द्वारा पूर्व में ही एक आधिकारिक एडवाइजरी (Advisory) जारी की जा चुकी है, जिसमें साफ कहा गया है कि इंटरनेट पर किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक, भड़काऊ या सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट शेयर करना, लाइक करना या कमेंट करना दंडनीय अपराध है।
इस मामले के बाद पुलिस ने एक बार फिर रीवा के नागरिकों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और इस विवादित वीडियो को आगे फॉरवर्ड या शेयर न करें। भड़काऊ पोस्ट के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।